Rajiv Nayan Bahuguna : माध्यमों से जुड़े जो मेरे कलीग आजकल विविध दलों का टिकट पाने को मार मचाये हैं, उनके हित में मैं उदयन शर्मा की आप बीती शेयर कर रहा हूँ। उदयन शर्मा एक औसत दर्जे के ठीकठाक पत्रकार थे। एकाधिक संस्थानों में सम्पादक रह चुके थे। एक दिन एकाएक उनके भीतर छुपे दमित कामना के काले गीदड़ ने बाहर छलांग लगा दी और वह कांग्रेस का टिकट पाने की सफ़ में लग गए।
कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वियों द्वारा धकियाये-लतियाए जाने के बाद उन्होंने व्यथित स्वर में कहा- जब मैं पत्रकार था तो अर्जुन सिंह मेरी कार का दरवाज़ा खोलता था, आज मुझे अर्जुन सिंह के चमचों की कार का दरवाज़ा खोलना पड़ रहा है।
मित्रों, राजनीति न हमारा धर्म है और न कर्म। हम अधिक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। भले ही सत्ता और भौतिक साधनों का हमारे पास लोचा हो पर याद रखो कि चोर के पास थानेदार से ज्यादा माल होता है पर ठसक नहीं होती। अपनी इच्छाएं पत्रकारिता में रह कर ही पूरी करो। पैसे की हवस है तो रिश्वत लो, नेताओं-धन पशुओं को ठगो, धमकाओ, ब्लैकमेल करो पर टिकट की लाइन में न लगो।
वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा के फेसबुक वॉल से.






