चिटफंड से पैसा वसूल रहे और मीडिया में लगा दे रहे

बीते तीन साल में बंगाल का विज्ञापन उद्योग कम से कम चार गुना तक बढ़ चुका है। इसका श्रेय 'चिट फंड' कंपनियों को जाता है। हालांकि बाजार के सूत्रों ने इशारा किया कि इनमें से कोई भी चिट फंड कंपनी नहीं है। वे विविध कारोबार वाली कंपनियां हैं, जिनकी जमा निवेश योजनाएं या कंपनियां हैं जो अग्रिमों के माध्यम से पूंजी जुटाती हैं।

इनमें से सुदीप्त सेन के नियंत्रण वाली शारदा मीडिया ऐसी पहली कंपनी थी जिसने मीडिया कारोबार में प्रवेश किया और मीडिया नेटवर्क का विस्तार किया। उसने पहली बार चैनल 10 के माध्यम से इस क्षेत्र में प्रवेश किया और उसके बाद 2010 में बंगाली दैनिक बंगाल पोस्ट और सकल बेला के माध्यम से इस क्षेत्र में विस्तार किया। इसके बाद सेन ने तारा के चैनलों को भी खरीदा था। बंदी के समय उसके 10 मीडया कारोबार हैं जिसमें समाचार टीवी चैनल, समाचार पत्र और मैगजीन शामिल हैं।

शारदा समूह के अलावा रोज वैली भी ऐसी है जिसका राज्य में व्यापक नेटवर्क है। हालांकि कंपनी का दावा है कि रोज वैली जमा निवेश योजनाओं में शामिल नहीं है और कंपनी अपने होटलों में सदस्यता की पेशकश करती है। रोज वैली समूह के ब्रांड वैल्यू कम्युनिकेशंस के अंतर्गत नौ सैटेलाइट चैनल हैं, जबकि उसका दैनिक समाचार पत्र रोज वैली पत्रिका के अंतर्गत परिचालित होता है। रूपसी बांग्ला, न्यूज टाइम, न्यूज टाइम असम, ओडिशा टाइम, धूम सिनेमा, धूम म्यूजिक उसके टीवी चैनल हैं, जबकि खबर 365 दिन उसका दैनिक समाचार पत्र है।

समूह के चेयरमैन गौतम कुंडू ने बताया कि मीडिया कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और निवेश के लिए यह सही क्षेत्र है। कूंडू ने दावा किया कि उसके टीवी चैनल कारोबार ने 50 करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित किया। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र कारोबार इस साल मुनाफे में आ जाएगा। एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र के विपणन अधिकारी ने कहा, 'उनका मुख्य ध्यान इसी कारोबार पर है और जब से इन कंपनियों ने अपनी पैठ बढ़ाई है, तब से विज्ञापन कारोबार चार गुना बढ़ चुका है। (बीएस)

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