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गांधी ग्राम संवाद यात्रा का हुआ समापन, रजी अहमद को सौंपी गई यात्रा की रिपोर्ट

पटना। गांधी जयंती के मौके पर दो अक्टूबर को शुरू हुई गांधी ग्राम संवाद यात्रा छह अक्टूबर रविवार को पटना के गांधी संग्रहालय में पहुंच कर समाप्त हो गयी। यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार वीरेंद्र यादव, आदित्य कुमार और गौरव सिंह ने गांधी संग्रहालय के मंत्री रजी अहमद को यात्रा की संक्षिप्त रिपोर्ट सौंपी। यात्रा पर आधारित डाक्यूमेंट्री भी उन्हें दिखायी गयी। इस मौके पर गांधी जी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये गए। यात्रा में शामिल तीनों लोगों ने पूरी यात्रा साइकिल से की और गांधी से जुड़े लोग, जगह और आश्रमों तक पहुंच कर जानकारी एकत्रित करने की पहल की।

पटना। गांधी जयंती के मौके पर दो अक्टूबर को शुरू हुई गांधी ग्राम संवाद यात्रा छह अक्टूबर रविवार को पटना के गांधी संग्रहालय में पहुंच कर समाप्त हो गयी। यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार वीरेंद्र यादव, आदित्य कुमार और गौरव सिंह ने गांधी संग्रहालय के मंत्री रजी अहमद को यात्रा की संक्षिप्त रिपोर्ट सौंपी। यात्रा पर आधारित डाक्यूमेंट्री भी उन्हें दिखायी गयी। इस मौके पर गांधी जी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये गए। यात्रा में शामिल तीनों लोगों ने पूरी यात्रा साइकिल से की और गांधी से जुड़े लोग, जगह और आश्रमों तक पहुंच कर जानकारी एकत्रित करने की पहल की।

इस मौके पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र यादव ने बताया कि इन पांच दिनों में हमने दानापुर, मनेर, बिहटा, बिक्रम, नौबतपुर व खगौल के रास्ते कई जगहों की यात्रा की और वहां गांधी से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने का प्रयास किया। इन पांच दिनों में कई नयी जानकारियां मिलीं और समाज को कई आयामों से देखने का मौका मिला। इस दौरान दो स्वतंत्रता परमेश्वर सिंह व जीवानंद सिंह, दो गांव अमनाबाद व बहपुरा तथा दो गांधी आश्रम बिक्रम व खगौल से रूबरू होने का अवसर मिला। इन सभी का संबंध अप्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से गांधी जी से रहा है।

स्वतंत्रता सेनानी परमेश्वर सिंह गांधी से मिलने राजकोट गए थे तो जीवानंद सिंह को गांधी जी को देखने का अवसर मिला था। अमनाबाद और बहपुरा दोनों गांवों में गांधी जी के देहांत के बाद श्राद्ध का आयोजन किया गया था। बिक्रम व खगौल में गांधी आश्रम की बुनियाद गांधी जी ने रखी थी। दोनों आश्रमों के लिए जमीन स्थानीय लोगों ने दान में थी, जिसे बाद में व्यक्ति विशेष का मान लिया गया। यात्रा के रास्ते में रहीस कुमार, वीरेंद्र कुमार, अशोक कुमार व राजकुमार यादव का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। संगोष्ठी में बीएन विश्वकर्मा, रामेश्वर प्रसाद, केके दुबे, अरुण नारायण, उदयन राय, उपेंद्र सिंह कुशवाहा, चितरंजन भारती, श्रीकांत व्यास, संतोष यादव आदि शामिल थे।

यात्रा के फलितार्थ:
1. गांधी जी को लेकर आज लोगों में श्रद्धा कायम है।
2. बिक्रम व खगौल के गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार की जरूरत है।
3. गांधी आश्रमों के पास काफी जमीन है और इसका इस्तेमाल गांधी के सपनों को साकार करने के लिए किया जा सकता है।
4. गांधी जी जिन रास्तों से गए थे, उसका एक नक्शा भी होना चाहिए, ताकि उसका लोकेशन आसानी से मिल सके।
5. समस्या और शिकातयों के बीच सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की संख्या काफी है और उन बच्चों में शिक्षा की भूख और ललक भी है।
6. बिहटा के निर्माणाधीन औद्योगिक इलाके में पशुपालन का व्यवसाय खत्म हो रहा है। भूमिअधिग्रहण के बाद खेती की जमीन खत्म हो गयी और खत्म हो रहा चारा भी।
7. अमहरा सिर्फ भूमिहारों का गांव नहीं है।
8. प्रतिनिधि पति का बोलबाला पंचायतों में है।
9. पंचायत सेवक से मुखिया जी परेशान हैं।
10. बिहटा बन रहा है पटना का विकल्प।
11. बदल रहा है पत्रकारिता का सामाजिक स्वरूप भी।

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