गैंग रेप पीड़िता पत्रकार ने न्यूड फोटो वीडियो डिलीट करने की मांग की

मुंबई में महिला पत्रकार के साथ हुए गैंगरेप के मामले में पीड़िता और उसके पुरुष मित्र की हत्या भी की जा सकती थी लेकिन, रेप के दौरान बनाए गए वीडियो क्लिप की वजह से उन्हें जिंदा छोड़ दिया गया. अस्‍पताल में भर्ती पीड़िता ने इच्‍छा जताई है कि वह जल्‍द से जल्‍द काम पर लौटना चाहती है. लड़की ने पुलिस से उसके न्यूड फोटो ढूंढ़कर डिलीट करने की गुजारिश की है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने वारदात के बाद पीड़िता और उसके पुरुष मित्र को धमकाया था कि अगर उन्होंने पुलिस को बताया तो वीडियो क्लिप को इंटरनेट पर डाल देंगे. इसके अलावा आरोपियों में से एक कासिम बंगाली ने चांद सत्तार को फोन करके कहा था कि 'मेहमान आए हैं खातिरदारी के लिए आ जा'. यह बयान इस बात की ओर भी संकेत करता है कि आरोपियों ने पहले भी इस तरह यौन-शोषण के अपराध को अंजाम दिया हो. आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह बात भी सामने आई है कि दोनों की हत्या भी की जा सकती थी ताकि मामले को पुलिस तक पहुंचने से रोका जा सके. लेकिन कासिम ने अन्य साथियों को ऐसा करने से रोका क्योंकि, उन्होंने घटना की वीडियो बना ली थी और उन्हें भरोसा था कि पीड़िता पुलिस के सामने मुंह नहीं खोलेगी.

गैंगरेप पीड़िता 22 वर्षीया फोटो पत्रकार खुद को मिली यातनाओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारी है. वह सिर्फ इतना चाहती है कि उसके अपराधियों को ऐसी सजा मिले कि वे दोबारा किसी महिला की ओर बुरी निगाह डालने के काबिल न रहें. जसलोक अस्पताल में पीड़िता से मिलने पहुंचीं मुंबई की पूर्व महापौर निर्मला सावंत प्रभावलकर से उसने दर्द भरी मुस्कान के साथ कहा कि दुष्कर्म के साथ जिंदगी खत्म नहीं हो जाती. ठीक होने के बाद मैं फिर से जिंदगी शुरू करूंगी, पत्रकारिता करूंगी और मैगजीन द्वारा दिया गया अपना काम भी पूरा करूंगी. प्रभावलकर उस तीन सदस्यीय जांच समिति की अध्यक्ष हैं, जिसका गठन राष्ट्रीय महिला आयोग की तरफ से किया गया है. यह समिति पूरी घटना की स्वतंत्र जांच करके अपनी रिपोर्ट 10 दिन के भीतर आयोग को सौंप देगी.

इससे पहले बोलने की स्थिति में आने के बाद सबसे पहले अपनी मां से बात करते हुए भी पीड़ित युवती ने कहा कि मैं नहीं चाहती कि जिस प्रकार की शारीरिक और मानसिक यातना से हमें गुजरना पड़ा है, उससे इस शहर या देश की किसी भी महिला को गुजरना पड़े. मेरा जीवन बरबाद करने वाले अपराधियों को कम से कम उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए. इससे कम की कोई भी सजा मेरा दर्द दूर नहीं कर पाएगी. पीड़ित फोटो पत्रकार से मिलकर लौटे उसके रिश्तेदारों के अनुसार शुक्रवार देर रात तक वह टेलीविजन पर चल रही खुद से संबंधित खबरों को देखती रही. खबरों में अपने साथ खड़े लोगों को देखकर उसकी हिम्मत और बढ़ी है.
 

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