चाय छाप हो या बड़े बैनर वाला सभी को चुन-चुन कर सम्‍मान दिया

यशवंत, एक अच्छा कार्यक्रम क्या होता है ये तुमने बता दिया और एक लेखक चाहे चाय छाप हो या बड़े बैनर वाला सभी को चुन-चुन कर सम्मान दिया. ये ही मीडिया सोशलिज्‍म है. इस कार्यक्रम में जिन लोगों को अवार्ड दिया वो इस बात के हकदार थे और ये वो सम्मानित लेखक थे, जिन्होंने किसी ना किसी रूप में अपने संस्थान के खिलाफ अपने हक़ की लड़ाई की थी या कर रहे हैं, बाकि अनूप भटनागर ने जो अपना किस्सा बताया तो कई मीडिया के स्टुडेंट इस सम्मानित पेशे को बड़ी हिकारत की दृष्टि से देखने लगे हैं.

वहीं जब एक चाय वाले को सम्मान दिया गया तो लगा कि –

आप भी घर से निकल कर देखिये संसार में
उसने अन्धों को दिया है आईना उपहार में.

इस तरह के कार्यक्रमों से और कुछ नहीं तो ये जरुर महसूस होता है कि अभी भी अच्छे लोगों की कदर है समाज में, बाकि सब तो बिकाऊ हैं कि –

गधे लड्डू खा रहे हैं
और घोड़े चने भी नहीं पा रहे हैं.

लेखक प्रदीप महाजन अखिल भारतीय पत्रकार मोर्चा के अध्‍यक्ष हैं. इनसे संपर्क 9810310927 के जरिए किया जा सकता है.


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