‘खबर भारती’ चैनल और पोर्टल बंद, सैकड़ों बेरोजगार

'खबर भारती' नामक एक न्यूज चैनल बंद हो गया है. इस चैनल का न्यूज पोर्टल भी बंद हो चुका है. न्यूज पोर्टल 'खबरभारती.टीवी' खोलने पर लिखा मिलता है कि नान-पेमेंट के कारण इसे बंद कर दिया गया है. यह पोर्टल अपडेट नहीं हो रहा है. आखिरी खबर मंडेला के मरने पर दुनिया भर में शोक की लहर से संबंधित है. खबर भारती न्यूज चैनल के दम तोड़ देने से सैकड़ों मीडियाकर्मी बेरोजगार हो गए हैं.

साईं प्रकाश टेलीकम्यूनिकेशन जो कि मूल रूप से एक चिटफंड कंपनी है, 'ख़बर भारती' के नाम से चैनल संचालित कर रही थी. चूंकि इसके मालिक पुष्पेंद्र सिंह बघेल के चिटफंड का सारा कामकाज मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ में केंद्रित है तो चैनल का फोकस एरिया भी यही दो स्टेट थे. कंपनी के मालिक चिटफंड के गोरखधंधे में जेल क्या गए, इनका सारा कारोबार बैठने लगा. इस ग्रुप का मीडिया भी आर्थिक तंगी का शिकार होने लगा और लोगों को कई कई महीने तक तनख्वाह नहीं मिली.

वेतन न मिलने पर इस चैनल के कर्मियों ने मुकदमा भी दर्ज कराया. काम भी बंद किया. पर चैनल के प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ा. अंततः चैनल को बंद कर देना पड़ा. कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों को दो से 6 महीने तक की सेलरी नहीं मिली है. भत्ते, पीएफ, नोडयूज़ आदि नहीं दिए गए हैं. चैनल हैड प्रज्ञान भट्टाचार्य हुआ करते थे. चर्चा है कि प्रज्ञान इन दिनों किसी नई पार्टी को पकड़ कर एक चैनल लाने की कोशिश में हैं.

ज्ञात हो कि खबर भारती में फर्जीवाड़े की शुरुआत चैनल लांच कराने वाले मप्र के टीएन मनीष और आजतक से जुडे रहे यूपी के नाज़िम नकवी में विवाद के बाद से ही हो गई थी. दोनों के चैनल छोड़ने के बाद न्यूज एक्सप्रेस से प्रशांत शुक्ला ने दायित्व संभाला लेकिन वो भी जल्द चलते बने. इसके बाद खबर भारती का जहाज डूबना शुरू हुआ. प्रज्ञान भट्टाचार्य को कंपनी ने चैनल हेड बनाया. इनके राज में पत्रकारों की सैलरी रोक दी गई. बाद में मोबाइल पेट्रोल समेत तमाम भत्ते और बाद में पीएफ की राशि भी खाते में डालनी बंद हो गई.

पत्रकारों पर दलाली और फर्जी ख़बरें बनाकर लोगों से वसूली का दबाव बनने लगा. मजबूरन पत्रकारों को नौकरी छोड़नी पड़ी और इसके बाद कंपनी ने उनकी 2 से 6 महीने की सैलेरी व अन्य भत्ते रोक दिये. अब जबकि यह चैनल बंद हो चुका है, इसके कर्मचारी दूसरे चैनलों में जाने लगे हैं. दर्जनों मीडियाकर्मियों ने दूसरे चैनलों के साथ नई पारी की शुरुआत कर दी है लेकिन अब भी ढेर सारे ऐसे मीडियाकर्मी हैं जो न इधर के हुए और न उधर के, यानि वे बेरोजगार हैं.

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