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जयललिता का मास्टर स्ट्रोक, राजीव के हत्यारे रिहा होंगे

Nadim S. Akhter : राजनीति की फितरत गिरगिट को भी मात दे दे. कांग्रेस की सरकार अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाने के फैसले पर तेजी से अमल करती है लेकिन अपने नेता राजीव गांधी के हत्यारों की दया याचिका पर 11 वर्षों तक रहस्यमयी चुप्पी साधे रहती है. ना उन्हें मारती है और ना जीने देती है, यहां उसे कोई जल्दी नहीं. कांग्रेस और उसके गृह मंत्री कहते हैं कि अफजल गुरु को फांसी पर लटकाकर हमने एक संदेश दिया है लेकिन राजीव के हत्यारों के मामले में ये संदेश क्यों नहीं दिया गया, ये समझ से परे है.

Nadim S. Akhter : राजनीति की फितरत गिरगिट को भी मात दे दे. कांग्रेस की सरकार अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाने के फैसले पर तेजी से अमल करती है लेकिन अपने नेता राजीव गांधी के हत्यारों की दया याचिका पर 11 वर्षों तक रहस्यमयी चुप्पी साधे रहती है. ना उन्हें मारती है और ना जीने देती है, यहां उसे कोई जल्दी नहीं. कांग्रेस और उसके गृह मंत्री कहते हैं कि अफजल गुरु को फांसी पर लटकाकर हमने एक संदेश दिया है लेकिन राजीव के हत्यारों के मामले में ये संदेश क्यों नहीं दिया गया, ये समझ से परे है.

अब कांग्रेस को नहले पे दहला मिला है. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार ने भी एक संदेश देने का फैसला किया है और ये -संदेश- राजीव गांधी के तीन हत्यारों को आजाद करके दिया जाएगा. जयललिता सरकार अपने उस अधिकार का इस्तेमाल कर रही है, जिसके तहत 14 साल तक जेल काट चुके दोषियों को उनके अच्छे व्यवहार के आधार पर राज्य सरकार रिहा कर सकती है.

अब कांग्रेस को काटो तो खून नहीं. अफजल गुरु के मामले में देश को -संदेश- देने वाली कांग्रेस को सांप सूंघ गया है. क्या कांग्रेस देश को बता पाएगी कि अपने सबसे बड़े नेता (गांधी परिवार) के हत्यारों को फांसी देने में उसने इतनी देर क्यों की?? उनकी दया याचिका को लम्बे समय तक क्यों लटकाकर रखा??!! आखिर ऐसा करके वह देश-दुनिया को क्या संदेश देना चाहती थी???!!

जयललिता के कदम के व्यक्तिगत तौर पर मैं स्वागत करता हूं क्योंकि इस मानवीय फैसले से राजीव के हत्यारों को रोज तिल-तिल कर नहीं मरना पड़ेगा. आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि हर रोज सूरज को देखकर उस इंसान के दिल पर क्या बीतती होगी, जिसे नहीं पता कि उसे फांसी कल होगी या परसों लेकिन ये लगभग तय है कि फांसी तो अब होगी ही. मरना अब लगभग निश्चित है.

तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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