छंटनी के खिलाफ विनोद कापड़ी जब ‘जी न्यूज’ के एचआर और संजय पुगलिया से लड़ गए थे

Vinod Kapri :  आज मौका ऐसा है कि कुछ पुराने दिन याद आ रहे हैं…और उसको आपसे साझा कर रहा हूं…ताकि कुछ हो, कोई रास्ता निकले…हिम्मत बढ़े, हौसला बने…बात अगस्त 2001 की है..Zee न्यूज़ में एक ''सर्वे'' के बाद ये तय पाया गया था कि चैनल में 50-60 लोग ज्यादा हैं…जिनकी छंटनी की जानी चाहिए…उन दिनों मैं एक ब्रेक फास्ट शो morning zee करता था…जिसे अचानक बंद कर दिया गया…और उस सर्वे में ये भी तय पाया गया कि मेरी टीम के 16 लोग भी किसी काम के नहीं रहे..लिहाज़ा वो भी उस लिस्ट में आ गए थे…

मुझे एचआर ने बुलाया और इसकी सूचना दे दी…मेरे उन 16 साथियों को ये याद होगा कि मैं एचआर और अपने संपादक संजय पुगलिया के सामने अड़ गया…लड़ गया कि ये ग़लत है…ये नहीं हो सकता…जब तक मैं ज़ी न्यूज़ में हूं, ये नहीं होने दूंगा..मुझे ये ताक़त मिली थी एक विश्वास से…और वो विश्वास था अपनी मेहनत और ईमानदारी का…मुझे लगा कि ज़ी में मेरी बात सुनी जाएगी…मुझे बुलाया गया और नया ''ऑफर'' दिया गया…कि देखो वैसे तो तुम्हारी नौकरी भी खतरे में है…अगर तुम चुप रहोगे तो तुम्हारी नौकरी बच जाएगी…तुमने अभी-अभी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़ की आगरा शिखर वार्ता की अच्छी कवरेज की है (ये जुलाई में हुआ था शायद)… इसलिए तुम्हें न्यूज़ में एडजस्ट कर लेंगे…लेकिन तुम्हारी टीम के 16 लोगों को जाना होगा…

मेरी शादी तय हो चुकी थी…दिसंबर में शादी थी…ऐसे वक्त में नौकरी का ना होना बड़ी मुश्किल में डाल सकता था…बड़ा धर्म संकट था…लेकिन मैंने तय किया और साफ़ कह दिया कि मुझे ये छंटनी मंज़ूर नहीं, किसी भी कीमत पर…नतीज़ा ये हुआ कि ठीक एक महीने बाद सितंबर के महीने में (शादी से दो महीने पहले) ज़ी न्यूज़ से मेरी छुट्टी कर दी गई…पर मेरी टीम के 16 लोगों में से 7-8 लोग बच गए…एक साल तक एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी…किसी 29-30 साल के लड़के के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि वो विवाह के मंडप में बेरोज़गार बैठा था…विवाह के बाद महीनों बेरोज़गार रहा…पर वो लड़ाई ज़रूरी थी…वो संघर्ष ज़रूरी था…वो एक बड़ी परीक्षा थी…और मुझे खुशी है कि में उस इम्तेहान में पास हुआ…पास नहीं होता तो जीवन भर अपनी नज़रों में गिरा रहता…आज भी ऐसी स्थिति अगर आती है तो मैं बार-बार नहीं हज़ार बार वही करुंगा, जो मैंने 2001 में किया था…

मैंने तब भी खुद से और अपने साथियों से कहा और आज भी कहूंगा… दुखी होना लाज़मी है लेकिन एक पल भी अपने अंदर निराशा मत आने देना…ये कठिन वक्त है निकल जाएगा…और सच में एक साल बाद वो वक्त निकल गया… मेरा भी और मेरे उन 9-10 साथियों का भी..बस हिम्मत नहीं हारनी है…वो तमाम साथी आज अच्छा और बेहतर काम कर रहे हैं…अच्छी पोज़िशन पर हैं…और अक्सर कहते हैं कि (मैं तो अक्सर बोलता हूं कि) अच्छा हुआ कि हमें निकाला गया वरना इतना अच्छा नहीं कर रहे होते।

ज़ी न्यूज़ के मेरे दोस्तों.. क्या आपको अब भी याद है वो बगावत??

