जादूगोड़ा प्रशासन द्वारा पीड़ित पत्रकार ने की खुद के नार्को टेस्ट की मांग

प्रिय यशवंत जी, अब जादूगोड़ा में अवैध चिटफंड संचालक कमल सिंह के एजेंटो द्वारा निवेशकों को परेशान करने के लिए झूठा मुकदमा किया जा रहा है, इस प्रकार के झूठे मुकदमो मे एजेंट अपनी पत्नी तक को शामिल कर रहे हैं और लोगों से कहते फिर रहे हैं कि औरत का केस टाइट होता है। अब पैर पकड़वाकर माफी मंगवाऊंगा साले को, पेपर में नाम छापने का बहुत शौक है ना.
 
मामला ये है कि जादूगोड़ा मे कमल सिंह का एक बड़ा एजेंट है बाल्मीकि प्रसाद मेहता. इसने भी लोगों का करोड़ों रूपये कमल के कंपनी में निवेश करवाया था. इन्हीं निवेशकों में से एक यूसिल सुरक्षा विभाग में कार्यरत रिटायर्ड फौजी श्री काशीनाथ सिंह ने चार लाख रूपये बाल्मीकि प्रसाद को दिसंबर 2012 को दिया था. पैसा लेते समय बाल्मीकि प्रसाद मेहता ने काशीनाथ सिंह से कहा था कि पैसों की जरूरत पड़ने पर चार दिन पहले बोल देना पैसा वापस कर दूंगा, मई 2013 से काशीनाथ सिंह अपना पैसा बाल्मीकि से वापस मांग रहे थे पर उन्होने पैसा वापस नहीं किया की इसी बीच कमल सिंह जादूगोड़ा से फरार हो गया. कमल के जादूगोड़ा से फरार होने के कुछ दिनों के बाद काशीनाथ सिंह ने जादूगोड़ा थाना में लिखित आवेदन देकर बाल्मीकि मेहता पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए पैसे दिलाने की मांग की. लेकिन बाल्मीकि मेहता ने जादूगोड़ा थाना के दलाल टिकी मुखी के साथ मिलकर अपने ऊपर केस दर्ज नहीं होने दिया. 
 
इसके कई दिनों बाद 12 नवंबर 2013 को मैंने अखबार में कमल सिंह के बहुत से एजेंटों का नाम प्रकाशित किया जिसमें बाल्मीकि प्रसाद मेहता का नाम भी शामिल था. यह समाचार छपने के बाद थाना के दलाल टिकी मुखी के साथ मिलकर बाल्मीकि प्रसाद मेहता ने हमें सबक सिखाने एवं सच्चाई का मुंह बंद करवाने के उदेश्य से अपनी पत्नी श्रीमती सुनीता देवी (50 वर्षीय) से 30/12/2013 को एक झूठा मुकदमा कोर्ट से हम दोनों भाइयों पर यह कह कर दर्ज करवा दिया कि हम दोनों सगे भाइयों ने लगातार 12, 13 और 14 नवंबर को यूसिल कालोनी स्थित उनके घर जाकर उनसे छेड़खानी की और तीस हज़ार की रंगदारी मांगी. इसके अलावा एक और झूठा मुकदमा कोर्ट से काशीनाथ सिंह पर भी कर दिया जिसमें काशीनाथ सिंह पर 6.5 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है एवं 18/11/2013 को रात दस बजे घर मे तोड़फोड़ का आरोप लगाया है (जबकि सच्चाई यह है कि काशीनाथ सिंह 18/11/2013 को रात दस बजे यूसिल में ड्यूटी कर रहे थे). इस केस में मुख्य गवाह अपनी पत्नी सुनीता देवी को बनाया है एवं हमारे केस में थाने के दलाल टिकी मुखी के दोस्त हीरा यादव एवं हरीश भकत को गवाह बनाया गया है. यही हीरा यादव हमारे ऊपर किए गए पहले के तीन केस में भी गवाह है और यह जादूगोड़ा के भूमाफिया राजकुमार यादव का भाई है एवं हरीश भकत खुद कमल सिंह का बड़ा एजेंट है.
 
पूरे मामले मे काशीनाथ सिंह ने जादूगोड़ा पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए डीएसपी को बताया कि मैंने दो माह पहले ही आवश्यक कागजातों के साथ जादूगोड़ा थाने में केस दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था और प्रतिलिपि पर जादूगोड़ा थाना के मुंशी के हस्ताक्षर भी हैं लेकिन निजी स्वार्थ के खातिर कोई कार्रवाई नहीं की गई बल्कि मुझ पर दवाब बनाने के लिए कोर्ट से झूठा मामला दर्ज करवा दिया गया और उसे थाना प्रभारी ने अविलंब दर्ज कर लिया ताकि मैं परेशान होकर अपना केस वापस ले लूं. अगर दो माह पहले ही बाल्मीकि पर कार्रवाई की गयी होती तो मुझ पर एवं पत्रकार बंधुओं पर इस प्रकार का झूठा मामला दर्ज नहीं होता. ये पूरी तरह से प्रशासन की मिलीभगत का मामला है.  
 
हमने अधिकारियों को लिखित दिया है कि एक साल से हम दोनों भाइयों को निशाना बनाकर कुछ असामाजिक तत्वों, जिसमें टिकी मुखी मुख्य रूप से शामिल है, ने पाँच पाँच झूठा मामला दर्ज़ कराया है. इनमें से कई मामलों को बड़े अधिकारियों ने अभियोजन के लायक भी नहीं समझा, इसीलिए बहुत जरूरी है कि केस करने वाले सभी लोग, सभी गवाहों के साथ, हम दोनों भाइयों का नार्को टेस्ट कराया जाए नार्को टेस्ट से पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी और मुख्य साजिशकर्ता कौन है यह भी पता चल जाएगा. अगर हम दोनों भाई किसी भी रूप में दोषी पाए गए तो हमें फांसी पर चढ़ा दिया जाए वरना उन्हीं धाराओं में उन सभी पर केस दर्जकर कार्रवाई किया जाए जो हमपर किया गया था. इस नार्को टेस्ट में होने वाले खर्च को हम दोनों भाई खुद वहन करेंगे चाहे इसके लिए हमे घर बार ही क्यों नहीं बेचना पड़े.
 
संतोष अग्रवाल
पत्रकार
जादूगोड़ा

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