Yashwant Singh : यूपी के चिरकुट पत्रकार, जो ज्यादातर मान्यताप्राप्त हैं, फ्री इलाज मिलने के बाद लहालोट हुए जा रहे हैं… अगर कहीं इन्हें अखिलेश यादव मिल गए तो उनका पांव धोकर पानी पी लेंगे… ये साले क्या सरकार के खिलाफ लिखेंगे… एक तो ये लोग जिन माध्यमों में काम करते हैं उनके मालिक खुद ब खुद डील किए हुए हैं मुलायम अखिलेश सपा आदि से.. तो, इऩ पत्रकारों के पास न तो डील करने की औकात बचती है और न विरोध में लिखने की. ऐसे में ये नौकर टाइप मान्यता प्राप्त पत्रकार अपने फ्री इलाज सुविधा से लहालोट न हों और जनम सुफल होई जाए जैसी यशोगाथा गाते हुए यूपी सरकार को बार बार थैंक्यू थैंक्यू न कहें तो बेचारे क्या कहें… मुझे इन पर तरस आ रहा है.. और, आजकल की पत्रकारिता पर भी..
xxx
स्वास्थ्य और शिक्षा, ये दोनों मूलभूत अधिकार हैं, और इसे हर देश में मूलभूत अधिकार होना चाहिए. और, स्टेट की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह नेताओं पत्रकारों की ही नहीं, सभी नागरिकों के इलाज की फ्री में व्यवस्था करे. जैसे फ्री शिक्षा, वैसे फ्री हेल्थ.. वेस्ट कंट्रीज में हेल्थ और एजुकेशन सरकार की जिम्मेदारी है… पर अपने यहां जो जुगाड़ लगा ले, दबाव बना ले, उसका जीवन तो सुफल.. बाकी घुरहू कतवारू मरें तो मरते रहें, उसे हम गरीबी का अभिशाप बताकर दाएं बाएं हो लेते हैं…
xxx
पत्रकारों को आम मनुष्यों की लड़ाई लड़नी चाहिए, और जो हक, सुविधा आम आदमी को सरकार दे रही, उससे ज्यादा पत्रकारों और मीडिया मालिकों को नहीं मिलनी चाहिए… ये एक बड़ी बहस है.. असल में मुख्यधारा की पत्रकारिता अब पूरी तरह कारपोरेट और करप्ट हो चुकी है… ये खुद को प्रिविलेज्ड और सीएम पीएम टाइप समझते हैं, उन्हीं सीएम पीएम के इर्दगिर्द होने, सूट टाई में दिखने को गौरव मानते हैं…. ये लोग क्या करेंगे देश के आम जन का कल्याण, उद्धार… ये लोग कैसे कहेंगे कि वे आम आदमी के सराकोर को जीते बिछाते ओढ़ते हैं… मीडिया अब चिटफंडियों बिल्डरों उद्यमियों के टर्नओवर बढ़ाने, गलत काम करके न फंस जाने और सबको पटाए रखने का माध्यम भर है,,,, इसके अलावा कुछ और नहीं.. जो खुद को बड़ा पत्रकार कहे, उसे दस जूते मारो साले को..
Pankaj Mishra puttar karita
बी.पी. गौतम शर्म इन सालों को नहीं आ रही, तो आपको भी नहीं आनी चाहिए भाई
Manoj Pandey aapne sahi kaha yashwant g.
प्रयाग पाण्डे
नजर – नवाज नजारा बदल न जाए कहीं ,
जरा – सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं ।
– दुष्यंत कुमार
कहाँ तो तय था चिरागां हरेक घर के लिए ,
कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए ।
– दुष्यंत कुमार
प्रयाग पाण्डे हाथों में अंगारों को लिये सोच रहा था ,
कोई मुझे अंगारों की तासीर बताए ।
– दुष्यंत कुमार
Atul Arora Satya vachan…
रहीसुद्दीन 'रिहान' I agree with you bhai ji… bechare bhukhe mre to kya na kre.
