खोजी पत्रकारिता के विद्रूप होते चेहरे पर अनुपम मिश्र ने चिंता जताई

दिल्ली : 'गांधी शांति प्रतिष्ठान', नई दिल्ली द्वारा आयोजित 'पत्रकारिता एवं लेखन कार्यशाला' के उद्घाटन सत्र में शामिल होने का मुझे अवसर प्राप्त हुआ. दस दिवसीय इस कार्यशाला में पत्रकारिता की विधा में आने वाले नवागन्तुक लोगों को लेखन और पत्रकारिता के बारे में समझने का अवसर प्राप्त होगा. उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक जनसत्ता के प्रधान संपादक ओम थानवी जी ने पत्रकारिता के सामाजिक सरोकार तथा व्यवसाय के सम्बन्ध में अपना वक्तव्य दिया.

उन्होंने पत्रकारिता के शिक्षण व्यवसाय पर सवाल उठाते हुये पत्रकारिता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने, पत्रकारिता की परिष्कृत भाषा और एक सच्चे पत्रकार के मानवीय पहलू पर बल देते हुए कहा कि पत्रकार का काम केवल जानकारी देना एवं सजग करना भर नहीं अपितु जनमानस में समझ विकसित करना है.

विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात पर्यावरणविद एवं गांधी शान्ति प्रतिष्ठान के सचिव अनुपम मिश्र ने पत्रकारिता के आधुनिकीकरण पर बल देते हुए कहा कि पत्रकारों को सिर्फ घटना की रिपोर्ट कर देने भर से संतुष्ट ना रहते हुए उसके कारणों तक जाने का प्रयास करते हुए उस पर अपनी लेखनी चलानी चाहिये. उन्होंने खोजी पत्रकारिता के विद्रूप होते चेहरे पर अपनी चिन्ता जतायी.

समारोह की अध्यक्षता कर रहीं प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक राधा बहन भट्ट ने अंत में संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों की युवा पीढ़ी की आज की जरूरत अपने अंदर विवेक पैदा करना और बाजार के प्रभाव से बचना है. कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ पत्रकार अभय प्रताप जी ने किया. यह कार्यशाला 19 अक्तूबर से 28 अक्तूबर तक चलेगी. इसमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रतिदिन पत्रकारिता जगत के किसी वरिष्ठ एवं समर्थ व्यक्ति से मिलने एवं उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा.

विवेक सिंह की रिपोर्ट.

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