‘जानो दुनिया’ : घर फूंक तमाशा देख

मैं इस कंपनी को अपने इंटरव्यू के तीन महीने बाद ज्वाइन किया एवं तीन महीनों के अंदर अलविदा कह ​दिया। अलविदा कहने के बहुत सारे कारण थे, लेकिन सबसे पहला कारण। इस चैनल के मालिक का टारगेट केवल पैसा है। अगर यकीन न आए तो इंटरनेट पर सर्च कर लें, आपको लिखा मिल जाएगा- मेरा टारगेट एक करोड़ बिलियन : संजय गुप्ता। इस चैनल के मालिक कभी आईएएस अधिकारी थे। मगर गुजरात में आए भूकंप के बाद गुजरात एवं मालिक की जिन्दगी बदल गई।

एक आईएएस अधिकारी कुछ सालों में गुजरात का एक बड़ा नामी गरामी बिजनसमैन बन गया। बहुत सारे धंधे शुरू कर​ दिए हैं। दूसरे धंधों में जुटे हुए लोगों का तो पता नहीं, लेकिन मीडिया जोन में काम करने वाले, बड़े पैकेजों पर हायर किए जाते हैं एवं एक महीने के वेतन में तीन महीने काम कर निकल लेते हैं, जिसको निकलने का रास्ता नहीं मिलता, वे केवल रोशनी की किरण का इंतजार करते हैं।

मैंने कंपनी छोड़ी। दूसरा कारण। हर दिन घर का मालिक बदल रहा था। हर रोज नए व्यक्ति के पास चैनल का जिम्मा होता था। अब स्थिति ऐसी है कि एक आईटी का बंदा चैनल संभाल रहा है। हो सकता है कि ख़बर प्रकाशित होने से पहले ही चैनल का​ जिम्मा किसी होटल के वेटर के हाथ में आ जाए।

इस चैनल को शुरू हुए दो साल हो चले हैं। सैंकड़े लोगों ने दिल्ली से अहमदाबाद एवं अहमदाबाद से वापिस दिल्ली का रास्ता नापा। अब तक इस चैनल के पास टैगलाइन नहीं। इसलिए इस चैनल के लिए 'जानो दुनिया — घर फूंक तमाशा देख' बेहतर टैगलाइन रहेगी।

कहते हैं कि चैनल का नाम सोच समझ कर नहीं। बल्कि इस ग्रुप के एक अन्य सैर सपाटा कारोबार से मिला, जो कभी सुनने में नहीं आया। सैर सपाटे के लिए जानो दुनिया का टैग था, जो एक चैनल में बदल गया। जैसे कि मैंने पहले ही कहा बच्चों की जिद्द की तरह बनाते चले गए।

मैं 'जानो दुनिया' छोड़ने वाला था। स्थितियां वैसी ही थी, जैसी ज्वॉइनिंग के बाद एचआर कर्मचारी ने कही थी, वेतन तीन माह इंतजार करने के बाद मिलेगा। मेरा वेतन कम था, मिलता रहा। जिस दिन छोड़ा। उस दिन एचआर ने कहा, ईमानदारी ​दिखाओ या न, यहां वेतन नहीं मिलेगा, अंतिम माह का। तब एक चुटकला जेहन में आया। यों कुछ यूं है।

चुटकला :- एचआर के गुप्ता जी को फोन आता है। दिल्ली से एक हाईप्रोफाइल न्यूज एडिटर बहुत हाई पैकेज मांग रहा है। गुप्ता जी ने कहा, हां बोल दो। एचआर मैनेजर चौंका एवं पूछा क्यूं। इतना वेतन। तो गुप्ता जी ने कहा, अरे पगले, क्या तुम्हारा पहला महीना है। यहां एक महीने के वेतन में तीन महीने काम हो जाता है। अंत सब बराबर। :-

बहुत सारे लोगों के साथ ऐसा हुआ। मेरा तो महीने का वेतन गया। मुझे दुख नहीं, लेकिन आने वालों के लिए इतना संदेश है, तीन महीने की सैलेरी का पैकेज लेकर आना। अगर तीन महीने न मिले तो काम चल जाए या फिर घर फूंक घर फूंक तमाशा देखने आना।

कुलवंत हैप्पी

संपर्क 9904204299

ईमेल : sharma.kulwant84@gmail.com


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