जब दिग्विजय सिंह ने उन वरिष्ठ पत्रकार की ‘बेबाकी’ बंद कर दी!

एक वरिष्ठ पत्रकार हैं. ज्यादातर अखबारों में कार्यरत रहे हैं. खुद का भी अखबार चला और बंद कर चुके हैं. चैनलों में भी थोड़ा बहुत कार्य किया है. जब एक चैनल से उनकी बड़े बेआबरू होकर विदाई का पूरा सीन तैयार हो चुका था तो उनके कुछ पत्रकार मित्रों ने उस मुश्किल दौर में उनकी बड़ी मदद की और एक ठीकठाक चैनल में वरिष्ठ पद पर आसीन कराया. उन वरिष्ठ पत्रकार की फितरत अवसरवादी के साथ-साथ लगातार झूठ बोलने और खुद की हर वक्त ब्रांडिंग करने की रहती है.

उन्होंने चैनल पर अपना एक स्पेशल शो शुरू करवाया. शख्सियतों से बातचीत का. दावा तो वे बड़ी बेबाकी का करते हैं पर इन इंटरव्यूज में सारा खेल पीआर का दिखता है. कोई सवाल ऐसा नहीं जिससे नेता असहज हो जाए. सब कुछ स्मूथ और प्लेन. पिछले दिनों इन वरिष्ठ पत्रकार महोदय ने दिग्विजय सिंह का इंटरव्यू किया. जब उन्होंने थोड़ा साहस करके दिग्विजय से केंद्र की कांग्रेसी सरकार की असफलता का कारण पूछा और महंगाई, करप्शन, चीन घुसपैठ आदि मसलों को उठाया तो दिग्विजय ने ऐसा तरेरा कि वरिष्ठ पत्रकार की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई.

दिग्विजय ने कहा कि तुम तो ऐसे आरोप लगा रहे जैसे विपक्ष के नेता. दिग्विजय ने यह भी कह डाला कि ये सब मुद्दे तुम्हारें चैनल पर डिस्कस करने लायक नहीं हैं. इतना कहकर दिग्विजय ने इंटरव्यू देना बंद कर दिया. तब वरिष्ठ पत्रकार को तामझाम समेट कर लौटना पड़ा. लोग तो अब कहने लगे हैं कि ये वरिष्ठ पत्रकार महोदय खुद को बेबाक बताते रहते हैं पर इनका पूरा काम तो पीआर एजेंसियों के एक्जीक्यूटिव्स जैसा हो. इन वरिष्ठ पत्रकार महोदय फिलहाल सब कुछ भूलकर इन दिनों चैनल में अपने पंख और पैर फैलाने की जी-तोड़ कोशिश में लगे हैं. देखना है कि वे कब तक इस चैनल में अपनी समस्त उर्जा से अपनी समस्त बेबाक प्रतिभा को बिखरते हुए सबको आलोकित करते हैं. (कानाफूसी)

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