क्‍या सपा प्रमुख भी यूपीए से वापस लेंगे समर्थन या सीबीआई से डर जाएंगे?

नई दिल्ली : द्रमुक के समर्थन वापस लेने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ टिप्पणी के लिए केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार को संशय में रखा है। इस मामले में सख्त दिख रहे मुलायम ने गुरुवार सुबह नौ बजे समाजवादी पार्टी के सांसदों की बैठक बुलाई है। अब तक स्‍पष्‍ट नहीं है कि मुलायम सिंह समर्थन वापस लेंगे या जारी रखेंगे। हालांकि करुणानिधि के पुत्र स्‍टालिन के घर पर पांच साल पुराने मामले में सीबीआई छापा पड़ने के बाद संभावना कम ही है कि मुलायम कांग्रेस से समर्थन वापस लेंगे।

उल्‍लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणियों के लिए बुधवार को खेद जताया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाकात के बाद वर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि यदि मेरी टिप्पणियों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मुझे खेद है। वर्मा ने उत्तर प्रदेश में पिछले सप्ताह एक रैली में यादव को गुंडा तथा आतंकवादी बताया था, जिन्हें लेकर विवाद उठ खडा हुआ था।

बेनी प्रसाद वर्मा द्वारा सिर्फ खेद जताए जाने से संतुष्ट न होते हुए मुलायम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और बाद में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से चर्चा की। सख्त दिख रहे मुलायम ने कहा कि उन्होंने कल सुबह नौ बजे सपा सांसदों की बैठक बुलाई है। जिसमें फैसला लिया जाएगा कि वे कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को अपना समर्थन जारी रखे या वापस ले लें। बेनी द्वारा खेद जताए जाने के बाद भी मुलायम कठोर दिख रहे हैं। उन्‍होंने इस मामले पर पत्रकारों से कहा कि वे सपा सांसदों का विचार सुनने के बाद फैसला करेंगे।

मुलायम को शांत करने के कांग्रेस नेताओं के निराश प्रयासों के बीच सपा प्रमुख ने राकांपा मुखिया शरद पवार से मुलाकात की, जिससे ऐसे समय राजनीतिक जोड़तोड़ की अटकलें लगाई जा रही हैं जब मध्यावधि चुनावों के बारे में चर्चा शुरू होने लगी है। दोनों नेताओं ने मुलाकात को यह कहते हुए कमतर करने की कोशिश की कि उन्होंने 24 मार्च को होने वाले एक कार्यक्रम के तौर तरीकों पर चर्चा के लिए बैठक की। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब सपा वर्मा के इस्तीफे की मांग कर रही है और द्रमुक सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद मेलमिलाप की संभावना से इनकार कर रही है।

पर इस बीच चेन्‍नई में हुए घटनाक्रम से अब इसकी संभावना बहुत ही कम दिख रही है कि मुलायम सिंह यादव की पार्टी कांग्रेस की यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेगी। दो दिन पहले यूपीए से समर्थन वापस लेने वाले डीएमके के मुखिया करुणानिधि के पुत्र स्‍टालिन के घर सीबीआई छापा पड़ गया है। इसकी चर्चा इसलिए भी हो रही है कि यह मामला पांच साल पुराना है। छापेमारी के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले से ही सीबीआई पर केंद्र सरकार की कठपुतली होने तथा कांग्रेस ब्‍यूरो ऑफ इनवेस्‍टीगेशन के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि सीबीआई छापेमारी से कांग्रेस ने सपा को भी चेतावनी दे दी है।

आय से अधिक सम्‍मपत्ति मामले में फंसे मुलायम सिंह यादव को भी कांग्रेस ने सीबीआई का डर दिखा दिया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा बेनी प्रसाद वर्मा के बयान मामले में कोई कठोर कदम उठाने से बचेगी। राजनीतिक हलको में डीएमके ने स्‍टालिन के घर सीबीआई छापा को कांग्रेस का एक तीर से दो शिकार माना जा रहा है। डीएमके समर्थन वापसी के बाद कोई परेशानी पैदा ना करे और सपा कम से कम सीबीआई डर से मुश्किल में चल रहे यूपीए सरकार से समर्थन वापस ना ले।

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