छठे चरण में कम से कम आधा दर्जन विधायकों की हार निश्चित

पांचवें चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही विभिन्न दलों के सेनापतियों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना ‘लंगर’ डाल दिया है। छठे चरण में 13 जिलों के दो करोड़ दस लाख मतदाता अपने लिए 68 विधायक चुनेंगे। इसके साथ ही 49 उन विधायकों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी पुनः लिखा जाएगा, जिन्होंने 2007 के विधान सभा चुनाव में जीत का परचम फहराया था। इसमें से कितने पास और कितने फेल होते हैं इसका पता 6 मार्च को मतगणना वाले दिन चलेगा, लेकिन इतना तय हो गया है कि कम से कम करीब आधा दर्जन विधायकों को हर हाल में हार का सामना करना पडे़गा। ऐसा कई विधान सभा क्षेत्रों में दो-दो विधायकों के आमने-सामने आने से हुआ है। यह हालात परिसीमन के बाद बने हैं। अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कई विधायकों ने अपना विधानसभा क्षेत्र बदल दिया है। विधायकों के आमने-सामने होने से कई सीटों पर मुकाबला काफी रोचक हो गया है।

एक सीट पर दो विधायकों के आमने-सामने होने से जिन दिग्गज नेताओं और विधायकों पर हार की तलवार लटक रही है, उसमे बसपा सरकार में मंत्री और विधायक रामवीर उपाध्याय, चंन्द्रवीर सिंह, लखीराम नागर, धर्मसिंह सैनी, हाजी अलीम (सभी बसपा) के अलावा रालोद के हाजी याकूब, सपा के शाहिद मंजूर, कांग्रेस के इमरान मसूद, भाजपा के वीरेन्द्र सिरोही और तृणमूल कांग्रेस के श्याम सुंदर आदि हैं। जिन प्रमुख सीटों पर विधायक के सामने विधायक है उसमें हाथरस की सिंकदराराऊ, मेरठ की सरधना और किठौर, सहारनपुर की नकुड़, बुलंदशहर की बुलंदशहर विधान सीट तथा मथुरा की मांठ विधान सभा क्षेत्र शामिल है। मांठ में मुकाबला एक विधायक और सांसद जयंत चौधरी के बीच सिमटा हुआ है।

जो खास विधायक आमने-सामने हैं उसमें सिकंदराराऊ (हाथरस) से बसपा के कद्दावर नेता और विधायक रामवीर उपाध्याय का मुकाबला समाजवादी पार्टी के विधायक यशपाल सिंह चौहान से है। यशपाल भाजपा के टिकट से 2007 में जीते थे लेकिन भाजपा से नाखुश होकर उन्होंने हाल में ही सपा का न केवल दामन पकड़ा था, बल्कि टिकट हासिल करने में भी सफल रहे थे। इसी प्रकार सरधना (मेरठ) से बसपा विधायक चन्द्रवीर सिंह का मुकाबला हाजी याकूब से है, जो राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 2007 का चुनाव हाजी अपनी पार्टी ‘उत्तर प्रदेश युनाइटेड डेमोक्रेटिव फ्रेट’ से जीते थे। बाद में हाजी साहब ने अपनी पार्टी का बसपा में विलय कर लिया था, लेकिन वह वहां स्थायी ठिकाना नहीं बना सके और 2012 आते-आते हालात कुछ ऐसे बन गए कि उन्हें बसपा से नाता तोड़कर रालोद के बैनर तले चुनाव लड़ना पड़ रहा है। 2007 में उन्होंने अपने फ्रंट का बसपा में विलय किया था तो इस बार उनका फ्रंट रालोद के साथ चला गया।

किठौर (मेरठ) में बसपा विधायक लखीराम नागर का मुकाबला सपा विधायक शाहिद मंजूर से है। नकुड़ (सहारनपुर) से बसपा सरकार में मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी का मुकाबला कांग्रेस के इमरान मसूद से हो रहा है। पिछली बार इमरान निर्दलीय जीते थे। बुलंदशहर शहर से बसपा के हाजी अलीम का मुकाबला भाजपा के वीरेन्द्र शाही से है। 2007 में मांठ (मथुरा) से अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस से चुनाव जीते विधायक श्याम सुंदर शर्मा ने चुनाव जीतने के बाद बसपा का दामन थाम लिया था, लेकिन जब वहां से वह टिकट हासिल नहीं कर पाए तो तृणमूल कांग्रेस से चुनावी मैदान में कूद पड़े। उनके लिए जीत आसान नहीं लग रही है। शर्मा जी के सामने रालोद के सांसद जयंत चौधरी डटे हैं। उक्त विधायकों के अलावा अपने जमाने के चर्चित रिटायर्ड आईएएस हरदेव सिंह उर्फ बाबा भी एतमादपुर (आगरा) से रालोद के टिकट से अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। उनका मुकाबला बसपा विधायक धर्म पाल सिंह से है।

लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय ‘माया’ मैग्जीन के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.

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