चुनाव के दौरान मीडियाकर्मियों से दुर्व्‍यवहार, फोटो पत्रकार पीटा गया

 

पटियाला : लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया कर्मियों पर भी निगम चुनाव के दौरान हमले किए गए। शिरोमणि अकाली दल व भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने मीडिया कर्मियों के साथ जमकर दु‌र्व्यवहार किया। मीडिया को कवरेज से रोकने में पुलिस ने जमकर मनमानी की, जिसके चलते कई जगहों से चुनाव आब्जर्वर कृपा शंकर और पटियाला रेंज के डीआईजी एलके यादव के पास सूचनाएं पहुंचती रही। एक पंजाबी अखबार के फोटो जर्नलिस्ट को अकाली समर्थकों ने थप्पड़ जड़ दिए, जबकि इंगलिश अखबार के फोटो जर्नलिस्ट के साथ फोटो खींचने के समय झड़प हुई और वार्ड-29 में उसे पीटा गया। यहीं हिंदी दैनिक के वरिष्ठ पत्रकार को बेवजह रोक लिया गया, जब उन्होंने कार्ड दिखाया तो अंदर का गेट बंद करके एसआई हरकेवल सिंह खड़ा हो गए। दोपहर के वक्त मतदान केंद्र का गेट बंद देख जब वजह पूछी गई तो उसने डीएसपी को बुलाने पर ही गेट खोलने की बात कही। इस मौके पर आए डीएसपी ने पत्रकारों की इंट्री करवाई।
 
एक जगह हिंदी अखबार के पत्रकार के पास मौजूद कैमरे को छीनते हुए फोटो डिलीट करने की बात भी सामने आई है। एक स्थान पर पंजाबी अखबार के पत्रकार के साथ अकाली समर्थकों ने दु‌र्व्यवहार किया और पोलिंग सेंटर के भीतर नहीं जाने दिया। इस कड़ी में डीएमडब्ल्यू में वार्ड-16 के मतदान स्थल पर रूपनगर से आए डीएसपी एचएस संधू ने लोगों के मोबाइल ले जाने पर ऐसी पाबंदी लगा रखी थी कि कई मतदाता परेशान होकर लौट गए। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर बोले कि एसएसपी के आर्डर हैं। बिना मोबाइल के ही वोट डालने जाना है। यही नहीं कई स्थानों पर पत्रकारों को भी मतदान केंद्र में मोबाइल लेकर नहीं जाने दिया गया, जबकि हर बूथ के भीतर प्रत्याशी, समर्थक व वोटर मोबाइल पर बात करते हुए नजर आए।
 
फोटो जर्नलिस्ट को थप्पड़ मारने के बाद जब उसने कहा कि वह पुलिस को बुला रहे हैं तो समर्थक ने गाली देकर कहा कि 'बुला लो तुम जिस पुलिस अफसर को बुलाना चाहते हो, उस पुलिस अफसर को देख लेंगे'। नगर निगम के चुनाव से ठीक एक दिन पहले जिला लोक संपर्क अधिकारी ने जिला चुनाव अधिकारी के हवाले से सूचना देकर कहा था कवरेज के लिए 2011 व 2012 का सरकारी कार्ड जरूरी है। अधिकांश जगहों पर कवरेज के लिए गए पत्रकारों के पास सरकारी कार्ड नहीं था, जिसके चलते पत्रकारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई सेंटरों पर पहुंचने के बाद उच्चाधिकारियों को टेलीफोन के जरिये मौके पर मौजूद अधिकारियों को कहलवाना पड़ा, तभी पत्रकार कवरेज कर पाए। साभार : जागरण 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *