गाजीपुर से हटने के बाद अब दैनिक जागरण से भी हटना पड़ा राजकमल राय को

गाजीपुर : जागरण को अलविदा कहना पड़ा गाजीपुर के चर्चित पत्रकार राजकमल राय को। राजकमल ने जागरण कार्यालय में अपना इस्तीफा भेज दिया है और यह बताया जा रहा है कि बीमारी के चलते छुट्टी पर चले गये हैं। चर्चा है कि राय आजकल फिर से हिन्दुस्तान व अमर उजाला के वरिष्ठों का चक्कर लगाना शुरू कर चुके हैं। ज्ञात हो कि 15 से 18 वर्ष पूर्व आज अखबार से जिले में पत्रकारिता शुरू करने वाले राजकमल जनपद के गरूआं मकसुदपुर गांव के रहने वाले हैं। इनकी दूसरी पारी वर्ष 2002 में हिन्दुस्तान गाजीपुर कार्यालय में स्टिंगर के रूप में शुरू हुई। एक साल में ही इनको वाराणसी कार्यालय में अटैच होना पड़ा।

संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी के कार्यकाल में राजकमल बलिया कार्यालय का प्रभारी बनने में कामयाब हो गये। लेकिन उनका गाजीपुर प्रेम कायम रहा और काफी प्रयास के बाद छह माह बाद आखिर राजकमल को यहां के कार्यालय का प्रभारी बना दिया गया। मैाका मिलते ही राजकमल यहां के फोटोग्राफर, कर्मचारी व क्षेत्रीय संवाददाताओं पर बरस पड़े। कई संवाददाता बदले। कई एजेंट किनारे हो गये। बाद में फोटोग्राफर की शिकायत व जांच में उत्पीड़न पाये जाने पर शंशाक शेखर त्रिपाठी ने राजकमल राय को हटा दिया। बाद में राजकमल राय ने जनपद के ही रहने वाले मौजूदा समय में जागरण झारखंड के प्रसार प्रबंधक की सिफारिश पर बिहार जागरण में नये खुले बक्सर कार्यालय में चार्ज लिया। राजकमल राय फिर से गाजीपुर आने के लिए सक्रिय हो गए। दैनिक जागरण वाराणसी के यादवेश को विश्वास में लेकर वर्ष 2009-10 में गाजीपुर जागरण के संवाददाता बन गये।

जिला संवाददाता बनने की लालसा पूरी होने के बाद राजकमल ने जागरण के पुराने संवाद सूत्रों एजेन्टों को बदलने का काम शुरू किया। कई जगह शिक्षकों को संवाददाता बनाया। एक भाजपा नेता जिसकी नेतागिरी बंद हो चुकी थी, को राजकमल ने गाजीपुर कार्यालय का विज्ञापन प्रभारी बना दिया। वो अब भी गाजीपुर कार्यालय में कार्यरत हैं। दोनों की दोस्ती खूब निभी। कई तरह की शिकायतों के बाद जागरण के मौजूदा संपादक आशुतोष शुक्ला ने राजकमल को पहले तो गाजीपुर कार्यालय से हटाकर वाराणसी कार्यालय में अटैच किया। अब पता चला है कि वहां से राय साहब का इस्तीफा हो चुका है। नये जिला संवावदाता अखिलेश मिश्रा गाजीपुर में दैनिक जागरण को फिर से पटरी पर लाने के लिए सक्रिय हैं।

गाजीपुर से राकेश कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट.

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