खाकी के शिकंजे में मीडिया का जलबा

मथुरा। आज के अर्थ भरे आधुनिक युग में मीडिया, पुलिस, प्रशासन, माफिया के तथा कथित गठजोड़ की चर्चाऐं भले ही जग जाहिर हों लेकिन जनपद में खाकी का कहर गठजोड़ में लिप्त तथाकथित पत्रकारों पर जमकर टूट रहा है। जिसमें गोवर्धन, राया, मथुरा के पत्रकारों में हड़कम्प मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की बिगड़ती छवि एवं ध्वस्त होती कानून कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश के डीजीपी देवराज नागर अफसरों को अपराधियों एवं माफियाओं पर कहर बनकर टूटने तथा मीडिया से बेहतर सम्बन्ध बनाने का भले ही फरमान जारी कर रहे हों लेकिन जनपद में कालेकारोबार में लिप्त माफियाओं से टकराना एवं ब्लैकमेल करना कथित मीडिया कर्मियों को महंगा साबित हो रहा है।

पिछले काफी समय से काले कारोबार की मण्डी बनी श्री कृष्ण की नगरी में मीडिया, पुलिस, माफिया एवं अपराधी के गठजोड़ के कारनामें उजागर होते रहे हैं। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही व्यवस्था में बदलाव आना शुरू हो गया। पुलिस चौकी, थाना, तहसील से लेकर जनपद, मण्डल के साथ-साथ राज्य मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों के पदों पर परिवर्तन आ गया।

जनपद में काला तेल, शराब तस्करी, सट्टा, राशन कालाबाजारी, सैक्स कारोबार, अवैध खनन, पार्किंग, शिक्षा, टटलू गैंग, जमीन कब्जाने आदि अवैध कार्यों में माफियाओं, पुलिस, राजनेता के साथ-साथ तथाकथित पत्रकारों की या तो लिप्तता रही है या फिर उनके संरक्षण के बदले महीनेदारी का खेल चलता रहा है। चर्चा तो यहां तक जनपद में तैनात रहे एक पूर्व आईपीएस अधिकारी पर तो कालेकारोबार में माफियाओं के साथ शामिल होने के आरोप तक लगते रहे हैं। तो वहीं माफियाओं के बचाव में खड़े होते नजर आये हैं।

सूत्रों की मानें तो माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही को लेकर मीडिया के कुछ लोगों एवं पुलिस प्रशासन के मध्य कई बार टकराव भी होते-होते बचा है। बताया जाता है कि पिछले दिनों रिफायनरी थाना क्षेत्र में काले तेल माफियाओं से सपा का झण्डा लगी गाड़ी से चौथ वसूलने पहुंचे तीन चार पत्रकारों की माफियाओं ने पिटाई कर पुलिस को सौंप दिया था। जिसमें पुलिस ने पत्रकारों को मुर्गा बना कर माफी मांगने के बाद उन्हें तो छोड़ दिया। लेकिन गाड़ी को सीज कर दिया। इसी तरह का दूसरा मामला गोवर्धन थाना का जहां पुलिस के मुखबिर एवं दलाल की सक्रिय भूमिका निभाने वाले कथित पत्रकार ने जब थाने के अधिकारी को आखें दिखाईं तो पुलिस ने उसे ही चोरी की बाइक सहित जेल के सीखचों में पहुंचा दिया।

गोवर्धन पुलिस की इसे हौसला अफजाई कहें या पत्रकारों की आपसी गुटबन्दी कि पुलिस ने एक और पत्रकार को सैक्स रैकेट में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले की आग ठण्डी भी नहीं हो पायी थी कि गोवर्धन में कालाबाजारी के लिये जा रहे राशन गेंहूं की इलैक्ट्रोनिक मीडिया के दो पत्रकारों द्वारा फोटोग्राफी करने पर राशन विक्रेता ने अवैध वसूली का आरोप लगाते हुऐ पहले तो उनकी जमकर पिटाई की फिर पुलिस को सौंप दिया जिन्हें जांच पड़ताल के नाम पर 20 घण्टे तक हिरासत में रखने के बाद छोड़ा गया। इस घटना को अभी चन्द घण्टे भी नहीं गुजरे थे कि पुलिस ने गोवर्धन के ही एक और पत्रकार की जमकर मरम्मत कर दी। इस मामले पर मीडिया की खामोशी को देख गोवर्धन पुलिस ने चौबीस घण्टे भी नहीं गुजारे थे कि वाहन खड़े करने पर कहासुनी को लेकर परिजनों के साथ गोवर्धन थाने पहुंचे दैनिक पत्र के संवाददाता को जनता एवं अन्य मीडिया कर्मियों के सामने ही दरोगा ने जबरदस्त पिटाई कर थाने में बंद कर दिया।

इस घटना की जानकारी जब मथुरा कार्यालय में तैनात गोवर्धन के वरिष्ठ पत्रकार को हुई तो कुछ स्थानीय पत्रकारों के साथ गोवर्धन थाने पहुंचे तो वहां दरोगा को खरी खोटी सुनाने पर पीड़ित पत्रकार को छोड़ा गया। गोवर्धन के पत्रकार अभी उपरोक्त हादसों से उबर भी नहीं पाये थे कि आगरा से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र के निवर्तमान तथा वर्तमान में मथुरा से प्रकाशित संवाददाता ने आगरा से ही प्रकाशित दो प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाताओं पर पुलिस की दलाली करने एवं निर्दोषों के उत्पीड़न की शिकायत शासन से किये जाने पर एन्टी करप्शन लखनऊ की टीम ने शनिवार को गोवर्धन पहुंचकर आरोपित पत्रकारों के बयान दर्ज कर वापिस लौट गई। इस घटना में कितना झूठ कितना सच है यहां जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा। लेकिन गोवर्धन में मीडिया की जंग एवं उसकी कार्यशैली को जरूर उजागर कर दिया है। जिससे खाकी मीडिया पर भारी साबित हो रही है।

एक अन्य मामला राया थाना प्रांगण का है जहां पिछले दिनों एक पत्रकार किसी खबर के लिये थाना गया तो वहां उसने गुटखा की पीक को थूक दिया। जिसे एसएसपी के पीआरओ रहे एवं वर्तमान रायाध्यक्ष संजय पाण्डेय ने देख लिया और पत्रकारों को जमकर गालियां देते हुऐ थूकी गई पीक को साफ करने पर मजबूर कर दिया। इस घटना को लेकर कस्बा राया एवं मथुरा के पत्रकारों ने एसएसपी आर.के.एस. राठौर से मुलाकात कर घटनाक्रम से अवगत कराया। जिसमें थानाध्यक्ष को कड़ी चेतावनी देकर मामले पर पर्दा डाल दिया। इसी तरह शहर की चौकी बाग बहादुर के प्रभारी द्वारा पिछले दिनों शहर के एक क्राइम रिपोर्टर के साथ अभद्रता कर दी गई। जिसे लेकर पत्रकारों का एक गुट चौकी प्रभारी के पक्ष में खड़ा हो गया। जिससे मामला ठण्डा पड़ गया। इसी तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन उनका शोर कहीं नजर नहीं आ रहा है।

‘‘अपनी-अपनी ढ़पली, अपना-अपना राग‘‘ की कहावत जनपद के करीब एक दर्जन पत्रकार संगठनों पर सटीक साबित हो रही है। जो पत्रकारों के हितों का तो दावा करते हैं लेकिन उनके उत्पीड़न के समय दूर-दूर तक नजर नहीं दिखाई देते हैं। मीडिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जनपद में छोटे-बड़े मिलाकर करीब एक दर्जन पत्रकार संगठन हैं जिसमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने संगठन की सदस्यता के नाम पर धन वसूली अभियान चलाकर अपराधी एवं माफियाओं को भी पत्रकारिता का कार्ड थमा दिया है। जो वाहनों पर प्रेस लिखवाकर आम जनता के साथ-साथ पुलिस पर अपना रूतबा जमाते हैं। जब कुछ संगठन के कर्ता-धर्ता पत्रकारों के हितों के स्थान पर माफियाओं का हित साधने में लगे हुऐ हैं। जबकि कुछ पत्रकार नेता बड़े पत्रकारों के हितों तक सीमित नजर आते हैं। और उनका आम पत्रकारों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।

उपमन्यु की रिपोर्ट.

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