    Prabhat Sharma Jangid बग़ावत रोज़ होती है मेरी मेरे ही अपनों से….
    ये जंगें यूँ ही होती हैं मेरी मेरे ही सपनों से….
    मगर इतना यकीं ख़ुद पे है ख़ुद मेरे ही अपनों का….
    मुक़म्मल मेरी मंज़िल है मेरे ही जतनों से…
    — प्रभात —–
 
    Ashwini Sharma Himmat buland hai apni patthar si jaan rakhte hain…kadmo tale zameen to kya ham aasman ko rakhte hain…hamara pesha utha patak wala hai lekin hausla nahi chhodna chahiye…
 
    Shailendra Jha achha lga sunkar vinod sir, bas itna hi
   
    Neetu Kumar हां सर…कैसे भूल सकते हैं। आपने हमलोगों की नौकरी बचाने के लिए इस्तीफा दे दिया था। सर मैंने मीडिया शुरूआत आपके साथ ही किया था….और आपसे काम सीखा…डांट भी पड़ती थी…तारीफ भी मिलती थी और मीडिया में वो हमारा सबसे बेस्ट टाइम था । हम सब पहले भी आपकी बहुत इज्जत करते थे और आज भी करते हैं । मुझे इस बात का गर्व होता है कि मीडिया के सुपर स्टार विनोद कापड़ी के साथ मैंने काम किया है । आप यूं ही तरक्की करते रहे और कामयाबी की नई नई इबारते लिखते रहे।
    
    Anjani Kumar Singh धन्यावाद सर आपकी इस बात हमें नई उर्जा मिली…यही कहानी अभी हमारी भी है….
     
    Girijesh Vashistha अच्छे संपादकों का यही गुण है । मैनेजर तो आजकल सभी हो गए हैं ।
 
    R Girish Nair Bilkul yaad hai Vinodji….
 
    Lakhvinder Rana thanks sir aaj ka bad kabi himmat nahi harun ga
   
    Yogesh Bharadwaj विनोद जी ये बहुत झेला है अपनी लाइफ में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऊँचे ओहदे पर बैठे लोगो को अपने जूनियर की बाते समज में नहीं आती है ऐसे हजारो युवा है पर आपने जो निर्णय लिया काबिले तारीफ़ है बहुत लोगो के साथ ऐसा होता है एक जरूरी बात किसी भी संसथान को अपने बाप की प्रॉपर्टी न समझो कभी भी लात पड़ सकती है चाहे आप कितना भी अच्छा करो कितने भी करीबी हो कितनी भी पॉवर रखते हो.
 
    Deepak Rajput आप की बातों से लगता है कि ईमानदार पत्रकार भी मीडिया जगत में हैं नहीं तो आज कल के बॉस अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में किसी दूसरे पत्रकार की नहीं सोचते कि उसके परिवार व उसके कैरियर का क्या होगा जो पूरी आस्था व विश्वास के साथ आपका व चैनल का साथ दे रहा होता है।
 
    Pratiksha Pandey Shaandaar sir..indino aise hi daur se guzar rhi to shaayad aapki us waqt ki manhhsithiti ko samjh rhi…par accha lga ye sunkar k mere sath ho rha to main aise akeli nhi hu..bhto ne jhela h…so chill kr rhi
 
    Vimal Singh ऑपके सच्चा टीम लीडर की ये बात तो पता thi लेकिन पुरी कहानी aaj पता चली। तब मेरे करियर के शुरुऑती दिन the….. शायद ऑपको याद हो is ghatna ke kuch din baad ऑपसे जोरबाग में मुलाकात hui thi. हम और अशोक पैदल सडक पर राकेशजी मिलकर लौट रहे the. ऑप अौर शिवेंद्रजी maruti- 800 में the. ऑपने मुस्कराकर कहा tha कि प्रयास करते रहो फ़ल मिलेगा। अख़बार में नौकरी मिली अौर तब से जारी है। ऑप सच्चे लीडर हो।

    Yogesh Bharadwaj ये आपने सही फ़रमाया की हिम्मत नहीं हारनी चाहिए पर इस लाइन में बहुत कम ऐसे लोग है जो किसी को समजते है उन स्ट्रिंगर का क्या है जो धुप आंधी पानी दिन रात अपनी मेहनत चैनल को चमकते है आप जैसे लोग तो भी संघर्स करते है उनकी तो कोई क़द्र नहीं है इंसान अपने रॉब रुतबे पद और कुर्सी की ताकत में सबको भूल जाता है
 
    Rohit Bisht ग्रेट
 
    Yogesh Bharadwaj एक कहावत याद आ गई बिन मागे मोती मिले मागे मिले न भीक.
 
    Jitendra Chauhan Thanks sir hausla badhane ke liye…
 
    Pooja Dubey sir 2001 ka to pata nahi lekin 2003 mein aug mein zee main thi..tab dekha tha..zee ke sarve sarvah aap the..aur trp ki duniya mein bhi zee sabse pehle tha… yaani 2 hi saalon mein unhone apni galti is had tak sudhar li ki apko top position par wapas liya….
 
    Hitesh Pant गजब की शाक्ति है आपमें। शादी के ऐन वक़्त पहले शायद ही कोई ऐसे कदम उठाए। शुक्रिया हिम्मत बढ़ाने के लिये। शायद अब अपने भी अच्छे दिन आयें।
 
    Jahaan Fly High 2001 mein tab main 16 saal ka ho chuka tha, tab main aap ki us kranti se anjaan tha ….aaj 2013 hai aur 2008 se aap ke saath kaam kare ka golden chance mila …. Kahte hain na kisi bhi kamyab aadmi ke piche ek aurat ka haanth hota hai aur kisi bhi kamyaab team ke piche ek kaary kushal team leader ka haanth hota hai .. Hum sare india tv ke members bahoot kismat wale hain jiske leader aap ho … jis junun ke sath aap apne kaam ko anjaam dete ho uska koi jawab nahin … Aap ke bharose aur diye gaye himmat se mujhe bahoot kuch kar guzarne ki taakat milti hai ….
     
    Parag Chhapekar Extn Grt boss
     
    Kapil Kumar में ये तो कह सकता हूँ की आप सही मायने में टीम लीडर हो… आप अपने लोगों को साथ लेकर चलते हो….इसीलिए में आपकी इज्ज़त करता हूँ..
 
    Dharmendra K Singh हर किसी में सिंहों वाली बात नहीं होती सर। आप ऐसे थे इसीलिए न्यूज़ इंडस्ट्री में आपकी इतनी इज़्ज़त है
 
    Ajay Katare बहुत प्रेरणादायक सर सत्य की कीमत तुरंत चुकाना पड़ती है लेकिन पुरूस्कार उससे कई गुना बड़ा कई दिनो बाद अवश्य मिलता है |
   
    Pradeep Sharma ))))
    
    Sanu Bhardwaj Maine aap k saath star news mai Kaam Kia tabhi aapki power ko pehchaan liya tha sir, dobara mauka nahi mil raha. Agr salmam khan Bollywood dabangg hai to aap media k dabangg ho. Heads of to u sir.
     
    Sujeet Srivastava apke jajbe ko salam..aaj media industry mein aisa jajba dekhne ko nahi milta..
     
    Ranu Mishra मिडिया क्षेत्र में आने वाले नए पत्रकारो के लिए आप एक आदर्श और बेहतरीन मिसाल हैं ……
     
    Sushil Kumar Vohra jaisa kapil ne kha aap logoon ko saath le kar chalte hain, bas bhoolna mat))
 
    Parvez Khan Kash ye Himmat Uparwala sabhi ko de……
 
    Vinod Kapri Thanks Neetu Kumar…acha laga ki tumhe 12 saal bad bhi sab yad hai..
   
    Rajender Negi Jeevan me baadhaayen hame sachha vijeta banaati hain….lekin jarurat hai us mushkil daur me himmat banaaye rakhne ki….
    
