गोरखपुर में पत्रकारों की बैठक में हंगामा, मारकण्डेय मणि की सदस्यता निरस्त

गोरखपुर के पत्रकारों की संस्था गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की आम सभा पिछले 7 अक्तूबर को हुई जिसमें काफी हंगामा हुआ. बैठक में गबन के आरोपी पत्रकार मारकण्डेय मणि की सदस्यता निरस्त कर दी गई. पत्रकारों के मान सम्मान से जुड़े मेडिकल कालेज आन्दोलन को सफलता पूर्वक जारी रखने के आधार पर वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल दो माह के लिये बढ़ा कर दिसंबर 2012 तक कर दिया गया.  इस आंन्दोलन के अब तक सफल संचालन के लिये वर्तमान कार्यकारिणी को बधाई भी दी गई.

बैठक के दौरान पत्रकार स्पष्ट रूप से दो खेमों में बंट कर खड़े दिखाई दिये. सारा विवाद एक पत्रकार को पिछली कार्यकारिणी द्वारा दिये गये 10 हजार के चिकित्सा सहयोग राशि को लेकर था, जिसे पूर्व कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष मारकण्डेय मणि द्वारा जालसाजी कर के निकाल लिया गया बताया गया था. इसकी रिपोर्ट संबंधित राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार पी.पी.एन. उपाध्याय ने संस्था में कर दी थी. इस पर एक जांच समिति बनी, जिसमें संस्था के संस्थापक उध्यक्ष डा. एस.पी.त्रिपाठी, विधि सलाहकार सुभाष शुक्ला, पूर्व पदाधिकारी संजय तिवारी (वर्तमान में श्री न्यूज लखनऊ), वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह और वर्तमान कार्यकारिण के महामंत्री मनीष मिश्रा शामिल थे.

कमेटी ने मामले को काफी लटकाया. पर अचानक जांच समिति ने 24 सितंबर को अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर दी, जिसमें मारकंण्डेय मणि को बैंक के दस्तावेजों और श्री उपाध्याय द्वारा पेश सबूतों के आधार पर गबन का दोष सिद्ध पाते हुए उनकी सदस्यता निरस्त करने की कड़ी संस्तुति कर दी.  इस रिपोर्ट के बाद दानो पक्षों में गोलबंदी शुरू हो गई, और 7 अक्तूबर को दोनों दल गोलबंदी के साथ बैठक स्थल, दीवानी कचहरी के सभाकक्ष में एकत्र हो गये.  वहां जम कर आरोप प्रत्यारोप के शर्मनाक दौर के बाद अजित गुट अपनी करवाने में सफल रहा.  बैठक में गाली गलौज तो आम बात थी, कुर्सियां भी चलीं. वहां अपनाई गई मारपीट के हालात से भी बदतर दृश्य को देख पूर्व अध्यक्ष आजमी को कहना पड़ा कि क्या कोई पत्रकार इस बैठक की रिपोर्टिंग छापने की हिम्मत कर सकता है.

बैठक में संख्या बल में कम होने पर श्री मणि ने स्पष्ट आरोप एक पूर्व अध्यक्ष पर लगाया कि उन्होंने भी संस्था के कैंटीन आवंटन में एक लाख का घोटाला किया. उनके इस आरोप को दबा दिया गया. ज्ञात हो कि साल में दसियों लाख की आमदनी के बाद भी हर कार्यकारिणी लाखों में बकाया छोड़ कर जाती है. उसमें बिजली बिल और किराया भी शामिल रहता है. कई बार यहां की बिजली काटी जा चुकी है.

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