गुवाहाटी में युवती के साथ बदसलूकी की आंखों देखी कहानी पत्रकार मुकुल की जुबानी

गुवाहाटी। रात करीब 9.30 के आसपास मैं अपने दफ्तर से घर जा रहा था। कुछ ही आगे बढ़ने के बाद अपने कपड़े संभालती हुई एक युवती मेरी गाड़ी की ओर अंकल बचाओ, अंकल बचाओ चिल्लाती हुई दौड़ रही थी। मैंने गाड़ी पार्क किया। लेकिन तब तक दो दर्जन के करीब भीड़ लड़की की ओर टूट पड़ी। वे उनके कपड़े और बाल नोंच रहे थे। मैंने लड़की को बचाने का प्रयास किया। लेकिन हमलावर मुझे धक्का दे रहे थे। मैंने फटाफट एक आदमी के हाथ से मोबाइल छीना, वे संभवत: पुलिस को फोन कर रहे थे।

मैंने 100 पर फोन मिलाया। जबाव आया -पुलिस पहुंचने वाली है। लेकिन पुलिस देर से आई। तब तक भीड़ में शामिल लोग लड़की की इज्जत के साथ सड़क पर खेल रहे थे। पुलिस के पहुंचने के बाद मेरा हौसला बढ़ा। मैंने लड़की को उठा कर पुलिस की गाड़ी में बैठा दिया। उसके बाद भी हमलावर लड़की को नोंच रहे थे और पुलिस सहज थी। पुलिस को देखने से ऐसा नहीं लग रहा था कि कुछ भी हुआ है। पुलिस के जाने के बाद मेरे मन में सवाल उठने लगा कि आखिर पुलिस हमलावरों को पकड़ कर क्यों नहीं ले गई। सिर्फ दो ही पुलिसकर्मी मौके पर क्यों पहुंचे। उनके साथ महिला पुलिस क्यों नहीं थी। यह आंखों देखी आज वरिष्ठ पत्रकार मुकुल कलिता गुवाहाटी प्रेस क्लब में संवाददाताओं को सुना रहे थे। प्रेस क्लब ने उनकी साहस और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन हेतु सराहना के लिए आमंत्रित किया था।

मालूम हो कि 9 जुलाई की रात एक युवती के साथ हुई बदसलूकी के समय पत्रकार श्री कलिता वहां मौजूद थे और लड़की को बचाने का उन्होंने भरसक कोशिश किया था। घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए श्री कलिता कहते हैं कि पुलिस की भूमिका ठीक नहीं रही। बहशी दरिंदे को उसी समय गिरफ्तार करना चाहिए था। लेकिन कई दिनों तक पुलिस सोती रही और जब मीडिया का दबाव आया तो कार्रवाई शुरू हुई। जरुरी होने पर घटना की गवाही देने के लिए कोर्ट जाने के लिए तैयार श्री कलिता ने बताया कि वे जब मौके पर पहुंचे तो दो कैमरा फोटो शूट कर रहा था। मामले में गिरफ्तार गौरव ज्योति नेओग का नाम लेने से बचते हुए श्री कलिता ने कहा कि घटना से पहले वे गौरव को नहीं जानते थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि दूसरा कैमरा आखिर किसका था। मामले की चल रही जांच को देखते हुए घटना के बारे में ज्यादा न बताते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि युवती के साथ बदसलूकी में सिर्फ युवा ही नहीं उन्होंने एक बुजुर्ग को भी देखा था।

घटना के बाद पत्रकारिता पर उठ रहे सवाल पर चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि किसी घटना में कोई पत्रकार शामिल हो सकता है। लेकिन इसका कतई मतलब नहीं कि पत्रकारिता करने वाले सभी लोग गंदे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देखने को मिला है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों के साथ कुछ लोग गलत बर्ताव कर रहे हैं। ऐसा ठीक नहीं है। समाज के लिए मीडिया भी जरूरी है और ऐसे लोगों को सोचना चाहिए कि जीएस रोड पर यदि कोई पत्रकार घटना में शामिल था तो मैं (एक पत्रकार) उस असहाय लड़की को बचाने का प्रयास कर रहा था।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.

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