जम्‍मू कश्‍मीर की मीडिया पर है स्‍पीकर का कंट्रोल!

जम्मू : विधानसभा स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन ने कहा कि ‘मीडिया मेरे कंट्रोल में है। समाचार पत्रों में छपी स्टोरी के सूत्रों की जानकारी सदन को देनी होगी। स्पीकर द्वारा यह बात कहने पर प्रेस गैलरी में मौजूद मीडिया कर्मियों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही की रिपोर्टिग का बहिष्कार किया। सेंट्रल हाल के बाहर धरने पर बैठे मीडिया कर्मियों ने मांग की कि जब तक स्पीकर अपने ये शब्द वापस नहीं लेते तब तक बहिष्कार जारी रहेगा। विपक्ष की नेता महबूबा मुफ्ती भी मीडिया के समर्थन में आ गई। महबूबा ने कहा कि जब तक मीडिया का बहिष्कार समाप्त नहीं होगा तब तक पीडीपी भी सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगी।

इसके साथ ही इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव भी लाएगी। स्पीकर लोन के रूख के चलते मीडिया कर्मी इससे पहले भी सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर चुके हैं। तब स्पीकर को मीडिया से माफी मांगनी पड़ी थी। स्पीकर ने सोमवार को कार्यवाही के दौरान इन शब्दों को इस्तेमाल तब किया जब स्वास्थ्य मंत्री शाम लाल शर्मा ने उनके तथा विभाग के खिलाफ एक समाचार पत्र में छपी स्टोरी का मामला सदन में उठाया। शाम ने समाचार पत्र के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। शाम ने इस स्टोरी पर समाचार पत्र से जबाव लेने की अपील स्पीकर से की।

शर्मा का साथ देने के लिए पीएचई मंत्री ताज मोहयुद्दीन भी खड़े हो गए। इस पर स्पीकर ने कहा कि इस मामले पर बाद में अपना निर्णय देंगे और मीडिया को भी निर्देश जारी करेंगे। इस पर पीडीपी के निजामुद्दीन बट ने कहा कि इस मामले को विधानसभा में नहीं उठाया जा सकता। इसकी शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को की जानी चाहिए। इस पर स्पीकर ने कहा,‘ मीडिया मेरे अधीन है और उन्हें अपने सूत्रों की जानकारी देनी ही होगी।’

बाद में स्पीकर ने कहा कि मीडिया सदन के अधीन है। इस पर प्रेस गैलरी में मौजूद रिपोर्टर विरोध स्वरूप बाहर आ गए। कार्यवाही से स्पीकर के शब्दों को हटाने की मांग करते हुए विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए।मीडिया ने मंगलवार को भी बहिष्कार जारी रखने की बात कही है। पीडीपी अध्यक्ष ने भी मीडिया के बहिष्कार तक पीडीपी द्वारा सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा पत्रकार वार्ता में कही। इसके बाद हुई पार्टी की बैठक में मंगलवार को इसी विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाने का फैसला किया।

स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन का मीडिया के साथ विवाद पहले भी हो चुका है। गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले बजट सत्र के दौरान वर्ष 2009 में भी उनके व्यवहार के चलते मीडिया ने कार्यवाही की रिपोर्टिग का बहिष्कार किया।उस समय विपक्ष के नेता महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा से वाक आउट किया था। इस पर मीडिया कर्मी महबूबा की प्रतिक्रिया लेने के लिए मीडिया गैलरी से बाहर चले गए। बाहर गए रिपोर्टरों को प्रेस गैलरी में न आने देने के निर्देश जारी कर दिए। बाद में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार ने मध्यस्थता की थी।उस समय स्पीकर ने विधानसभा परिसर में प्रेस वार्ता कर अपनी गलती मानी थी। और मीडिया को रिपोर्टिग करने को कहा था। साभार : भास्‍कर

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