गोरखपुर पत्रकार पिटाई कांड : लखनऊ के पत्रकारों ने प्रकरण को सीएम अखिलेश तक पहुंचाया

: एडीजी बीपी सिंह कहते हैं- थोड़ी नोंकझोक हो गई थी, पर अब सब खत्म हो चुका है :  उ.प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने मसला मुख्यमंत्री के पास पहुंचाया : सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी को घटना की जानकारी ही नहीं है : सूर्यप्रताप सिंह शाही और हृदयनारायण दीक्षित ने इस कांड की कड़ी निंदा और भर्त्‍सना की : अमर उजाला के रिपोर्टर की सरेआम गोरखपुर के एसएसपी द्वारा लाठियों से की गयी पिटाई की वारदात को पुलिस महानिदेशक ने मैनेज कर लिया है लेकिन पत्रकारों ने इस प्रकरण को मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचा दिया है। यह दीगर बात है कि प्रदेश समाजवादी पार्टी के प्रवक्‍ता को इस हादसे तक की जानकारी नहीं है। और तो और, इस खबर की जानकारी न तो किसी राजनीतिक नेता को है और न ही ज्‍यादातर पत्रकार-नेता को। अब यह सब लोग इस हादसे की निंदा जरूर कर रहे हैं। इस प्रकरण का पता न चलने का एक बड़ा कारण अमर उजाला द्वारा इस खबर को प्रकाशित न करना है।

खबर है कि गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने स्‍थानीय पत्रकार धर्मवीर सिंह के सरेआम पीटने की खबर को सार्वजनिक होने के बाद मैनेज कर लिया है। इस कवायद के तहत एसएसपी अमर उजाला के दफ्तर पहुंचा और स्‍थानीय सम्‍पादक से उनके चैम्‍बर से मिला। भेंट के अंत में धर्मवीर सिंह को चैंबर से बुलाया गया और बताते हैं कि वहीं आशुतोष ने धर्मवीर से सॉरी कहा। प्रदेश के कानून-व्‍यवस्‍था, अपर पुलिस महानिदेशक बीपी सिंह का कहना है कि सारा कुछ निपटा लिया गया है और दोनों पक्ष शांत हैं। लेकिन बीपी सिंह इस बात को खारिज कर रहे हैं कि आशुतोष ने सरेआम धर्मवीर सिंह को पीटा था। बीपी सिंह का दावा है कि धर्मवीर के स्कूटर को लेक‍र थोड़ी नोंकझोंक हो गयी थी, लेकिन अब सब कुछ खत्‍म हो चुका है।

घटनाक्रम के मुताबिक गोरखपुर शहर के बतिया इलाके में चाय की एक दुकान के बाहर धर्मवीर सिंह बैठे थे। उनका स्‍कूटर दुकान के बाहर था। अचानक लखनऊ से आ रहे आशुतोष की गाड़ी उधर से गुजरी। शहर के बदतर यातायात के चलते इस इलाके में भी जाम लगा था। यह देख आशुतोष का पुलिसिया पारा भड़क गया। सिपाहियों को छोड़कर आशुतोष खुद ही डंडा लेकर जुटे गए और वहां लोगों की पिटाई शुरू कर दी। धर्मवीर का स्कूटर खड़ा होने के कारण उन पर पचासों लाठियां बरसा दीं। मामला तूल पकड़ने पर आशुतोष ने मैनेज करने की कवायद शुरू कर दी। लेकिन पत्रकारों में क्षोभ है कि पुलिस द्वारा की गयी इस सार्वजनिक पिटाई के लिए सॉरी कहने के लिए आशुतोष ने संपादक का चैम्‍बर चुना।

लखनऊ में गोरखपुर वाली इस हादसे की खबर न तो किसी राजनीतिक दल को है और न ही ज्‍यादातर पत्रकारों को। उप्र मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति के अध्‍यक्ष हिसाम सिद्दीकी का कहना है कि यह मामला मुख्‍यमंत्री के पास भेज दिया गया है। उपाध्‍यक्ष योगेश मिश्र ने बताया है कि अखिलेश यादव से पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मंडल मिला है। भेंट में दीगर मसलों के अलावा गोरखपुर की घटना पर भी चर्चा हुई और मुख्‍यमंत्री ने मामला देखने की बात कही है। लेकिन हैरत की बात है कि प्रदेश सपा के प्रवक्‍ता राजेंद्र चौधरी को इस बात की खबर ही नहीं है। इस सवाल पर उनका कहना है कि वे इस मसले की जानकारी करेंगे। राजेंद्र चौधरी का दावा है कि समाजवादी पार्टी मीडिया और लोकतंत्र की हिमायती है और पत्रकार के साथ अन्‍याय नहीं किया जाएगा। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष सूर्यप्रताप सिंह शाही इस खबर चौंकते हैं और कहते हैं कि ऐसी खबरों का प्रसारित करना पत्रकारों का ही दायित्‍व है। शाही का मानना है कि उऋंखलता और उद्दंडता तो समाजवादी पार्टी का मूल चरित्र है जो सत्‍ता मिलते ही भड़क जाती है। नौकरशाही बेलगाम है और सरकार बेफिक्र। प्रख्‍यात चिंतक हृदयनारायण दीक्षित इस कांड की कड़ी निंदा और भर्त्‍सना करते हैं।

उप्र मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति के पूर्व अध्‍यक्ष प्रमोद गोस्‍वामी के संज्ञान में ही नहीं है यह हादसा। लेकिन उनका कहना है कि इस हादसे ने नौकरशाही, सत्‍ता और अराजकता के निरंकुश त्रिगुट का खुलासा कर दिया है। मायावती सरकार ने भी मीडिया से लगातार दूरी बनाये रखा था, लेकिन मीडिया पर कभी हमला नहीं किया। सपा सरकार ने तो मीडिया को निशाने पर रख दिया है।

लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट. कुमार सौवीर यूपी के जाने माने पत्रकार हैं. दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, महुआ समेत कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. सौवीर अपने बेबाक बयानों और दमदार लेखन के लिए जाने जाते हैं. उनसे संपर्क kumarsauvir@yahoo.com और 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.


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