खालिद मुजाहिद आतंकी था तो मुआवजा क्‍यों?, कोर्ट में चुनौती

Nutan Thakur : खालिद मुजाहिद के परिवार को मुआवजा को हाई कोर्ट में चुनौती. मैंने कथित आतंकी खालिद मुजाहिद के परिवार को छह लाख रुपये मुआवजा दिए जाने को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका आज इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में दायर किया है.

याचिका में कहा गया है कि चूँकि खालिद आज भी सरकारी अभिलेखों में आतंकी है जो एक गंभीर आतंकी घटना का अभियुक्त बताया जाता है, अतः उसे मृत्यु के बाद मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए था. सरकारी अभिलेखों में आतंकी के परिवार को मुआवजा दिया जाना संविधान में लिखित प्रस्तावना और मौलिक कर्तव्यों , जिनमे देश की एकता, अखंडता और सार्वभौमिकता पर विशेष बल दिया गया है, के विपरीत है.

अतः मैंने इस मामले में तत्काल एक अवकाशप्राप्त हाई कोर्ट जज से जांच कराये जाने की मांग की है कि खालिद को सही पकड़ा गया था अथवा वह निर्दोष था. यदि वह निर्दोष फंसाया गया तो उसे मुआवजा के साथ ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी विधिक कार्यवाही हो. लेकिन यदि जांच में पाया जाता है कि खालिद निर्दोष नहीं फंसाया गया था और वास्तव में इस घंटना में संलिप्त था तो उसके परिवार से मुआवजा वापस वसूला जाए. कुल मिला कर इस प्रकार से वोट बैंक की राजनीति देश के लिए काफी खतरनाक साबित हो रही है. मेरी याचिका इसी के परिप्रेक्ष्य में है.

डा. नूतन ठाकुर के एफबी वॉल से साभार.

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