क्‍या निशीथ जोशी पर रुद्रेश के ये आरोप सही हैं या साजिश?

अमर उजाला, नोएडा में जूनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत रुद्रेश सिंह ने बनारस के पूर्व संपादक निशीथ जोशी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. रुद्रेश ने यह आरोप अपना तबादला वाराणसी से नोएडा होने तथा ज्‍वाइन करके वापस बनारस आने के बाद लगाए हैं. अब ये आरोप कितने सही हैं और कितने गलत हैं यह तो जांच का विषय है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं यह निशीथ जोशी के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं है. सवाल दोनों तरफ से खुले हुए हैं कि इस मामले में सही कौन है और गलत कौन है? आप भी पढि़ए रुद्रेश का पत्र… 

आदरणीय श्री राजुल माहेश्‍वरी जी,
प्रबंध निदेशक, अमर उजाला,

सुना था किसी संस्‍थान का मालिक भगवान स्‍वरूप होता है। कुछ इसी आशा और विश्‍वास से आपके बनारस यूनिट में तैनात एक छोटे पद का कर्मचारी अपनी समस्‍याओं को लिख रहा है, जिससे उसे न्‍याय मिल सके। मामला आपके निर्वतमान संपादक श्री निशीथ जोशी से जुड़ा है जो सहारा और माया पत्रिका में आरोपित होकर निकाले जाने के बाद आपके संस्‍थान में काम कर रहे हैं। ज्ञात हो कि अप्रैल माह में वाराणसी के सोनारपुरा स्थित एक विधवा बंगाली महिला के मकान पर काशीवास की इच्‍छा से श्रीजोशी ने अमर उजाला में खबर छापकर कब्‍जा करने का प्रयास किया। इसके लिए बनारस में तैनात क्राइम रिपोर्टर अजीत सिंह ने भरपूर सहयोग किया। जब सहयोग की इच्‍छा रुद्रेश सिंह से जाहिर की गयी तो उन्‍होंने साफ इनकार कर दिया। इस पर उन्‍हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गयी। अपने नौ माह के कार्यकाल में श्री जोशी ने कर्मचारियों को आपस में लड़ाने की कवायद की, अखबार के हित में कुछ भी नहीं किया।

एक अन्‍य प्रकरण में सनबीम ग्रुप के चेयरमैन दीपक मधोक के स्‍कूल के खिलाफ खबरों को प्रकाशित कर उन्‍हें भी अरदब में लेने का प्रयास किया गया, लेकिन ऊंची रसूख का होने के चलते मधोक पर जोशी की दाल नहीं गली और 23 अप्रैल को बनारस यूनिट में मधोक के साथ घंटों मीटिंग के बाद फैसला हुआ कि मधोक के खिलाफ अब कोई खबर नहीं छपेगी। इसका निर्देश मीटिंग सभी रिपोर्टरों को दिया गया। इसके अलावा बनारस में एक पेट्रोल पंप पर कुछ अनबन होने के बाद श्री जोशी ने लगभग एक पखवारे तक पेट्रोल डीलरों के खिलाफ खबर छपवायी। अंतत: एसोसिएशन के लोग चांदपुर कार्यालय में जाकर माफी मांगी उसके बाद खिलाफ में खबरों का सिलसिला रुका। ऐसे तमाम नजीर हैं, जिसपर एक दागी संपादक ने कवायद कर अपने हित के अखबारी मानदंडों की बलि दी।

अत: आपसे निवेदन है कि इस प्रकरण में आपके संस्‍थान के एक छोटे से कर्मचारी की बलि दी जा रही है, जिसका इंप्‍लाई कोड vn/684 और नोयडा में hq/2823 है। पैसे की किल्‍लत और सेम सेलरी पर गुजारा करने पर असमर्थ ये कर्मचारी 24 जून को 25 दिन नौकरी करने के बाद बनारस के लिए विदा हो गया। इस दौरान एचआर वैभव वशिष्‍ठ ने इस्‍तीफा लिखवाने का पुरजोर प्रयास किया। और कहा कि मैं ये लिखूं कि मैं अपने परिवारिक कारणों से संस्‍थान छोड़ रहा हैं। अपके कर्मचारी ने साफतौर मना कर दिया तो सैलरी एडवांस के नाम पर सादे पेपर पर हस्‍ताक्षर कराया गया, उसका क्‍या प्रयोग किया जायेगा पता नहीं। अत: आपसे निवेदन है कि इस प्रकरण की जांच कराकर न्‍याय करें, जिससे अखबार की गरिमा बनी रहे।

रुद्रेश सिंह
अमर उजाला

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