‘जनसंदेश टाइम्स’ पर क्यों आरोप लगाने लगे कंवल भारती!

Virendra Yadav : कँवल भारती के बहाने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के पक्ष में पिछले दिनों जो एकजुटता दिखाई दी वह अभूतपूर्व है .लेकिन पिछले दो दिनों से कँवल भारती ने फेसबुक पर जो राजनीतिक मंतव्य व्यक्त किये हैं ,वे विवादास्पद और बहसतलब हैं .उनके द्वारा वामपंथी नेतृत्व को 'रूढ़िवादी' कहना ,कांग्रेस को एकमात्र विकल्प बताना और विहिप की चौरासी कोसी यात्रा की प्रदेश सरकार द्वरा अनुमति न दिए जाने की आलोचना करना इसी तरह के मंतव्य हैं . अपनी इस राय के जरिये वे एक राजनीतिक स्टैंड लेते दीख रहे हैं.

इसका उन्हें उसी तरह जनतांत्रिक अधिकार भी है जिस तरह दूसरों को इससे असहमत होने का . हैरत की बात यह है कि अपने इस जनतांत्रिक अधिकार का उपयोग करते हुए वे दूसरों की जनतांत्रिक भूमिका के प्रति संवेदनशील नहीं हैं .उन्होंने लखनऊ के समाचारपत्र 'जनसन्देश टाईम्स' पर यह आरोप लगाया है कि उसने अपने 'फेसबुक ' स्तम्भ में आज़म खां के समर्थकों के दबाव में उनकी चौरासी कोसी परिक्रमा के पक्ष में लिखे उस वक्तव्य को प्रकाशित कर दिया जिसे उन्होंने बाद में हटा दिया था. इसके लिए उन्होंने समाचार पत्र से माफी मांगने और ऐसा न करने पर मान हानि का मुकदमा दर्ज करवाने की बात कही है .

यह सचमुच विस्मयकारी है कि जिस अखबार ने कँवल भारती की अभिव्यक्ति के पक्ष में मुहीम के तौर पर समाचार छापे, अग्रलेख और सम्पादकीय लिखे उसी पर अब वे आज़म खां के समर्थकों के प्रभाव में होने का आरोप लगा रहे हैं. उनका यह आरोप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में बनी एकजुटता में दरार लाने वाला है. क्या ही अच्छा होता यदि वे दूसरों की अभिव्यक्ति का भी सम्मान करते और संघर्ष के इस दौर में अपने विवादास्पद बयानों से बचते!

आलोचक और साहित्यकार वीरेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.

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