जागरण के पत्रकार बृजेश के खिलाफ कोर्ट ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश

कोर्ट ने दैनिक जागरण, मऊ के पत्रकार बृजेश कुमार के ऊपर जालसाजी का मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है. हालांकि पुलिस ने दैनिक जागरण के दबाव में कोर्ट के आदेश के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है. ब्रृजेश यादव ने ब्रह्मखोज के संपादक ब्रह्मानंद पांडेय के जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद ब्रह्मानंद ने पुलिस की शरण ली थी. पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद ब्रह्मानंद कोर्ट चले गए थे, जिसके बाद कोर्ट ने बृजेश पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.

जानकारी के अनुसार ब्रह्मखोज अखबार में बृजेश यादव के बारे में कुछ खबरें प्रकाशित हुई थीं, जिसके बाद बृजेश ने अखबार के संपादक ब्रह्मानंद पांडेय को उनके मोबाइल जान से मारने की धमकी दी थी. इस मामले के बाद ब्रह्मखोज की ओर से बृजेश और उसके भाई लालबहादुर यादव के खिलाफ थाना सरायलखंसी में मुकदमा कायम कराया गया था. इसके बाद जब ब्रह्मखोज ने दैनिक जागरण वालों से समझौता नहीं किया तो दैनिक जागरण के ब्‍यूरोचीफ विनय जायसवाल ने ब्रह्मखोज के संपादक के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज करा दिया. हालांकि आरोप है कि विनय जायसवाल ब्रह्मखोज से पैसा लेकर बतौर संवाददाता अखबार को खबरें उपलब्‍ध कराता था. जागरण के दबाव में पुलिस ने भी विनय जायसवाल एवं बृजेश की भरपूर मदद की. पुलिस ने ब्रह्मानंद पांडेय के उपर दो मुकदमे कायम किए. 
 
ब्रह्मानंद ने जब पुलिस को बृजेश एवं उसके साथियों पर मुकदमा दर्ज करने का आवेदन दिया तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद ब्रह्मानंद ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. करीब छह महीने के बाद अदालत से बृजेश यादव और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा कायम कराने का आदेश जारी करते हुए कहा है कि यदि मामला झूठा पाया जाए तो वादी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए. यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि आज तक बृजेश यादव के खिलाफ थाना सरायलंखसी मे बतौर एनसीआर 253/11 की विवेचना पुलिस ने जानबूझ कर पेंडिंग में रखी है क्योंकि दैनिक जागरण में खुद को कभी व्यूरोचीफ तो कभी प्रबंधक बताने वाले विनय जायसवाल के खिलाफ भी कागजी सुबूत हाथ लग रहे हैं. बृजेश यादव ने जिस मोबाइल नंबर से ब्रह्मखोज के संपादक को जान से मारने की धमकी दी वह मोबाइल फर्जी नाम से आवंटित होना प्रमाणित हो चुका है. बृजेश यादव के भाई लालबहादुर यादव के खिलाफ जिले के रानीपुर थाने में 15 मुकदमे से अधिक मुकदमें दर्ज हैं.
 
इस संदर्भ में ब्रह्मानंद पांडेय का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही है. पुलिस दैनिक जागरण के दबाव में कोर्ट का आदेश 18 जून को दिए जाने के बाद भी अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया है. दूसरी तरफ इस संदर्भ में दैनिक जागरण के ब्‍यूरोचीफ विनय जायसवाल से बात की गई तो उन्‍होंने कोई कमेंट करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी खबरें छपने से उनके सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. जाहिर भी है पशु तस्‍कर, जमीन माफिया एवं अपराधियों को पत्रकार बनाने वाले जागरण प्रबंधन को ऐसी चीजों से कुछ फर्क नहीं पड़ता. वो भी इस स्थिति में जब वरिष्‍ठों और उनके परिजनों के हाथ खुद एनआरएचएम घोटाले के आरोपों से रंगे हों.   

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