खबर को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया के जरिए उन्माद फैलाने की साजिश

भरोसे के भयानक संकट के समय में हैं हम. ऐसे में कथित समर्थकों द्वारा ही हिन्दू धर्म और राष्ट्र को बदनाम करने की परिपाटी सी भी चल पडी है. वेब मीडिया पर सक्रिय कुछ ऐसे तत्व हैं जो फोटो को विकृत कर, किसी अखबारी क्लिप को एडिट कर मुसलामानों के खिलाफ उन्माद फैलाने के काम में लगे हैं. वे अगर ऐसा सोच-समझ कर कर रहे हैं ताकि भाजपा को बदनाम किया जा सके तो उसकी जाँच होनी चाहिए. लेकिन अगर वे ये सोच कर ऐसा कर रहे हैं की इससे किसी पार्टी या व्यक्ति का भला होगा तो ऐसे मुर्ख मित्रों से बुद्धिमान दुश्मन ज्यादा अच्छे.

पिछले दिनों जागरण में वन्दे मातरम् गाये जाने पर बच्चों की पिटाई हुई की एक सच्ची खबर छपी थी. उस खबर में उप-शीर्षक को तोड़-मरोड़ कर उसे पेश किया गया था. मैंने भी उस क्लिप को पोस्ट किया था. फिर मेरे वाल से भी सवा सौ से ज्यादा लोगों ने उसे शेयर किया था. काफी बाद में मित्र संजीव सिन्हा ने इस ओर ध्यान आकृष्ट किया. फिर थोड़ा गौर से देखने पर यह झूठ सामने आ गया. मैं इसे पोस्ट करने के लिए शर्मिन्दा हूँ. वास्तव में ऐसे कृत्यों से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व भी शर्मिन्दा होगा. वर्धा ब्लौगर सम्मलेन में भी छात्रों ने इस विषय को उठाया था.

लानत भेजता हूँ ऐसे छुपे हुए भेड़ियों पर. भर्त्सना करता हूँ ऐसे तत्वों की. बेनकाब होने चाहिए ऐसे बिन पेंदी के लोटे जिन्हें किसी राजनीतिक संगठन से कोई मतलब नहीं है, बावजूद उसके उनके कारण पार्टी को नुकसान होता है. हम बार-बार यह कहते हैं की मानवता से बढ़ कर हमारे लिए न राष्ट्र है, न विचारधारा और न ही कोई राजनीतिक दल. राष्ट्रवाद और हिंदुत्व में भी इसीलिए सादर भरोसा है क्यूंकि इसे मैं ज्यादा मानवीय मानता हूँ. आइये सब मिल कर थूक फेकें ऐसे उन्मादी तत्वों पर. और ऐसे जो भी तत्व मेरी सूची में हों कृपया वे दफा हो जाय यहाँ से. मेरा यह वाल उनके दुष्प्रचार के लिए नहीं है.

पत्रकार और बीजेपी नेता पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से

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