जनता त्रस्त, मुख्य सचिव मस्त, भगवान भरोसे उत्तर प्रदेश

लखनऊl क्या आप विश्वास करेंगे कि देश में सर्वाधिक आवादी बाले प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी की जिम्मेवारी सम्भालने वाले मुख्य सचिव कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 31 मई 2013 तक की अवधि में 15% कार्यदिवसों में अवकाश पर रहे हैं. शायद नहीं. पर आप मानें या न मानें, लखनऊ निवासी सामजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने आरटीआई से प्राप्त सूचना के आधार पर कुछ ऐसा ही दावा किया है.
 
दरअसल शर्मा ने बीते मई माह में मुख्य सचिव कार्यालय के जनसूचना अधिकारी से मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि एवं कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 31 मई 2013 तक की अवधि में लिए गए अवकाश की सूचना की मांग की थी. शर्मा ने उस्मानी के अवकाश प्रार्थना  पत्र भी मांगे थे. मुख्य सचिव कार्यालय के निजी सचिव एवं जनसूचना अधिकारी चन्द्र प्रकाश ने  बीते जून माह में शर्मा का प्रार्थना पत्र उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति विभाग को अंतरित किया था.
 
नियुक्ति विभाग के उप सचिव एवं जन सूचना अधिकारी अनिल कुमार सिंह द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार जावेद उस्मानी ने 23 मार्च 2012 को मुख्य सचिव का कार्यभार ग्रहण किया था एवं इस तिथि से 31 मई 2013 तक की अवधि में उन्होंने तीन बार में कुल 62 दिनों का अवकाश लिया. इसमें दिनांक 24-07-2012 से 23-08-12 तक उस्मानी 30 दिनों के परिवर्तित अवकाश पर रहे, दिनांक 01-10-2012 से 14-10-12 तक उस्मानी 15 दिनों के परिवर्तित अवकाश पर रहे तथा दिनांक 15-05-13 से 31-05-13 तक उस्मानी 17 दिनों के उपार्जित अवकाश पर रहे.
 
आंकड़ों के आधार पर शर्मा का कहना है कि 23-03-12 से 31-05-13 तक की अवधि के कुल 435 दिनों में 62 शनिवार, 62 रविवार एवं 17 सार्वजनिक अवकाश (शनिवार एवं रविवार को पड़ने बाले सार्वजनिक अवकाशों को छोड़कर) थे. इस प्रकार 435 दिनों  की इस  अवधि  में कुल 141 दिन छुट्टियां थी अर्थात मात्र 294 कार्यदिवस थे. उस्मानी के 62 परिवर्तित/उपार्जित अवकाश की अवधि में 8 शनिवार, 8 रविवार और 2 सार्वजनिक अवकाश थे इस प्रकार इस अवधि में 44 कार्यदिवस पड़े जिनमें उस्मानी ने कार्य नहीं किया. इस प्रकार स्पष्ट है कि 294 कार्यदिवसों में से 44 में उस्मानी ने कार्य नहीं किया या यूँ कहें के उस्मानी 15% कार्यदिवसों में अनुपस्थित रहे. शर्मा के अनुसार  मुख्य सचिव के स्तर के अधिकारी के इतने अधिक कार्यदिवसों में अवकाश पर रहने के ये आंकड़े चौंकाने बाले हैं.
 
शर्मा कहते हैं कि सूबे की नौकरशाही के कार्य करने की सुस्त रफ्तार और निरंकुश व्यवहार के समाचारों ने उन्हें यह सूचना मांगने पर विवश कर दिया था. शर्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आवादी वाला प्रदेश है और अधिक आबादी होने का सीधा सीधा मतलब जनता की अधिक संख्या में समस्याओं का होना भी है, ऐसे में मुख्य सचिव के कार्यदिवसों के यह आंकड़े बेहद निराशाजनक हैं और मुख्यसचिव में  प्रदेश के कार्य के प्रति वांछित रूचि के अभाव का होना दर्शा रहे हैं. शर्मा के अनुसार एक ओर जहाँ थाने में तैनात सिपाहियों को साप्ताहिक अवकाश तक मिलना मुश्किल है जिसके कारण वे अवसादग्रस्त/तनावग्रस्त होते जा रहे हैं जिसके कारण प्रदेश में विभिन्न अपराध एवं पुलिस कर्मियों द्वारा किये जाने  बाले मानवाधिकार-उल्लंघन की घटनाओं में  निरंतर वृद्धि हो रही है तो वहीं दूसरी ओर  प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी का प्रदेश की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने के स्थान पर  एकसाथ 30 -30 दिनों के अवकाश पर चले जाना और उनका अवकाश बार बार सहजता से स्वीकृत हो जाना प्रदेश में 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' की कहावत की कार्य परंपरा प्रचलित होने की पुष्टि करता है. शर्मा ने इस प्रकार की असमानता पर आधारित कार्य-परंपरा को प्रदेश के बिकास के वाधक कारकों में से एक मुख्य कारक बताया और प्रदेश के चहुमुखी विकास हेतु सरकार से इस विषय में आवश्यक कदम उठाने की अपील भी की.
 
संजय शर्मा के सूचना मागने पर नियुक्ति विभाग के उत्तर की स्कैन्ड प्रति संलग्न
 
लेखिका उर्वशी शर्मा समाज सुधारिका हैं. उनसे संपर्क 09369613513 के जरिए किया जा सकता है.

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