खाकी वर्दी के जोर-जुल्म के खिलाफ उठने वाले इन हाथों को सलाम

Nitin Thakur : खाकी वर्दी के ज़ोर-जुल्म पर कोई नहीं बोलेगा, ये सोचनेवाले अपनी राय बदल लें..आपको तीन उदाहरण दूंगा..अगर पूरा पढ़ सकें तो पढ़ें वरना आगे बढ़ें… अलीगढ़ (17 अप्रैल 2013 ) – बलात्कार और हत्या कर एक 6-7 साल की मासूम को कुंए में फेंक दिया गया..सड़क पर 70 साल की एक वृद्धा प्रदर्शन कर रही थी..खाकी पहने डीएसपी को इतना जोश आया कि वृद्धा को लाठी से धकियाया..वो बेचारी जीर्ण-शीर्ण उछलकर बहुत दूर गिरी..मगर तभी वो उठी और पलटवार करने के लिए आगे बढ़ी….

लखनऊ (17 अप्रैल 2013 ) – एक लड़का पुलिस हिरासत में ही मर गया..उसकी बूढ़ी मां दारोगा के सामने विलाप कर रही थी..रो-रो कर अपनी व्यथा बता रही थी..दारोगा बेपरवाह इधर-उधऱ देख रहा था..खुद को वाजिब तवज्जो मिलती ना देख उस बूढी मां को गुस्सा आ गया.. प्रार्थना में जुड़े हाथ कब खुले और कब एक करारा तमाचा उस संवेदनहीन दारोगा के गाल पर चस्पां हुआ किसी को पता भी नहीं चला लेकिन दारोगा की आंखें तब तक सही से खुल गई थीं..

दिल्ली (19 अप्रैल 2013)- बलात्कार और उसके अलावा घिनौनी हरकतों की शिकार 5 साल की मासूम का हाल जानने अस्पताल पहुंची दो लड़कियों पर दिल्ली पुलिस के एसीपी को इतना गुस्सा आया कि उसने एक लड़की को कैमरों के सामने दो तमाचे जड़ दिए..लड़की के कान से खून रिसने लगा..दूसरी लड़की ने ये सब होते देखा लेकिन हिम्मत नहीं खोई..उसने तुंरत आगे बढ़कर तमतमाए एसीपी की नेमप्लेट पकड़कर उसका नाम पढ़ा..मैंने महसूस किया कि मेरे चेहरे पर अनजाने में मुस्कुराहट तैर गई…

नितिन ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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