सहारा मीडिया के नये शुरू हुए उर्दू चैनल 'आलमी सहारा' में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है. चैनल हेड ने अपने अधीनस्थ एक महिलाकर्मी को इस कदर डांटा-फटकारा कि वह बेहोश होकर गिर पड़ी. चैनल हैड का नाम हैं हसन काज़मी. चैनल हैड के तौर पर इनकी ताजपोशी हाल के दिनों में की गई है. हसन काज़मी सहारा के काफी वरिष्ठ व्यक्ति हैं और इन्होंने अपनी शुरुआत सहारा इंडिया परिवार की पैराबैंकिग से की थी. जब सहारा का पैराबैंकिंग का धंधा चरम पर था तो लखनऊ में सहारा पैराबैंकिंग डिवीज़न के किसी दफ्तर का ज़िम्मा हसन काज़मी के कांधों पर था.
ये कहने में कोई दोराय नहीं है कि सहारा पैराबैंकिंग डिवीज़न में रहते वक्त हसन काज़मी ने काफी अच्छा काम किया और काफी मेहनत की. इसके अलावा हसन काज़मी को आलमी सहारा चैनल हेड से पहले लोग मंच संचालक के तौर पर जानते थे. सहारा इंडिया परिवार का कहीं भी कोई रंगारंग कार्यक्रम होता था तो हसन काज़मी ही वहां मंच संभाला करते थे. कहने का मतलब ये है कि ना तो कोई मीडिया का तजुर्बा और ना किसी मीडिया की कोई डिग्री मगर फिर भी मंच संभालते संभालते जनाब सहारा के उर्दू चैनल आलमी सहारा के हेड के पद पर आसीन हो गए.
चलिए वो भी ठीक है. वैसे भी सहारा में बहुत से ना-लायक लोगों के हाथों में कमान है लेकिन हद तो तब हो गई जब चैनल हैड हसन काजमी ने एक मीडिया की डिग्री और तजुर्बा लेकर सहारा में नौकरी कर रही एक महिला कर्मचारी को इस कदर डांट दिया कि वो सदमे से न्यूज़रुम में ही बेहोश हो गई और अभी तक नोएडा के मैट्रो अस्पताल में भर्ती है. महिलाकर्मी को आज शाम तक ग्लूकोज़ की बोतलें चढ़ाई जा रही थीं. दरअसल हुआ यूं कि सहारा टीवी का सर्वर स्पेस काफी कम है इसी के चलते अक्सर सर्वर में सेव फाइलों को डिलीट करने की आवश्यकता होती है. डिलीशन वक्त पर ना हो तो पोर्ट हैंग हो जाते हैं जिसके चलते एमसीआर से चैनल ब्लैक हो जाता है. कभी कभी एमसीआर में बैठे कर्मचारी की गलती के चलते भी सर्वर ब्लैक हो जाता है.
कल यानी बुधवार को भी ऐसा ही हुआ था. सहारा का उर्दू चैनल कुछ वक्त के लिए ब्लैक हो गया जिसके चैनल हैड हसन काज़मी ने बौखलाहट में एमसीआर में बैठी महिला कर्मचारी को बाहर बुलाया और बुरी तरह भरे न्यूज़रुम में डांट दिया. हसन काज़मी डांट ही रहे थे कि महिला कर्मचारी बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी और न्यूज़रूम में हंगामा मच गया. एडमिनिस्ट्रेशन हैड के साथ सभी अधिकारी न्यूज़रूम में इकट्ठा हो गये. आनन फानन में लड़की को पास ही स्थित मैट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अब इसे क्या कहें? क्या ये बौखलाहट है या फिर कुर्सी का गुरुर. पहली गलती तो ये कि आप किसी महिला पर चिल्ला रहे हैं, दूसरी गलती ये कि आप भरे न्यूज़रुम में सबके सामने उसकी बेइज़्ज़ती कर रहे हैं. काज़मी जी, कम से कम ये सोचिये कि उस लड़की की जगह अगर आपकी बहन या बेटी होती ता आप पर क्या बीतती.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त उल्लखित घटनाक्रम, तथ्य में कोई कमी-बेसी नजर आए तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए दुरुस्त करें या फिर [email protected] पर मेल करें.






