जागरण प्रबंधन की हठधर्मिता के शिकार बन गए शाहिद, लू लगने से निधन

 दैनिक जागरण के वरिष्‍ठ पत्रकार मोहम्‍मद शाहिद का रविवार को निधन हो गया. वे 52 वर्ष के थे. वे दैनिक जागरण, कौशाम्‍बी के ब्‍यूरोचीफ थे. उनका शव कौशाम्‍बी स्थित उनके किराए के घर में मिला. बताया जा रहा है कि वे जागरण प्रबंधन की हठधर्मिता के शिकार बन गए. मोहम्‍मद शाहिद के निधन से जागरण के बनारस और इलाहाबाद यूनिट के पत्रकार अंदर से बहुत ही दुखी हैं. 

मोहम्‍मद शाहिद दो दशक से भी ज्‍यादा समय से दैनिक जागरण से जुड़े हुए थे. चार-पांच साल पहले उनका तबादला प्रबंधन ने बनारस से इलाहाबाद कर दिया था. पांच महीने पहले उन्‍हें प्रताड़ना स्‍वरूप कौशाम्‍बी का ब्‍यूरोचीफ बना दिया गया, जबकि वे वहां जाना नहीं चाहते थे. वे जागरण के डाइरेक्‍टर वीरेंद्र कुमार, जीएम गोविंद श्रीवास्‍तव तथा संपादकीय प्रभारी सदगुरु शरण से कई बार बनारस तबादला किए जाने की गुहार लगा चुके थे, परन्‍तु प्रबंधन उनकी बातों पर ध्‍यान नहीं दे रहा था. 
 
मोहम्‍मद शाहिद पिछले चार-पांच दिन से बीमार थे. उन्‍हें लू लग गया था. उन्‍होंने बीमार होने की बात कह कर प्रबंधन से छुट्टी मांगी थी, परन्‍तु मैनेजमेंट उनकी बातों पर ध्‍यान नहीं दिया. कहा जा रहा है कि उन्‍होंने सदगुरु शरण और गोविंद श्रीवास्‍तव से कई बार छुट्टी के लिए कहा, परन्‍तु प्रताड़ना जारी रखने के उद्देश्‍य से इन लोगों ने उन्‍हें अवकाश नहीं दिया. गौरतलब है कि कुछ समय पहले मोहम्‍मद शाहिद को भी छंटनी की लिस्‍ट में शामिल किया गया था. इसके चलते भी उनके ऊपर जबर्दस्‍त दबाव था. 
 
बताया जा रहा है कि छु्ट्टी नहीं मिलने की वजह से मजबूरी में शाहिद को कार्यालय जाना पड़ रहा था. रविवार की रात को उन्‍हें बहुत तेज बुखार था. वे आफिस से घर आए. वहीं पर उनका निधन हो गया. शाहिद कच्‍ची गृहस्‍थी में ही इस दुनिया को अलविदा कह गए. वे अपने पीछे एक नाबालिग बच्‍ची छोड़ गए हैं. सूचना मिलने पर उनके परिजन उनके शव को पैतृक गांव ले गए. जहां उनको सुपुर्द-ए-खाक किया गया. 
 
पशु तस्‍करों तथा जमीन माफियाओं को पत्रकार बनाने वाला जागरण प्रबंधन अपने पुराने पत्रकारों के प्रति थोड़ी भी सहानुभूति नहीं रखता है. मोहम्‍मद शाहिद के साथ भी ऐसा ही किया गया. मोहम्‍मद शाहिद को प्रताडि़त करने तथा अवकाश न देने के संदर्भ में जब संपादकीय प्रभारी सदगुरु शरण से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि वे खुद तीन-चार दिन से अवकाश पर हैं. लिहाजा शाहिद के उनसे छुट्टी मांगने की बात सही नहीं है. जब गोविंद श्रीवास्‍तव से बात की गई तो हर बार की तरह ये गैरलोकतांत्रिक व्‍यक्ति इस संवेदनशील मामले पर भी दुख व्‍यक्‍त करने या सच बताने की बजाय बात करने से ही इनकार कर दिया. 

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