चंद्रिका की हत्‍या की गुत्‍थी उलझी : उमरिया पुलिस एवं डीजीपी के बयानों में विरोधाभास

: पुलिस अपनी बात पर कायम नहीं- पहले अपहरण का साजिशकर्ता बताया अब ब्‍लैकमेलर करार दे रही  :  भोपाल। उमरिया के पत्रकार चंद्रिका राय हत्याकांड रहस्य बन गया है। इस मामले में उमरिया पुलिस और डीजीपी के बयानों में हो रहे विरोधाभास ने इस रहस्य को और गहरा दिया है। उमरिया में पुलिस अधीक्षक मनोहरसिंह जामरा ने शुक्रवार सुबह 11.15 बजे एक प्रेसवार्ता बुलाई थी, लेकिन वे पत्रकारों से रूबरू नहीं हुए। उन्होंने एक प्रेस रिलीज जारी कर दिया। प्रेस रिलीज के मुताबिक पत्रकार चंद्रिका राय व उनके परिवार की हत्या के तार 15 फरवरी को हुए सब-इंजीनियर के बेटे अन्नत झारिया के अपहरण कांड से जोड़े गए हैं।

इस अपहरणकांड में अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की मांग की थी। अपहर्ताओं पर जब पुलिस ने दबाव बनाया तो वे 16 फरवरी की शाम को अनन्त को ब्यौहारी स्टेशन पर छोड़कर भाग निकले। पुलिस ने ब्यौहारी स्टेशन मास्टर की सूचना पर अनन्त को बरामद कर उसे उसके पिता को सौंप दिया। इस अपहरकांड में प्रयुक्त मोबाइल का पुलिस पता लगा ही रही थी कि पत्रकार चंद्रिका राय व उसके परिवार की हत्या करने की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस ने मोबाइल के आधार पर अपहरण कांड के आरोपियों को पकडऩा चाहा तो उनके नाम होमगार्ड सैनिक विद्यानिवास तिवारी, अमित सिंह, सुनील, मनीष कोरी, हरेंद्र सिंह व राज के नाम सामने आए।

इनसे जब पूछताछ की गई तो इन आरोपियों में से अपहरणकांड का मास्टर माइंड होमगार्ड सैनिक विद्यानिवास तिवारी ने कबूल किया कि चंद्रिका राय की हत्या भी हमने की है। वह हमें ब्लैकमेल कर रहा था, चंद्रिका का कहना था कि फिरौती की जो रकम तुम लोगों ने सब-इंजीनियर से ली है उसमें से मुझे भी हिस्सा दो, नहीं तो तुम लोगों को में एक्सपोज कर दूंगा। अपहरण और हत्याकांड के मास्टर माइंड विद्यानिवास तिवारी ने हत्याकांड में पांच लोगों के शामिल होने की बात कबूली है। इसमें से दो आरोपी विद्यानिवास तिवारी और अमित सिंह हैं, शेष तीन अन्य आरोपी हैं, जो फरार हैं।

उमरिया पुलिस अधीक्षक जामरा के प्रेसवार्ता बुलाने के बाद पत्रकारों को केवल प्रेस रिलीज देना और पत्रकारों के सवालों के जबाब न देने ने भी इस मामले को संदिग्ध बना दिया। इसकी संदिग्धता की पुष्टि कर दी डीजीपी एसके राउत के बयानों ने, जिसमें डीजीपी राउत ने दो टूक कहा कि उमरिया में एसटीएफ प्रमुख संजय चौधरी और लोकल पुलिस के अधिकारी इस हत्याकांड की जांच कर रहे हैं। अभी कोई सबूत हाथ नहीं लगा है।

जब डीजीपी से सवाल किया गया कि उमरिया पुलिस तो कह रही है कि हत्याकांड में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है उन्होंने जुर्म भी कबूल कर लिया है। इस पर डीजीपी ने साफ कहा कि आरोपी के कहने भर से यह मान लेना कि हत्या इन्हीं ने की है, गलत होगा। जब तक कि आरोपी के बयानों की पुष्टि करता कोई सबूत हाथ न लग जाए। अभी हत्याकांड के संबंध में जो बातें सामने आ रही हैं उसका एसटीएफ लोकल पुलिस के साथ मिलकर लिंकअप कर रही हैं। जब लिंकअप हो जाएगा तभी उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। साभार : भास्‍कर

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