Lokesh Sarswat पत्रकारों दलाली छोड़ो….दलालों पत्रकारिता छोड़ो
Dev Narula chamach hai …….maal banao sirf
Ramesh Sarraf sahi likha hai aapne
Adarsh Prakash Singh yashwant ki bat me dam to hai.
Suresh Kumar Sharma It is really a serious challengeable threat for a healthy world of Journalism…?
विभांशु यादव आपके शब्दानुसार पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ 400 चिरकुट हैं,, दिल्ली में जो हजारो चोरकट चिरकुट पड़े हुए हैं उन पर भी कुछ प्रकाश डालें ?
Akshay Rai chirkut hahahahaha ab journalist nahi mai to inhe chirkut hi kehunga
Saumya Sharma बिलकुल सही कहा आपने भाईसाहब…वैसे चिरकुट उत्तर प्रदेश में काफी प्रिय शब्द है…हा हा हा हा…
Amrish Shukla Bhut sahi hi koi wajod hi nahi hi sir
Mahesh Jaiswal साहब मैंने तो ऐसे मान्यता प्राप्त पत्रकारों को देखा है जो भोर में ही अपने अखबार के गाडी का इंतज़ार करते हैं और फिर उसे दिन भर तमाम विभागों में बांटते फिरते रहते हैं , कोई चापलूसी की खबर छाप दी तो बाकायदा उस अखबार को सम्बंधित व्यक्ति को देते हैं अब इन्हें क्या कहें मान्यता प्राप्त हाकर या कुछ और
Vikash Mishra ये सत्ता के सामने पत्रकारिता का चबैना बेचते है, बहुत खूब लिखा भाई तुमको हमारी उम्र लग जाये
Anil Singh विभांशु यादव- भाई चार सौ पर ही प्रकाश डालने में बैटरी खतम हो गई है.. चार्ज करने के बाद फिर वो प्रकाश डालेंगे…
Vinay Maurya Sahi kaha bhaiya….ye etne khus hai ki jaise…cancer aur aids hone k baad inka rahnuma kaun hoga…..akhilesh inke liye….purab se sury uga …wala aid hai….
Ahmad Raza पंचमतल के सोफों में सारा दिन टीवी देख कर जले आते हैं और कहते हैं मुख्यमंत्री के साथ था। एक अच्छा काम बिना दलाली के संभव नहीं है।
Indra Mani Upadhyay सहमत
Ahmad Raza माना ने के हम 20वीं सदी के पत्रकार हैं पर इनकी हर खबर रखते है। क्योंकि हमारे सूत्र भी तो वही हैं, जो इनके।
Dhirendra Pandey भैया हमे क्या कसूर किया था ये कि आपको वोट दिया था ?
Aamir Khan sacha journalist hona to ab gunna hai Azeem ho gaya hai aur Saccha journalism bhi Gunaahai Sageera hogaya hai
Rajeev Pratap Saini bhgwan kare saale kodhi ho jaaye or sarkaaree apise se ilaaj karate rahe
Vijay Yadav sahi kaha aapane….
Dhirendra Pandey इस खबर को फैलाना चाहिये जैसे मीडिया दूसरों के बारे फैलाती है इस खबर पर सोशल मीडिया पर रोज चर्चा करनी चाहिये रोज एक ट्वीट और दो चार बार स्टेट्स डालना चाहिये ताकि दूर दूर तक ब्रेकिंग न्यूज़ पहुँचे | सरकार से भी जवाब माँगना चाहिये कि जनता को मुफ्त ईलाज क्यों नही अब ये वी आई पी स्टेटस बंद होना चाहिये |
Rita Das kathputali hai…jokhim lenewale ab virle hi milenge….
Subhash Gupta ha ha haaaaaaaaa,,,,,,,,,,sabhi manyata prapt chirkoot hote hain kya??????
Ansh Dwivedi sahi kaha sirji!!!