    Shivendra Raman Singh Ya…. great Vinod sir
     
    Ajassr Piyush सर हिना रंग लाती है पत्थर पर घिस जाने के बाद..सोना चमक जाता है आग में तप जाने के बाद…
     
    Shailesh Vats ya very true Vinod bhai ! At that time I had started a production house with one of my colleagues and most of your team members were in touch with us. I have seen one thing common in all your team that every body admires and respects you. I was zealous in the Le-Meridian party where in my party maximum number of team members were around you in place of mine. so i am the witness of your leadership.
     
    Vineet Kumar एक वाकया मुझे भी याद है … तब मैं मीडिया में नया नया आया था …राहुल की पाठशाला चल रही थी ….ब्रेक हुआ …तो बाहर कवर कर रहे रिपोर्टरों ने क्लास की वॉकथ्रू करनी शुरु कर दी ….कुछ देर बाद कुछ आपत्ति शुरु हुई …मामला बढ़ा ….मालिकों और संपादकों तक भी पहुंच गया …केस दर्ज करवाने की भी बात हुई ….मालिकों और संपादकों ने अपना पल्ला झाड़ा और हाथ खड़े कर दिये ….तब आप अकेले संपादक थे जिसने अपने रिपोर्टक का पक्ष लिया …लड़ाई की ठानी ….और फिर मामला खत्म हुआ …यह कहानी सुनने के बाद विनोद कापड़ी के प्रति मेरा एक नजरिया बना … जो आपके इस पोस्ट से और भी अधिक दृढ़ हुआ …जय हो ….
     
    Girijesh Vashistha in fact yeh mere us message ka jawab bhi hai jo mene chatbox me chhoda tha. editors apni zimmedari sabmbhale to ab bhi kuchh nahi nigda hai.
 
    Sanjay Kumar आज मार्टिन नीलोमर की एक कविता याद आ रही है…See Translation
 
    Sanjay Kumar पहले वो आए साम्यवादियों के लिए
    और मैं चुप रहा क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था

    फिर वो आए मजदूर संघियों के लिए
    और मैं चुप रहा क्योंकि मैं मजदूर संघी नहीं था

    फिर वो यहूदियों के लिए आए
    और मैं चुप रहा क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

    फिर वो आए मेरे लिए
    और तब तक बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था

    ~मार्टिन नीमोलर (1892-1984)
 
    Sanjay Kumar लड़ना जरूरी है…नतीजा जो भी निकले…वर्ना इतिहास कभी माफ नहीं करेगा…
 
    Suraj Sanwal जिद करो दुनिया बदलो वाला दैनिक भास्कर का विज्ञापन मुझे याद है ..लेकिन सवाल ये है कि क्या मीडिया वाले अपने हितों के लिये भी जिद करने का माद्दा रखते हैं …कापड़ी जी हर कोई आपकी तरह साहसी नहीं..
 
    Siddhartha Rangnath Rameshwaram काबिल-ए-तारीफ!
 
    Vinod Kapri us waqt ke sathi Anil Vats ne abhi yaad dilaya.. sham 7.30 bje mujh se istifa liya gaya tha..aur raat 9.30 bje se ghar par ek party shuru ho gayi thi..jo subah 3 bje tak chali..old monk wali party .. hatao na yarr…jo hua..acha hua..aur jo hoga..wo bhi acha hoga.. Darna nhi hai..na Harna hai..Bas !!!!
 
