चुनाव आयोग के बदतमीज अधिकारी से नाराज महिला इंस्पेक्टर ने दिया इस्तीफा

सिस्टम ऐसा हो गया है कि ईमानदार और स्वाभिमानी लोग सरकारी नौकरियों में घुटन महसूस करते हैं. जिनके पास जितना अधिक पॉवर है, वो उतने अधिक बददिमाग और करप्ट होते जा रहे हैं. एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के तहत राजगढ़ जिले में एक महिला इंस्पेक्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके साथ एक बड़े अधिकारी ने बदतमीजी की और ऐसे वाक्य कह डाले जिसे सुनकर किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति का खून खौल सकता है.

अमृता सोलंकी जितना साहस सभी के पास नहीं होता इसलिए बाकी ईमानदार व स्वाभिमानी अफसर चुपचाप अपनी नौकरी करते रहने को मजबूर होते हैं. लेकिन अमृत सोलंकी ने जो कदम उठाया है, उससे यह पता चलता है कि अब भी सिस्टम में ऐसे ईमानदार व संवेदनशील लोग हैं जो अपने कर्तव्य का पालन पूरी मुस्तैदी से करते हैं और जब उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचाया जाता है तो वे इस्तीफा देने में नहीं हिचकते.

अमृता सोलंकी को जरूर प्रणाम कहना चाहिए हम सभी को. पूरा प्रकरण क्या था, इसे आप नीचे दिए गए पीयूष दीक्षित के फेसबुक स्टेटस को पढ़कर जान सकते हैं. साथ है अमृता सोलंकी का इस्तीफानामा और अमृता के एक पुराने कार्यकाल को लेकर अखबार में छपी खबर की कतरन. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


Piyush Dikshit : राजगढ़ जिले में ड्यूटी पर तैनात एक महिला इंस्पेक्टर अमृता सोलंकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनकी ग़लती इतनी थी कि सड़क पर गाड़ियों को चेक करते वक़्त उन्होंने चुनाव आयोग के प्रेक्षक की गाडी रोक ली। साहब तिलमिलाए…. कहा- "दिखा नहीं कि मैं चुनाव आयोग का अधिकारी हूँ," उस महिला इंस्पेकटर ने कहा ,"सर नहीं दिखा", जवाब आया….अंधी हो क्या….? रिश्वत देकर पुलिस में भर्ती हुई थी….? अभी तेरी अक्ल ठिकाने लगाता हूँ|"

बस कुछ देर बात उस दिलेर महिला अधिकारी को लाइन अटैच कर दिया गया। यानि उसे नालायक साबित करने की कोशिश की गई। उसने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। ये चुनाव आयोग वाले भगवान् होते हैं क्या……? कहाँ है महिला आयोग ….? महिलाओं को बराबरी का दर्ज़ा दिलाने को लेकर वर्क शॉप और सेमिनारों में बौद्धिक जुगाली करने वाले एन जी ओ….?

पीयूष दीक्षित के फेसबुक वॉल से.


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