Neeraj Narwar AAJ BHI KUCHH HAI JO HAMESHA EK PANKTI KA MARGDARSHAN LE RAHE HAI. PANKTI KUCHH IS PRAKAR HAI KI.. वे मुतमईन है कि पत्थर पिघला नहीँ करते, पर हम बेकरार है आवाज मेँ असर के लिए…
Diwakar Dev Srivastava kadawa sach hai sir
Abhishek Sharma Manyta wale hain kitne? mutthi bhar… jinko sirf… chhodiye jubaan kharab ho jayegi.
Sanjeev Chhibber बहुत बढ़िया ।
Shambhu Dayal Vajpayee सही कहा आपने।
Madhu Sudan yashwant ji – labi ke khel ne patrkarita ko bissinas bana deia hai ye sudarnewale nahi hai , – koi uske aad me tanpu chalva raha hai ko bisnass kar raha hai , jyadatar ….. kya batu
Ramvir Yadav Bhi gadha bhusi me hi khushi rahata hai !
Manoj Upadhyay काश ! बिहार में भी ऐसा होता…..! यहाँ चिरकुट पत्रकारों की तादाद काफी ज्यादा है यशवंत भाई.
Kamlendra Chauhan mutthi bhar logo ko khush kar hr yojana ka yshgan karwa rhi h s p sarkar.
Santosh Srivastava lagta hai yaswant ji ko maanyta nahi mili hai.. tabhi aag ugal rahe hai… waise mai bhi manyata prapt patrkaar nahi hu.. aur naa hi chahta hoo..
Chandan Srivastava pichhli s.p. sarkar ke ek mantri ko bachane ke liye bahut bade naam wale t.v. reporter ne manage shadi hi aayojit kara di thi (madhumita kand)
Atul Chaurasia sahi kaha 100% satya vachan
Shravan Kumar Shukla सहमत हूँ/ शब्द ऐसे हैं इन लोगों के लिए जो यहाँ बयान नहीं कर सकते
पवन अवस्थी शत प्रतिशत सहमत हूँ आपसे …हम तो रोज ही इन दल्लो की हरकतों को देखते है ..दो टके के ये लोग अपनी गाडियों पर प्रेस का स्टीकर लगा कर ऐसे चलते है जैसे ये इनसे बड़ा गुंडा कोई नहीं ….एक दो बार ऐसे दो पायो को उनकी औकात दिखाने का सुअवसर मिला तो बड़ा मजेदार अनुभव रहा …उस समय उनका कैमरा और कार्ड किसी काम नहीं आया ..तथ्यों और तर्कों तथा सत्य के आत्मविश्वास के कारण बहुत सुखद अनुभव मिला ..
Umesh Singh pila ptrakar
पवन अवस्थी Yashwant Singh@ मित्र ना जाने क्यों इंटेलिजेंस एजेंसियों की नजर उत्तर प्रदेश के पत्रकारों पर नहीं पड़ती बरना खोजने पर कुछ ऐसे भी आस्तीन के सांप पकड़ में आ सकते है जो पाकिस्तानी एजेंसियों के एजेंट जैसे है ….
Shravan Kumar Shukla पवन जी की आशंका काफी हद तक सही है.
Om Bhatt aisa log patrkar nahi …satta ka pattal chat hota hain …chatr jeevan sa aisi parjati ka logon sa pala padta raha hai ya log sacha abam emandar patrkaron ka bhi samman chen lata hain
Atul Shrivastava एक ढूंढेंगे हजार मिलेंगे… और यह अकेले यूपी का किस्सा नहीं, सब तरफ यह खेल जारी है……
Ravi C. Jai yashwant ji,likhiye aur zaroor likhiye lekin kisi ko gariya ke nahi.gali likhna zaroori nahi hai apni baat kahne ke liye.
Kiran Verma HaHaHaHaHa!
Sharad Purohit दबंग ,काश सभी पत्रकार आपकी भाषा में लिखे !
Sanjay Vyas शालीनता से भी बात उतनी ही असरदार ढंग से कही जा सकती है. वैसे पत्रकारिता के बारे में बात आपने सही कही.
