गिरते सर्कुलेशन से परेशान जागरण को वेंडिंग मशीनों का सहारा

जागरण प्रबंधन अपने समूह के प्रकाशनों की लगतार घटती संख्‍या से बुरी तरह परेशान है. पिछले आईआरएस सर्वे में जागरण समूह के दो अखबारों के तीन लाख के आसपास पाठक कम हो गए थे. यह समूह लगातार अपने पाठकों को खोता जा रहा है. इस स्थिति से निपटने के लिए जागरण प्रबंधन वैकल्पिक उपायों के जरिए अखबार का सर्कुलेशन बढ़ाने की कवायद कर रहा है. लंबे अरसे से जागरण समूह अपने हॉकरों का कमीशन भी सीमित कर रखा है, जिसके चलते भी उसके अखबार रद्दी बनते रहते हैं.

हाल में झांसी में भी दैनिक जागरण झांसी में भी इसी तरह की स्थिति से जूझ रहा है. हॉकरों के हड़ताल का असर अखबार के सर्कुलेशन पर पड़ रहा है. इन्‍हीं सब परेशानियों को देखते हुए जागरण समूह अब अपने अखबारों को वेंडिंग मशीन के जरिए बेचने का फैसला किया है. प्रबंधन ने इसकी शुरुआत वाराणसी, मेरठ, लखनऊ समेत कई जगहों से किया है. वेंडिंग मशीन में जागरण समूह का प्रत्‍येक प्रकाशन उपलब्‍ध रहेगा. लोग पैसे डालकर मनचाहा प्रोडक्‍ट ले सकते हैं.   

हालांकि जो शुरुआती रूझान हैं उसे उत्‍साहजनक नहीं बताया जा रहा है. जागरण समूह ने इस वेंडिंग मशीन को अत्‍याधुनिक तरीके से बनवाया है, जिससे यह इस समूह का प्रोडक्‍ट लेने के बाद बाकी पैसे वापस कर दे, लेकिन अब तक इन मशीनों को लोगों का रिस्‍पांस नहीं मिल पाया है. गौरतलब है कि पिछले आईआरएस में दैनिक जागरण समूह से 1,04,000 पाठक तथा इसी समूह के अखबार नईदुनिया से 1,95,000 पाठक कम हुए हैं. इसके बाद से ही प्रबंधन परेशान है. समूह की लगातार घटती साख ने भी प्रबंधन के माथे पर बल डाल दिया है. 

सूत्रों का कहना है कि जागरण समूह के अन्‍य प्रकाशनों से भी पाठकों का मोहभंग होता जा रहा है. इसी समूह के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्‍स्‍ट अब तक कोई खास मुकाम नहीं बना पाया है. पाठक इस अखबार को पढ़ना ही नहीं चाहते, और जिस वर्ग को ध्‍यान रखकर इसकी लांचिंग की गई है वो इस खिचड़ी अखबार पर हाथ भी धरना पसंद नहीं करता. लिहाजा प्रबंधन तमाम जगहों पर इसे दैनिक जागरण के साथ काम्‍बो के रूप में बेचता है. उसके बावजूद कहीं भी आई नेक्‍स्‍ट को बेहतर रिस्‍पांस नहीं मिलता दिखता है.

इन परेशानियों से उबरने के लिए जागरण ही जागरण समूह अब मशीनों का सहारा ले रहा है. आदमियों पर से जागरण समूह का विश्‍वास उठा है या जागरण समूह पर से आदमियों का विश्‍वास उठा है, यह तो चर्चा का विषय है लेकिन कारण चाहे जो हो अब जागरण का विश्‍वास मशीनों पर जरूर बढ़ गया है. इसी का परिणाम है कि वेंडिंग मशीनों के सहारे अखबार की खपत बढ़ाने की योजना शुरू की गई है. अब इस मशीनों का कितना असर होगा यह तो आगामी इंडियन रीडरशिप सर्वे से ही पता चल पाएगा. 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *