जिस विनोद शर्मा – कार्तिक शर्मा ने इतने संपादक खाए, वे क्या दीपक एंड अदर्स को छेड़ेंगे नहीं?

: कानाफूसी : गिनती शुरू करें. एसएन विनोद. मधुकर उपाध्याय. किशोर मालवीय. अनुरंजन झा. राहुल देव, एमजे अकबर… लंबी लिस्ट है. कई नाम छूटे भी हैं. इनके बीच में समानता ये है कि ये सभी इंडिया न्यूज या आज समाज के हिस्से बने और वहां से फिर इन लोगों को हटना पड़ा. कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा और उनके पुत्र कार्तिक शर्मा की फितरत है कि इन्हें नया आदमी तुरंत पसंद आ जाता है और बहुत जल्द दिल भी उब जाता है. प्रचुर पैसे के स्वामी ये पिता-पुत्र अपने मीडिया हाउस के जरिए मीडिया से जुड़ी शख्सियतों को अपने छांव तले लाने को उत्सुक रहते हैं और छांव में आते ही फिर उसे उसकी औकात बता दिखा देते हैं.

यही कारण है कि इतने सालों से अखबार और चैनल चला रहे इन पिता-पुत्र की जोड़ी के साथ कोई कायदे का पत्रकार देर तक नहीं जुड़ा रह सका. सब शोर मचाते हुए गए और चुपचाप बगले झांकते हुए निकल आए. एमजे अकबर के बारे में चर्चा है कि वे आजतक से हटने के बाद अपने दी संडे गार्जियन के लिए फिर से जोरशोर से जुट गए हैं, जिसका मालिकाना हक उनके अलावा विनोद शर्मा – कार्तिक शर्मा का भी है. पिछले दिनों इस दी संडे गार्जियन के चंडीगढ़ एडिशन की भी जोरशोर से लांचिंग हुई थी. मतलब ये कि एमजे अकबर जैसे बड़े पत्रकार भी कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा के साथ-साथ मिलकर काम करते हुए प्रसन्न हैं.

जेसिका लाल मर्डर केस के मुख्य अभियुक्त मनु शर्मा को सजा दिलवाने में बड़ी भूमिका मीडिया की रही है, उसी मीडिया की जो आज दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ता दिख रहा है. मनु शर्मा के खिलाफ मीडिया ट्रायल को देखने के बाद पिता विनोद शर्मा और पुत्र कार्तिक ने मीडिया वालों के खिलाफ मीडिया ट्रायल का इरादा बनाया और झोंक दिया ढेर सारा पैसा अखबार, चैनल और मैग्जीन पर. न्यूज एक्स, संडे गार्जियन, सीवीबी जैसे चैनलों, अखबारों, न्यूज एजेंसियों को खरीदा. दर्जनों बड़े लोगों को जोड़ा और निकाला. अब फिर से एक बड़ा प्रोजेक्ट खड़ा कर दिया है. दीपक चौरसिया जैसे पत्रकार के साथ. और ढेरों दिग्गज पत्रकार जुड़ने को बेताब हैं. लाइन लगाए हैं.

मनु शर्मा जल्द ही तिहाड़ से छूटने वाले हैं. अच्छे चरित्र के आधार पर उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है. संभव है, वह इन सभी बड़े पत्रकारों के बॉस बने नजर आएं. ऐसा हुआ तो भी किसी बड़े पत्रकार को कष्ट नहीं होगा क्योंकि आजकल नैतिकता को व्यवहार और बात में जीने का काम तो गरीब और देहाती लोग करते हैं. समझदार शहरी लोग सिर्फ नैतिकता व सरोकार की सिर्फ बातें करते हैं और इन बातों के जरिए लाखों करोड़ों अरबों बनाते हैं. चलिए, मीडिया इंडस्ट्री में शुरू हो रहे एक नए मीडिया शो का तमाशा देखिए.

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