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जिंदल से उगाही की साजिश में चंद्रा के शामिल होने के सबूत

कोल आवंटन घोटाले की आड़ में जिंदल स्टील पावर लिमिटेड से उगाही के मामले में पुलिस की चार्जशीट के अनुसार जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा भी इस मामले में पूरी तरह से लिप्त थे। शिकायतकर्ता द्वारा गत माह ही उपलब्ध कराए गए ई-मेल व उससे पहले की फोन पर बातचीत से इसके सुबूत मिले हैं। चार्जशीट के अनुसार, संपादक समीर व सुधीर की जिंदल समूह के अधिकारियों से होने वाली मीटिंग से पहले व बाद में चंद्रा से मोबाइल पर बातचीत होती रही और वे पूरा ब्योरा समय-समय पर लेते रहे। पुलिस ने चंद्रा के उस तर्क को गलत बताया है कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं थी।

कोल आवंटन घोटाले की आड़ में जिंदल स्टील पावर लिमिटेड से उगाही के मामले में पुलिस की चार्जशीट के अनुसार जी न्यूज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा भी इस मामले में पूरी तरह से लिप्त थे। शिकायतकर्ता द्वारा गत माह ही उपलब्ध कराए गए ई-मेल व उससे पहले की फोन पर बातचीत से इसके सुबूत मिले हैं। चार्जशीट के अनुसार, संपादक समीर व सुधीर की जिंदल समूह के अधिकारियों से होने वाली मीटिंग से पहले व बाद में चंद्रा से मोबाइल पर बातचीत होती रही और वे पूरा ब्योरा समय-समय पर लेते रहे। पुलिस ने चंद्रा के उस तर्क को गलत बताया है कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं थी।

पटियाला हाउस अदालत में सुभाष चंद्रा, संपादक समीर आहलुवालिया व सुधीर चौधरी के खिलाफ दायर आरोपपत्र में पुलिस ने कई ऐसे तथ्यों का खुलासा किया है, जिनसे स्पष्ट होता है कि सुभाष चंद्रा इस उगाही प्रकरण से पूरी तरह से अवगत थे और उन्हीं के इशारे पर पूरा घटनाक्रम हुआ। आरोप पत्र के अनुसार, जिंदल समूह ने पुलिस को सुभाष चंद्रा व समीर के बीच 25 फरवरी 2012 के ईमेल संबंधी दस्तावेज 11 जुलाई 2013 को सौंपे हैं, जिनसे प्रभाव बनता है कि मई 2012 कैग की रिपोर्ट आने से पहले ही जिंदल के खिलाफ स्टोरी चलाने की योजना तैयार कर ली गई थी। इस कड़ी में जिंदल के खिलाफ अधिक से अधिक स्टोरी तैयार करने के लिए कहा गया।

पुलिस ने कहा कि चंद्रा ने पुलिस को 6 मार्च 2013 को दिए बयान में कहा है कि वह समीर व सुधीर के साथ इंटरनेट व ईमेल से संपर्क में नहीं थे और न ही मेल भेजा गया। जबकि 25 फरवरी 2012 के मेल से स्पष्ट है कि वे झूठ बोल रहे हैं। पुलिस ने कहा कि चंद्रा जिंदल के खिलाफ चल रही फर्जी खबरों से अवगत थे, इतना ही नहीं वे जिंदल के खिलाफ जाने वाली स्टोरी की पूरी तरह से निगरानी भी कर रहे थे।

आरोपपत्र के अनुसार 25 सितंबर, 2012 को जब नवीन जिंदल ने सुभाष चंद्रा से उनके संपादकों की डिमांड के संबंध में बात की तो उन्होंने जिंदल समूह के अधिकारियों और संपादकों के बीच हुई बात की जानकारी होने की हामी भरी थी। इतना ही नहीं इस मुद्दे पर उन्होंने अपने भाई जवाहर गोयल से बात करने को भी कहा। इसी कड़ी में 26 सितंबर को जवाहर गोयल नवीन जिंदल से मिलने उनके घर भी गए। पुलिस के अनुसार सुभाष चंद्रा अपने संपादक समीर व सुधीर से नियमित रूप से संपर्क में थे और जब उगाही की बात चल रही थी यानी सितंबर-अक्तूबर 2012 तो उनके बीच बातचीत का दौर अचानक बढ़ गया। वे विदेश में होने के बावजूद समीर से नियमित संपर्क में रहे।

पुलिस के अनुसार 13 सितंबर को जिंदल स्टील के अधिकारियों से समीर की बातचीत से पहले चंद्रा ने सुबह 10.35 बजे समीर से 99 सेकेंड बात की। बातचीत के तुरंत बाद समीर ने चंद्रा को उनके मोबाइल पर फोन कर 288 सेकेंड बात कर बैठक की पूरी जानकारी दी। इसी प्रकार 16 सितंबर को चंद्रा ने समीर को तीन बार फोन किया। पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर को फिर जिंदल के अधिकारियों से मीटिंग से पहले व बाद में समीर ने चंद्रा से उनके मोबाइल पर बात की।

इसके बाद 19 सितंबर को हुई मीटिंग के बाद समीर ने चंद्रा को फोन किया व 176 सेकेंड बात कर पूरी जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, इससे स्पष्ट है कि चंद्रा व समीर ने जिंदल से 100 करोड़ की उगाही के लिए विज्ञापन का सहारा लिया। पुलिस ने आरोप पत्र में ग्राफिक के जरिए बताया गया है कि चंद्रा व समीर के बीच सितंबर-अक्तूबर यानि उगाही के कार्यकाल में फोन पर सामान्य से ज्यादा संपर्क रहा। पुलिस के अनुसार, जनवरी 2012 से नवंबर 2012 के बीच के मात्र तीन माह ऐसे रहे जिनमें इन दोनों के बीच नियमित संपर्क रहा। फरवरी में ही दोनों के बीच 17-18 बार फोन पर बात हुई, जबकि सितंबर में 25 बार व अक्तूबर में 30 बार बात हुई। वरना इससे पहले औसतन दोनों के बीच बहुत कम ही बात होती थी। मार्च व जुलाई माह में तो बात ही नहीं हुई। अन्य माह में भी एक से पांच बार ही बात हुई थी। (अमर उजाला से साभार)

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