जादूगोड़ा पुलिस ने कमल का मामला उठाने पर सामाजिक कार्यकर्ता को भेजा जेल

अपराधियों को पकड़ने में नाकाम जादूगोड़ा पुलिस प्रशासन ने पुलिसिया कार्यशैली के खिलाफ आवाज उठाने वाले आजसू नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनू कालिंदी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, सोनू कालिंदी का कसूर सिर्फ इतना है कि वे जनता के हित में आवाज़ उठाते रहे हैं.
 
जादूगोड़ा कमल सिंह प्रकरण में कमल सिंह, दीपक सिंह एवं बीसियों फरार वारंटियों को गिरफ्तार करने में नाकाम जादूगोड़ा पुलिस प्रशासन ने एक सामाजिक कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर यह दिखा दिया है कि उनकी कार्यशैली क्या है. जादूगोड़ा पुलिस का कहना है कि विशेष अभियान के तहत सोनू को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इसी थाने में पिछले पांच माह से आसनबनी के मुखिया धीरेन्द्र नाथ टूडू सहित कई लोगों का वारंट पड़ा हुआ है, लेकिन प्रशासन का विशेष अभियान सिर्फ उन्हीं लोगों पर चलता है जो गलत के खिलाफ आवाज उठाते हैं या पैसे नहीं देते हैं.
 
सोनू कालिंदी ने दस अक्टूबर २०१३ को जादूगोड़ा थाना से सूचना के अधिकार के तहत मांग की थी कि कमल सिंह प्रकरण में अभी तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की है एवं कितने लोगों ने मामला दर्ज करवाया है और कितने लोगों का मामला दर्ज किया गया है? इस सवाल से बौखलाकर एक पुराने मामले में सोनू को १२ अक्टूबर २०१३ को जादूगोड़ा थाना के सुशिल डांगा ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, सोनू के सवालों का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था सो जादूगोड़ा पुलिस ने सवाल का जवाब इस प्रकार से दिया है कि सूचना अधिकार अधिनियम की धारा आठ के अंतर्गत सूचना नहीं दी जा सकती है. सोनू कालिंदी ने कमल सिंह मुद्दे पर प्रधानमन्त्री को सौपने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चला रखा है यह भी एक वजह है प्रशाशन की आंखों की किरकिरी बनने की.
 
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र में एक होटल है होटल राहुल. इस होटल के सबसे उपरी मंजिल में लॉज बना हुआ है, इस लॉज के मालिक से थाना के छोटा बाबू सुशिल डांगा का बहुत दोस्ती है और इनका बराबर इस होटल में आना–जाना रहता है. सोनू कालिंदी के बयान से १० नवंबर २०१३ को अखबार में समाचार छपा था कि अनुमंडल के सभी होटलों की नियमित जांच करे प्रशासन, होटलों में सीसीटीवी लगाया जाएं. जादूगोड़ा के होटल राहुल में बड़ी संख्या में युवक युवती आते हैं जो होटल के एकदम ऊपर बने लॉज में ठहरते है लेकिन होटल से लॉज जाने का रास्ता बिलकुल अंधेरा और गुफा नुमा है जो इस होटल को संदेहास्पद बना रहा है एवं कई संदिग्ध लोग यहां ठहरते है. इसकी जांच की मांग वे अनुमंडल अधिकारी से करेंगे.
 
बस इसी बात से खीझकर सोनू कालिंदी को पांच साल पुराने (२००८) मामले में गिरफ्तार किया गया. इस मामले में सोनू से कभी भी पूछताछ तक नहीं की गई. सोनू को किसी बड़े अपराधी की तरह रात के बारह बजे उसके घर से गिरफ्तार किया गया, गिरफ्तार करते वक्त सोनू की पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता रेखा कालिंदी से बदसलूकी की गई, रेखा कालिंदी के अनुसार रात के बारह बजे बिना वर्दी के जादूगोड़ा पुलिस के सुशिल डांगा उनके घर पहुंचे सुशिल डांगा के साथ एक अधिकारी एवं कई सिपाही थे. सुशिल डांगा बोल रहे थे की 'राहुल होटल' का बारे में गलत बोलता है और उनके सामने उनके पति से मारपीट की गई एवं सुशिल डांगा एवं उनके साथ मौजूद अधिकारी ने उनके साथ भी बदसलूकी की, फिर सोनू को पुलिस अपने साथ ले गई और सुबह ही जेल भेज दिया.
 
सोनू कालिंदी की पत्नी रेखा कालिंदी ने पुरे मामले में वरीय आरक्षी अधीक्षक को जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की है.
 
जादूगोड़ा के पत्रकार सह व्यापारी संतोष अग्रवाल ने कहा कि सुशिल डांगा खुद अपराधी है और उसपर गैरजमानती धारा के अंतर्गत जादूगोड़ा थाने में मामला दर्ज है इसके बावजूद भी वो जादूगोड़ा थाने में है. यह पुलिसिया कार्यशैली के दोहरे चरित्र को उजागर करता है, आगे संतोष अग्रवाल ने कहा कि सुशिल डांगा का राहुल होटल के मालिक बिरेन्द्र सिंह से बहुत दोस्ती है और वह बराबर होटल जाता रहता है. राहुल होटल के मालिक के साथ मिलकर उसने फर्जी मामले में मुझे फंसाया है जिसके खिलाफ मुख्यमंत्री, डीजीपी, डीआईजी, से शिकायत की गयी है.
 
संतोष अग्रवाल ने कहा कि सोनू मामले में इस बात की जांच होनी चाहिए कि सुशिल डांगा किसके आदेश से सोनू को गिरफ्तार करने उसके घर गया था जबकि केस की जांच अधिकारी ठाकुर कर रहे हैं.
 
इधर जादूगोड़ा थाना के कुछ स्टाफों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जादूगोड़ा के थानेदार नन्द किशोर दास सोनू को अरेस्ट करने से मना कर रहे थे, लेकिन सुशिल डांगा ने थानेदार की भी एक नहीं मानी और सोनू को गिरफ्तार कर लिया.
 
सोनू के साथ हुए अन्याय पर आक्रोश व्यक्त करते हुए जिला परिषद सदस्य करुनामय मंडल ने कहा कि पूरे मामले को जिला योजना समिति की मासिक बैठक में मंत्री राजेन्द्र प्रसाद के समक्ष उठाया जाएगा. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को रात के बारह बजे अपराधियों की तरह गिरफ्तार करना पुलिस प्रशासन की दोहरी मानसिकता को उजागर करता है. जादूगोड़ा में और भी कई वारंटी है, पुलिस प्रशासन के इस कार्रवाई से जन प्रतिनिधियों में आक्रोश है.
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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