Gurmeet Gill sach bolne ke liye badhai.
Ravindra Bharti nice one
Subhash Tripathi vg
Manju Srivastava aap kabhi akhilesh ki press meet dekhe. ptarkaro ka bas chale to akhilesh ko apne apne sath hi lekar chale itna to bhagwan ke bhi peeche nahi bhagte
Tp Singh patrakarita ke girate maapdando me yah sabase aham kadi hai
Sudhir Kumar Soni बहुत साफ़ -साफ़ शब्दों में सही कहा आपने
Rvindra Jaiswal great comment
Care Naman Yashwant bhai kyoun patrkaron ki khat khadi kar rahe ho ye vaise hi sataye hue hain halaton ke ……
Arvind Mishra Jan sandesh times has produced many CHIRKUT HAWKER but so called journalist in rural areas.
Vivek Tiwari Katu satya
Ruchi Jaiswal mila liya
Sagar Gujrati Sahi kaha aapne.
Mayank Pandey यही हाल सब जगह है…..पूरब से लेकर पश्चिम तक……किस किस को रोइये….कीजिए हाय-हाय क्यूं…..
Anup Kr Awasthi उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान बढ़ी लूट, रेप, मर्डर से मीडिया का ध्यान हटाने के लिए अब सरकार पत्रकारों को प्रलोभन दे रही है,
Sagar Gujrati सही बात है..मेरी ही लिस्ट में कुछ ऐसे हैं जिन्हें देश दुनिया के बारे में क्या पता ये नहीं मालूम..लेकिन बस उन्हें इतना पता है की उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव हैं और अगली बार मुलायम सिंह यादव केंद्र सरकार में आयेंगे.. उनकी उम्र शायद २६ या २७ होगी पर खुद को वरिष्ट बताते हैं…बड़े चैनेल में स्ट्रिंगर जो हैं…खुद को केवल इसलिए बड़ा बताते हैं क्योंकि कुछ अधिकारियों के साथ तस्वीर खिंचवा ली है, कुछ नेताओं के साथ पैर छूते हुए और जब देखो उसी को फेसबुक पर चेपकर टैग कर देते हैं.. वो ये नहीं समझ पाते कि इन तस्वीरों से अब आकर्षण का जमाना गया…
Sahu Shivnandan sahi kaha bhai ji apane
Mahendra Agrawal patrakarita mission nahi business hai. Aur aaj ke es business me to chirkutati bahut jaroori hai. yahi to ye manyataprapt patrakar log bata rahe hai.
Satya Veer Singh Journalists can be bought in just one bottle of whisky, their rates are quite affordable!
Anju Shukla saty vachan
Satyendra Dwivedi यशवंत जी मान्यता है किस चीज की पत्रकार होने की या चिरकुट होने की ….वैसे मान्यता देने वाले भी कम चिरकुट नही है …
Arun Mishra Ab hamlog Surendra pratap singh wali patrakarita bhool jayen .Ab to jyadatar bikau patrakaar hi milenge .
Ramesh Siddhartha Yeh nahin sudherenge,aise hi tukde kha-kha kar dakaren lete rahenge,mere bhai .
Swami Nandan 100% shudh…
Nirantar Narayan patrakaar bhi isi samaj ki upaz hain,jab sara samaj patan ki khai mein girkar lahalot hai to in becharon se ganesh shankar vidyarthi aur prabhash joshi banne ki umeed kyon ki jaati hai?jis din ye sarkaar ke khilaaf likhenge maalik laat maar ke bahar kar dega
Puneet Kumar this is true
Toukir Ahead Agarr waky kisi ko chaho dil se baddua dena, dua krna ki vo is daur ka patrkaar ho jaye,!
चन्दन कुमार वर्मा sahi kaha yaswant ji ,hame to hasi aa rahi is bechare patrakaro par apni aukaat bhool gye hai
भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.






