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‘चौथी दुनिया’ : कभी पत्रकारिता का प्रतीक था, अब उगाही का अड्डा

कमल मोरारका का लोग सम्मान से नाम लेते हैं. एक ऐसा शख्स जिसने चौथी दुनिया जैसा अखबार एक जमाने में लांच कर पत्रकारिता के इतिहास में बहुत सारे अध्याय जोड़े. ढेरों अच्छे पत्रकारों को पैदा किया, मौका दिया. कमल मोरारका कहने को तो चौथी दुनिया के मालिक रहे लेकिन उन्होंने कभी भी मीडिया के काम में दखल नहीं दिया. उन्होंने आंतरिक लोकतंत्र कायम रखा और पत्रकारों को काम करने की पूरी छूट देकर मिसाल कायम किया. बाद में जाने क्या हुआ कि चौथी दुनिया बंद हो गया. ढेर सारी खट्टी मीठी यादों के केंद्र रहे चौथी दुनिया को लोग गर्व से याद करते. पर बुजुर्ग होते जा रहे कमल मोरारका को जाने क्या सूझा कि उन्होंने चौथी दुनिया को फिर से लांच करा दिया.

कमल मोरारका का लोग सम्मान से नाम लेते हैं. एक ऐसा शख्स जिसने चौथी दुनिया जैसा अखबार एक जमाने में लांच कर पत्रकारिता के इतिहास में बहुत सारे अध्याय जोड़े. ढेरों अच्छे पत्रकारों को पैदा किया, मौका दिया. कमल मोरारका कहने को तो चौथी दुनिया के मालिक रहे लेकिन उन्होंने कभी भी मीडिया के काम में दखल नहीं दिया. उन्होंने आंतरिक लोकतंत्र कायम रखा और पत्रकारों को काम करने की पूरी छूट देकर मिसाल कायम किया. बाद में जाने क्या हुआ कि चौथी दुनिया बंद हो गया. ढेर सारी खट्टी मीठी यादों के केंद्र रहे चौथी दुनिया को लोग गर्व से याद करते. पर बुजुर्ग होते जा रहे कमल मोरारका को जाने क्या सूझा कि उन्होंने चौथी दुनिया को फिर से लांच करा दिया.

फिर से लांच कराना गलत नहीं है. गलत है उसे गलत उद्देश्य से लांच करना. और, यह गलती अब उन्हें भारी पड़ रही है. चौथी दुनिया ने अपनी पहली पारी में जितना नाम कमाया, जितना बड़ा काम किया, उसने दूसरी पारी में सब कुछ मटियामेट कर दिया है. ऐसा लग रहा है जैसे कमल मोरारका ठान चुके हैं कि उन्हें अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में चौथी दुनिया के नाम पर खूब पैसे कमाने हैं. तभी तो आजकल चौथी दुनिया में ब्यूरो चीफों की नियुक्ति करीब पच्चीस लाख रुपये की सेक्युरिटी मनी लेकर हो रही है. हर हफ्ते साठ सत्तर हजार रुपये की मांग की जाती है और इसके बाद चाहे जो करो, जो लिखो, जो कमाओ, जो बेचो, चौथी दुनिया प्रबंधन से कोई मतलब नहीं. जी हां. चौथी दुनिया प्रबंधन आजकल दोनों हाथों से धन बटोर रहा है.

अगर आपके पास पंद्रह बीस लाख रुपये हैं तो आप चौथी दुनिया में मैनेजिंग एडिटर कम ब्यूरो चीफ का पद पा सकते हैं. ये रकम आपसे सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा कराई जाएगी. फिर आपसे हर हफ्ते पचास साठ हजार रुपये लिया जाएगा. उसके बाद प्रबंधन आपसे कुछ नहीं पूछेगा. आप चौथी दुनिया के नाम को बेच बेच कर ब्लैकमेल कर कर के चाहे जितना कमाएं खाएं लूटें, इससे चौथी दुनिया प्रबंधन का कोई वास्ता नहीं. आपको खुली छूट है. चौथी दुनिया में ज्यादातर जगहों पर विज्ञापन बटोरने के लिए रिपोर्टरों की नियुक्ति की गई है. मतलब ये कि चौथी दुनिया की दूसरी पारी में पत्रकारिता करने वालों को नहीं बल्कि विज्ञापन लाने वालों को पत्रकार बनाया जा रहा है. दलालों व लायजनरों को ब्यूरो चीफ व मैनेजिंग एडिटर के तमगे से नवाजा जा रहा है. इस सबका मकसद सिर्फ एक है. पैसे कमाना.

कई राज्यों में इसी कमाने लूटने खिलाने की शर्त पर स्टेट हेड व ब्यूरो चीफों की नियुक्ति की गई है. और, दुखद ये कि इस सब कृत्य के सरगना के रूप में कथित महान पत्रकार संतोष भारतीय का नाम सामने आ रहा है. जाहिर है, संतोष भारतीय ये सब बिना कमल मोरारका के आदेश के नहीं कर रहे होंगे. मतलब, जो करोड़ों रुपये इकट्ठा किया जा रहा है, उसका बड़ा हिस्सा कमल मोरारका तक पहुंच रहा होगा. तो मान लिया जाए कि बुढ़ापे में कमल मोरारका भयंकर लालची, पतित और जनविरोधी हो चुके हैं. ऐसे उद्यमियों का पतन झकझोरने वाला है. कहने वाले कहने लगे हैं कि चौथी दुनिया ने अपनी पहली पारी में सिर्फ पत्रकारिता की तो अब दूसरी पारी में सिर्फ उगाही कर रहा है.

इस पूरे मसले पर बातचीत के लिए, पक्ष लेने के लिए भड़ास4मीडिया ने जब अखबार की पहली पारी और दूसरी पारी के भी प्रधान संपादक संतोष भारतीय को फोन किया तो उन्होंने कहा कि इस मसले पर वे क्या कह सकते हैं, जो प्रकाशित करना हो प्रकाशित कर दें.

इसे भी पढ़ सकते हैं… चौथी दुनिया का हाल- रिपोर्टरों की नियुक्ति होती है विज्ञापन लाने के लिए

अगर आपके पास भी किसी मीडिया हाउस को लेकर कोई फीडबैक हो तो भड़ास तक [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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