गोरखपुर में डाक्टरों ने फोटोग्राफर को इतना पीटा कि शाम तक बेहोश रहा

: पत्रकारों पर हमला – गोरखपुर मेडिकल कॉलेज या गुंडों की पाठशाला? : क्या अजीब इत्तेफाक है जब मीडिया "शिक्षक दिवस" के अवसर पर आने वाले अंक की तैयारी कर रहा था तब मेडिकल कॉलेज में शिक्षा का एक अलग ही रूप दिखा… एक मृत मरीज के परिजनों ने जब अपना रोष व्यक्त किया तो मानव-रूपी भगवान यानि डाक्टरों ने उन्हें बुरी तरह से पीटा, जब इस खबर को कवर करने फोटोग्राफर और पत्रकार मेडिकल कॉलेज पहुंचे तब प्रधानाचार्य कुशवाहा की सहमति से इन लोगों पर जानलेवा हमला किया गया, जन्संदेश टाइम्स के फोटोग्राफर अभिनव चतुर्वेदी को तो इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वो शाम तक बेहोश थे…

ये जूनियर डाक्टर इस कदर गुंडई पर आमादा थे कि एस० पी० सिटी से पूछ रहे थे कि तुम्हारी क्वालिफिकेशन क्या है? जिलाधिकारी महोदय तो मार खाते-खाते बचे…पुरे दिन वीभत्स तांडव…दिन भर डाक्टर साहब लोग हाकी- डंडों से लैस होकर दौड़ लगाते रहे, गाड़ियां तोड़ी गयी…शाम को ये उपद्रवी हड़ताल पर बैठ गए क्योंकि अपने गुंडे भाइयों को बचाने को  इनके पास एक ये ही ब्रह्मास्त्र जो है …इस पर भी मन नहीं माना तो (I .C .U . तक से) मरीजों को भगाने लगे…अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक 06 मरीज आक्सीजन की कमी से अब तक मर चुके हैं…इन्ही गुंडे डॉक्टरों के दम पर केंद्र और राज्य प्रशासन मस्तिष्क-ज्वर जैसी बीमारियों से क्या खाक लड़ेगा? जिनके अन्दर मानवीय मूल्य नहीं वो डाक्टर क्या बनेंगे? गोरखपुर मेडिकल कॉलेज अब डॉक्टर नहीं, गुंडे पैदा कर रहा है..एक डॉक्टर के रूप में आपसे किसी मरीज की मृत्यु पर बहुत ही संवेदित और मर्यादित व्यव्हार की उम्मीद की जाती है, जब आप मृत मरीज के परिजनों का दर्द नहीं समझ सकते तो आप कैसे डॉक्टर? उस पर तुर्रा ये कि आप उनके परिजनों को ही बुरी तरह से सरेआम पीटने लगे…

मीडिया जब इसे कवर करने पहुंची तो मीडिया से समस्या हो गई कि फोटो क्यों खींची जा रही है और यदि आप लोगों को समस्या थी भी तो कैमरा तोड़ते, बात और ज्यादा खराब होती तो दो-चार झापड़ तक ठीक है…पर एक डॉक्टर होते हुए आप फोटोग्राफरों को इतना कैसे मार सकते है कि वो मरणासन्न हो जाये, बेहोश हो जाये या उसकी हड्डियाँ टूट जाये, वो भी कॉलेज परिसर में और उसके बाहर भी …ये शर्मनाक है …सोचिये ये डॉक्टर जब पत्रकारों-फोटोग्राफरों, जिला प्रशासन  के वरिष्ठ  अधिकारिओं के आगे इस गुंडई पर अमादा है तो मरीजों  के निरीह परिजनों के आगे ये कितने खूंखार गुंडे होंगे…कल्पना कीजिये आप का खून भी खौल उठेगा ……………..इस खबर का एक दुखद पहलू ये भी है कि इस डॉक्टर-पत्रकार हंगामे में मेडिकल कॉलेज और इन डॉक्टरों की लापरवाही से मरे मरीज की खबर भी दब जाएगी जिसके मरने के बाद ये गुंडे उनके परिजनों को पीट रहे थे और तत्पश्चात ये सारा कुछ हुआ….मुझे शर्म आती है ऐसी प्रदेश सरकार पर और उसके तथाकथित ला-एंड-आर्डर पर…….अखिलेश भैया अब तो जागिये वरना बहुत देर हो जाएगी…

Ajit Kumar Rai

Assistant Manager (Marketing)

Jansandesh Times, Gorakhpur

Mob.: 9450151999 ; 8953400680

www.facebook.com/ajit.k.rai

(उपरोक्त मेरी अर्थात जनसंदेश टाइम्स, गोरखपुर के असिस्टेंट मैनेजर मार्केटिंग अजीत कुमार राय की व्यक्तिगत राय है, हो सकता है अन्य लोग इससे इत्तेफाक न रखें)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *