‘घोटाले की खबर दिखाने पर चैनल के एडिटर को धमका रहे अखबार के एक एडिटर’

आदरणीय सर, हम लोग शहर-ए-बनारस में ''फुल वाल्यूम'' नाम से एक चैनल चलाते हैं जिसमें हमारी कोशिश रहती है कि शहर की प्रत्येक उठापठक को बेबाक और बेलौस तरीके से जनता के समक्ष रखा जाये। हमने बेबाक और निष्पक्ष पत्रकारिता करने का बीड़ा उठाया है। हालांकि हमारा दायरा सीमित है लेकिन फिर भी हमारी कोशिश रहती है की जो भी सत्य हो, वो वैसा ही लोगों के सामने पहुंचे। इसी क्रम में हमने पहले दिन से दैनिक जागरण के सम्पादक राघवेन्द्र चढ्ढा और उनके अनुज मानवेन्द्र चढ्ढा की एनआरएचएम घोटाले से जुड़ी खबरों को बेबाक तरीके से दिखाया।

इसकी वजह से राघवेन्द्र चढ्ढा बुरी तरह बौखलाया हुआ है और तो और उसने हमारे एडिटर-इन-चीफ राजेश गुप्ता जी को तमाम तरह की गीदड भभकी दी है। राघवेन्द्र जी का कहना है कि हम आपके ऑफिस में घुसकर तोड़फोड़ भी कर सकतें है और कानूनन भी आपको रोड पर ला सकतें है। इसके अलावा चढ्ढा जी का कहना था कि अपने धनबल और गनबल के माध्यम से वो हमारे चैनल को तहश-नहस करने का माद्दा रखते हैं। हम लोगों ने सत्यता और प्रमाण को आधार लेते हुए खबरें बनायी थी। ऐसे में हमे आगे अब क्या स्टेप लेना चाहिये । कृपया मार्गदर्शन करें।

अमित पांडेय

amit.dsvv@gmail.com


राघवेंद्र चड्ढा का पक्ष–

भड़ास4मीडिया ने जब उपरोक्त आरोपों के संदर्भ में दैनिक जागरण, वाराणसी के संपादक राघवेंद्र चड्ढा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इन दिनों मेरे भाई के बहाने मुझे बदनाम करने की कुछ लोग मुहिम चल रहा हैं. फिर भी मैंने किसी को कुछ नहीं कहा. जब मेरा और मेरे भाई का चौका-चूल्हा अलग है तो कैसे कोई उनके किसी कार्य के लिए मुझे दोषी ठहरा सकता है. धमकाने और तहस-नहस करने का आरोप झूठा है. मैंने किसी को कोई धमकी नहीं दी.

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