चार फर्जी पत्रकारों ने रेलवे को लगाई लाखों की चपत

लखनऊ। ट्रेनों में आधे किराये में सफर करने का जालसाजों ने नया तरीका खोज निकाला है। रेलवे के जारी ‘संवाददाता कार्ड’ पर फर्जी पत्रकारों ने लाखों रुपये की रेल यात्रा कर ली है। इसका खुलासा उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर किया है। यहां से जारी किये संवाददाता कार्ड में जो मान्यता प्राप्त पत्रकार का परिचय पत्र लगाया गया है, वह फर्जी पाया गया है। यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा है और रेलवे को कितनी आर्थिक क्षति हुई है, इसकी जांच के आदेश दिये हैं।

चारबाग रेलवे स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक अमिताभ कुमार गत दिनों मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक कार्यालय का निरीक्षण कर रहे थे, उसी दौरान मान्यता प्राप्त पत्रकारों के जारी होने वाले संवाददाता कार्ड रजिस्टर पर नजर पड़ी तो कुछ पत्रकारों के विवरण पर शक हुआ। उन्होंने मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक को चार मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्डों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया। मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक ने चार मान्यता प्राप्त पत्रकारों महेन्द्र प्रताप, परिचय पत्र संख्या 211, ऊर्जा टाइम्स, सुधांशु विकर्मा, परिचय पत्र संख्या 641, जनजागरण, अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, परिचय पत्र संख्या 642, जंग लहर और अब्दुल करीम, परिचय पत्र संख्या 1010, लहर टाइम्स सत्यापन कराने के लिए सूचना निदेशालय व जिला सूचना कार्यालय को लिखित पत्र दिया।

जांच में खुलासा हुआ है कि चारों मान्यता पत्रकारों के प्रेसकार्ड न तो जिला सूचना कार्यालय व न सूचना निदेशालय से जारी किया गया है। मुख्यालय व जिला सूचना कार्यालय के अभिलेख में चारों पत्रकारों का नाम ही नहीं है। फर्जी प्रेसकार्ड में पीछे की ओर नवीनीकरण के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि असली प्रेसकार्ड में इसका उल्लेख होता है। जालसाज ओरिजनल कार्ड की तरह कार्ड छपवा लेते हैं या फिर किसी कार्ड का स्कैन कराकर अपनी फोटो चिपका देते है। जिला सूचना अधिकारी की मुहर लगाकर कार्ड को एकदम पुख्ता बना लेते है। इसी कार्ड के आधार पर रेलवे से संवाददाता कार्ड जारी कराकर जालसाज ट्रेनों में आधे किराये पर सफर कर रहे हैं।

लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीरज शर्मा ने बताया कि सूचना विभाग से लिखित रिपोर्ट मिलने के बाद फर्जी पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाएगी। रेलवे में प्रेसकार्ड जांच की कोई व्यवस्था नहीं रेलवे में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के प्रेसकार्ड की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में हेराफेरी की आशंका ज्यादा रहती है। सूचना विभाग से जारी होने वाले मान्यता प्राप्त प्रेसकार्ड के आधार पर रेलवे संवाददाताओं के लिए प्रेस संवाददाता कार्ड जारी करता है। बाद में कार्ड में दिये गये नम्बर को कम्प्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली में फीड कर दिया जाता है। इसके बाद पत्रकारों को यात्रा के दौरान आरक्षित व अनारक्षित टिकटों में मूल किराये में पचास फीसदी की छूट दी जाती है। साभार : रास

 

 

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