छोटे शहरों की परेशानियों ने गिराई चैनलों की रेटिंग

स्पॉट फिक्सिंग मामले से इंडियन प्रीमियर लीग (ब्रांड) पर धब्बा लग सकता है, लेकिन यह खेल आयोजन फिलहाल जारी है। भले ही इसमें आरोप, विवाद और भ्रष्टाचार के मामलों के अलावा इस सीजन की रेटिंग में कमी की बात है, लेकिन विज्ञापनदाता इससे नाखुश नहीं है और उन्हें आईपीएल में अभी भी खासी संभावनाएं नजर आती हैं।

गत वर्षों की तुलना में आईपीएल के इस सीजन की रेटिंग में कमी दर्ज की गई है। पहले छह तो क्या आईपीएल अपनी चमक खो रहा है। उद्योग के पंडित ऐसा नहीं मानते। मीडिया विश्लेषक कंपनी ऑर्मैक्स के सीईओ शैलेश कपूर के मुताबिक बीते साल की तुलना में आईपीएल 6 के प्रति लोगों में ज्यादा उत्साह देखा गया है। कपूर ने कहा, 'दर्शक संख्या के आधार पर तुलना करना खासा मुश्किल है, क्योंकि रेटिंग की दुनिया में हर साल बदलाव आ जाता है।'

इस साल टीवी के दर्शकों की निगरानी करने वाली एजेंसी टैम मीडिया रिसर्च ने रेटिंग में एलसी1 शहरों (10 लाख से कम आबादी वाले) को भी जोड़ लिया, जिनकी इस बाजार में 25 फीसदी हिस्सेदारी है। एक शोध कंपनी के कार्यकारी ने बताया, 'दिन में कई घंटों के लिए बिजली कटौती सहित एलसी1 शहरों की अपनी समस्याएं हैं। इससे रेटिंग पर असर पड़ता है।' कपूर कहते हैं, 'पेप्सी और आईपीएल का गठजोड़ मजबूत है। वोडाफोन लंबे समय से आईपीएल से जुड़ा हुआ है। ब्रांडों ने इससे फायदा भी उठाया है।' (बीएस)

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