    Bharti Sharma I can't forget MORNING ZEE. What a great time we had during that show – awesome teamwork with a very able team leader – Vishal Aggarwal
 
    Shivendra Kumar Singh विनोद जी ने अपनी पोस्ट में जिन लोगों की नौकरी के बचने का जिक्र किया है, दरअसल उसके पीछे भी कहानी है। मैनेजमेंट ने जान बूझकर कुछ साथियों को (जिसमें नीतू, पराग, इशिता, अनिमेष और विक्रांत थे) ट्रांसफर कर दिया था। ट्रांसफर भी ऐसा वैसा नहीं त्रिवेंद्रम और कश्मीर। मुझे याद है नीतू को लखनऊ, अनिमेष को जयपुर भेजा गया था। बाकियों ने मजबूरन इस्तीफा दे दिया था। खैर मैं तो निकाले जाने वालों की लिस्ट में ही था। विनोद जी ने सभी के लिए प्रयास किए। यहां तक कि ब्यूरो के अपने दोस्तों को फोन करके ये भी कहाकि ट्रांसफर किए गए लोग उनकी टीम के हैं इसलिए उन्हें बेवजह परेशान ना किया जाए। उसके बाद मैं तो मुंबई चला गया था। 19200 रुपये के फुल और फाइनल हिसाब किताब के चेक के साथ। वहां सफलता मिलती दिख नहीं रही थी। एक एल्बम के निर्देशन में कुछ हाथ बंटा रहा था। फिर दिल्ली वापसी हुई थी। लौटा तो ऑटो वाले को देने के लिए पैसे नहीं थे। ये सोचकर ऑटो पकड़ा था कि भैया (उन दिनों भैया के साथ रहता था) के घर पहुंचकर उनसे पैसे लेकर दे दूंगा। लेकिन घर पर ताला बंद था। खैर, बाद में विनोद जी के साथ एक और ब्रेकफास्ट शो प्रोड्यूस करने का मौका मिला था। सैकड़ों कहानियां हैं उन दिनों की…विनोद जी के शब्दों में कहूं (जो कि उन्होंने मुंबई जाते वक्त शुभकामनाओं के तौर पर एक किताब में लिख कर दिया था) जीवन में कहानियां हैं और कहानियों में जीवन। कहानियों का सफर बहुत लंबा… कुछ दिलचस्प सवाल जवाब की एक कड़ी सवाल- लोग कहते हैं कि आप दफ्तर में गुंडई करते हैं- जवाब- अगर मुझे इस दफ्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर सभी ड्राइवरों तक के नाम याद हैं। मैं उन्हें नमस्कार करता हूं और वो मुझे। दफ्तर के गेट से घुसकर अपने केबिन तक पहुंचने तक मैं लगातार या तो नमस्कार का जवाब देता हूं या फिर नमस्कार करता हूं। अगर इसे गुंडई कहा जाता है तो हां मैं गुंडई करता हूं। सवाल 2- कहा जाता है कि आप लॉबिंग करते हैं जवाब- अगर मैं उन लोगों से काम कराता हूं जिन्हें कुछ सीखने का जुनून है। अगर मैं ऐसे लोगों से काम कराता हूं जो हर बात की शुरूआत 'ना' से नहीं करते। अगर मैं ऐसे लोगों से काम कराता हूं जिन्हें काम करना आता है। बदले में अगर मैं ऐसे लोगों को प्यार करता हूं और इसे लॉबिंग कहा जाता है तो हां मैं लॉबिंग करता हूं..  आखिर में दो शेर (पहला इस दौर के तुरंत बाद का है और दूसरा जब वापस नौकरियां मिली थीं तब का- एक शेर तो मुनव्वर (राना) भाई का है दूसरा याद नहीं) पहला शेर- चलो इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है, अब आंखे खोल ली जाएं कि सपना खत्म होता है। दूसरा शेर- जिंदगी की राह में ऐसे मकाम आने लगे छोड़ दीं जब मंजिलें मंजिल के पयाम आने लगे
 
    Vinod Kapri sahi kaha shivendra..bas ek sanshodhan..mujhe ye nhi kaha tha ki GUNDAI krte ho..ye kaha tha ki tum daftar me DON ki tarah kyo rehte ho ?
 
    Maneesha Lal Arora Bilkul sahi kaha Sir..ladai jari rakhni behad zaruri haim..kyunki ladenge tabhi safal honge…even I went through this phase…and aaj I can say Good that is happened and Here I am standing stronger..!! touchwood

विनोद कापड़ी के फेसबुक वॉल से. विनोद कापड़ी इन दिनों इंडिया टीवी में बतौर मैनेजिंग एडिटर कार्यरत हैं.

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