गणतंत्र दिवस पर चैनलों ने छुट्टी खत्म की, फिर दोगुनी तनख्वाह पर गिराई गाज

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस देश के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है और संस्थान चाहे सरकारी हो या निजी, सभी में इस दिन छुट्टी रखना जरूरी होता है। अगर अत्यावश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, अग्निशमन, पुलिस आदि में इस दिन छुट्टी नहीं दी गयी तो उन संस्थानों में काम करने वाले कर्मियों को कंपन्सेट्री ऑफ यानी बदले में अवकाश देने का प्रावधान है। पहले अखबारों के जमाने में तो तीनों दिन अखबार नहीं छपते थे, लेकिन धीरे-धीरे खबरिया टीवी चैनलों का जमाना आया।

पहले इनमें भी राष्ट्रीय अवकाश के दिन के ज्यादातर बुलेटिन प्रोग्रामिंग टीम के हवाले रहते थे जो पहले ही तैयार कर लिये जाते थे। यही कारण रहता था कि न्यूज़ टीम से गिनती के लोग ही बुलाए जाते थे जिन्हें बाद में वैकल्पिक छुट्टी दे दी जाती थी, लेकिन इनदिनों गलाकाट प्रतियोगिता के युग में किसी भी न्यूज चैनल में वैसी ही उपस्थिति रहती है जैसी आम दिनों में। आजतक समेत कई बड़े चैनलों में आज भी सामान्य उपस्थिति रही।

खास बात ये है कि टीवी टुडे ने आज आने वाले मीडियाकर्मियों को कोई कंपन्सेट्री लीव नहीं देने का फैसला किया है। सरकारी नियमों के मुताबिक तो राष्ट्रीय अवकाश के दिन एसेंशियल सर्विस में काम करने वालों को दोगुनी तनख्वाह के साथ वैकल्पिक अवकाश देने का प्रावधान है, लेकिन जब नियमों पर 'सबसे तेज' नजर रखने वाले ही उनकी धज्जियां उड़ाने में जुटे हों तो क्या किया जाए?

पत्रकार धीरज भारद्वाज की रिपोर्ट.

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