खबर को शिकायत मान चुनाव आयोग करेगा कार्रवाई

नई दिल्ली : चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अब अखबार में प्रकाशित खबर ही पर्याप्त होगी, क्योंकि इसे चुनाव आयोग शिकायत मान लेगा। यह जानकारी भारतीय चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राउत ने सोमवार को नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के कनवेंशन हॉल में मीडिया के लिए आयोजित कार्यशाला में दी।

उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए निगरानी प्रणाली बनाई जा रही है जो चौबीस घंटे पेड न्यूज की शिकायतों पर नजर रखेगी। इस तरह की शिकायत आने पर संबंधित उम्मीदवार, राजनीतिक पार्टी और मीडिया हाउस का नाम वेबसाइट पर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन वैश्रि्वक स्तर पर भारत में मतदान का प्रतिशत कम हुआ है।

इसे बढ़ाने के लिए सूचना, प्रेरणा और सहुलियत पर काम किया जा रहा है। यानी कि मतदाताओं को जागरूक करने के साथ उन्हें मतदान करने के लिए प्रेरित करते हुए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराकर यह पता लगाया जा रहा है कि किस इलाके में कौन-सा समूह या किस तरह के लोग किन कारणों से मतदान नहीं करते हैं। इसके आधार पर समस्या दूर करने के लिए कदम उठाया जाएगा।

वैज्ञानिक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि शिक्षा व आर्थिक हैसियत बढ़ने के साथ हीं मतदान का अनुपात कम हो रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सहित अन्य शहरों में महिलाएं, युवा वर्ग, ज्यादा पढ़े-लिखे लोग तथा विस्थापित मतदान के प्रति अपेक्षाकृत ज्यादा उदासीन हैं। वहीं चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वालों का मतदान फीसद ज्यादा होता है। इस बार दिल्ली में ज्यादा युवाओं ने पंजीकरण कराया है। इसलिए उम्मीद है मतदान में इनकी भागीदारी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि चुनाव में मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए जिला स्तर पर मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी [एमसीएमसी] गठित की जाएगी। हालांकि, वेबसाइट और सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की अभी कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन इसके लिए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से बात चल रही है। शीघ्र ही इन पर भी निगरानी के लिए तंत्र बना लिए जाने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जिला स्तर पर सर्वे व अनुसंधान कर जागरूकता कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसे मंजूरी के लिए भारतीय चुनाव आयोग के पास भेजा गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने बताया कि चुनाव आचार संहिता लागू होते ही मतदाता जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सर्वे से यह बात सामने आई है कि ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध करा युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर कुछ सोशल मीडिया ग्रुप के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक आदर्श मतदान केंद्र बनाया जाएगा। चुनाव आयोग ने पिछले चार वर्षो में 17 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पेड न्यूज के 14 सौ मामलों का पता लगाया है। इनमें सबसे ज्यादा पंजाब विधानसभा चुनाव के 523 मामले हैं। इसके बाद गुजरात विधानसभा चुनाव के 414, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के 104 तथा कर्नाटक विधानसभा चुनाव के 93 मामले हैं।

कार्यशाला में दिल्ली के विशेष मुख्य चुनाव अधिकारी शूरबीर सिंह, अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नीरज भारती सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। चुनाव पूर्व धन की बर्बादी रोकने में आयोग असहाय चुनाव में धन की बर्बादी रोकने के लिए तो चुनाव आयोग कई कदम उठा रहा है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले सता पक्ष व अन्य पार्टियों के प्रचार अभियान व बड़ी रैलियों को रोकने में वह असहाय है। इसके लिए उसके पास कोई अधिकार नहीं है। इस स्थिति का लाभ उठाकर राजनीतिक पार्टियों ने दिल्ली में प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, जिस पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है।

विधानसभा चुनाव की अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन, राजधानी के हर कोने में चुनाव प्रचार अभियान शुरू हो गया है। जगह-जगह होर्डिग लगे हुए हैं और दीवारें पोस्टरों से पटने लगी हैं। इसके साथ ही रैली व शक्ति प्रदर्शन का भी दौर चल रहा है। जहां पार्टी स्तर पर लाखों रुपये खर्च कर बड़ी रैली आयोजित की जा रही है, वहीं टिकट के दावेदार अपनी शक्ति दिखाने के लिए तथा संभावित उम्मीदवार अपनी हवा बनाने को अपने-अपने इलाके में रैली व अन्य आयोजन का सहारा ले रहे हैं। इन्हें चुनाव आयोग के डंडे का भी कोई डर नहीं है, क्योंकि वे जानते हैं कि आयोग के पास उन्हें रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

भारतीय चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राउत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रचार पर होने वाले खर्च को रोकने के लिए कानूनी तौर पर आयोग के पास कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, चुनाव से छह माह पहले तक इस तरह के प्रचार अभियान पर रोक लगाने की बात चल रही है, लेकिन अभी यह प्रस्ताव चर्चा से आगे नहीं बढ़ सका है। (दैनिक जागरण)

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