जनसंदेश टाइम्‍स में पत्रकार काम करते हैं या कबाड़ी?

पत्रकार के लिए जरुरी है खबरों की समझ। इसके अलावा विषय का अच्छा ज्ञान और शब्दों एवं वाक्यों में शुद्धता का पूरा ध्यान। लेकिन जब अखबार के लोग पत्रकारिता को आड़ बनाकर केवल कोरम पूरा करते चलें तो यहीं पत्रकारिता की हत्या होती है। यह बात 'जनसंदेश टाइम्स' के वाराणसी यूनिट ऑफिस में डेस्क पर काम कर रहे लोगों और जिले में काम कर रहे पत्रकारों पर सटीक बैठती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब जनसंदेश टाइम्स बनारस में आया तो उसके साथ बनारस की पत्रकारिता के 'तथाकथित दिग्गज' भी आये।

टीम को सर्वोत्तम का दर्जा स्वयं ही इस टीम ने दे दिया। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी जो दशा इस अखबार की है, उससे लगता है कि यह अखबार से जुड़े उपर के लोग भी केवल जो सामग्री जिले से भेजी जा रही है उसे चेक नहीं करते और आँख बंद करके जस का तस उतार कर अपनी इतिश्री कर रहे हैं।

अखबार में दो खबर इस हफ्ते में छपी। पहली 23 अप्रैल को मंत्री शिवपाल यादव चन्दौली जिले के कसवड़ (सकलडीहा तहसील) में आने की थी। अखबार के पत्रकारों ने अपने-अपने जिला कार्यालय को खबर दी। जनसंदेश टाइम्स ने मेन लीड लेते हुए इस खबर को दो जगह से छापी। मतलब एक ही खबर दो डेटलाइन से। पहली खबर सकलडीहा से तो दूसरी चन्दौली ब्यूरो कार्यालय से छपी। एक ही कार्यक्रम में सांसद विधायक समेत कई लोगों के नाम दो-दो जगह प्रकाशित हुए। यहां साफ दिखायी देता है कि ब्यूरो कार्यालय का अपने संवाददाताओं से भी सामंजस्य नहीं है। लेकिन इससे भी बड़ी गलती डेस्क प्रभारी और सम्पादकीय विभाग से हुई जिसने इस चूक को नजरअंदाज कर दिया और एक ही खबर को दो अलग जगहों से छाप दिया। यह पत्रकारिता के नाम पर मजाक नहीं तो और क्या है।

दूसरी घटना 29 अप्रैल के अंक में दिखायी पड़ी कि मुगलसराय में एक सेनेटरी के शो-रुम का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सांसद रामकिशुन ने किया। खबर छपी सेकेंड लीड के रुप में और हेडिंग लगा कि विधायक ने किया सेनेटरी हाउस का उद्घाटन। चूंकि स्थानीय संवाददाता ने खबर बनाकर ब्यूरो कार्यालय भेजा होगा, वहां खबर को भेज कर इति श्री हो गयी। बनारस डेस्क पर खबर गयी तो उपर के लोगों ने भी बस देखा होगा कि खबर आ गयी। पेज सेट किया चिपकाया और भेज दिया छपने के लिए। जबकि पूरे खबर में सांसद रामकिशुन लिखा हुआ है। इससे जनसंदेश के पत्रकारिता के स्तर का पता चलता है जहां पत्रकारिता कम, मजाक और हत्या ज्यादा होती है। क्या संदेश दे रहा है जनसंदेश पाठकों को। ऐसे अखबारों को तत्काल नोटिस जारी कर देनी चाहिए।

रितेश कुमार

ritesh26192@gmail.com

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