जी न्यूज के एंकर सुमित अवस्थी किसके नमक का हक अदा करने के वास्ते आशुतोष को कोसते नजर आए?

Himanshu Priyadarshi : आज आम आदमी पार्टी की प्रेस कांफ्रेंस और मीडिया के ऊपर दिए अरविंद केजरीवाल के बयान का आशुतोष और संजय सिंह द्वारा बचाव करने के बाद अब जवाब देने की बारी मीडिया की थी। मुझे उम्मीद थी कि कुछ बड़प्पन भरा जवाब आएगा.. लेकिन जो दिखा उसने निराश ही किया। जी न्यूज़ के एंकर सुमित अवस्थी तो लड़ने की मुद्रा में कमर पर हाथ रखे फुंफकारते हुए आम आदमी पार्टी को कोसते नज़र आए।

आशुतोष के पत्रकारिता करियर पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ''जिस अंबानी का नमक उन्होंने IBN7 में रहते हुए खाया था उसका हक अदा करें या अब तक ली गई तनख्वाह वापस कर दें..'' उनकी सीख से ही जाहिर हो गया कि असल में वे इस वक्त किसके नमक का हक अदा कर रहे है …अब आप सोचिए …क्या इसी को पत्रकारिता कहते है… क्या ऐसी बातें मीडिया के अंदर काम करने वाले एक बड़े तबके की सोच का ओछापन या सतहीपन नहीं प्रदर्शित कर रहीं। आप किसी के ऊपर आरोप लगाओ तो लोकतंत्र.. कोई आपके ऊपर लगाए तो अराजक, भस्मासुर और न जाने क्या क्या। दूसरों को मर्यादा सिखाने वाले आपकी मर्यादा कौन तय करेगा। दूसरों पर आरोपों की जांच की मांग करने वाले चैनलों में से किसी ने भी आगे आकर अपने ऊपर लगे आरोपों की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करा लेने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई।

मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है.. इसको कुचलने की कोशिश की जा रही है.. बार बार इनका प्रलाप क्यों किया जा रहा है, क्यों ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि मीडिया कभी गलत नहीं होता। जबकि इसी मीडिया की ग़लतियों और बेवकूफियों के हज़ारों उदाहरण भरे पड़े हैं।…अरे भई इंसानों से बने हो खुद को भगवान मत समझो। BEA बयान जारी कर मीडिया का बचाव करता है… केजरीवाल के बयान की निंदा करता है. तो और क्या करेगा.. ये बिना नाखून और दांत का संगठन इसके अलावा कर भी क्या सकता है। बचाव नहीं करेगा तो दाल रोटी बंद हो जाएगी।

आखिरी बात मीडिया में कार्यरत विचारवान और प्रबुद्ध लोगों को मुझे लगता है सोचना पड़ेगा कि वे इस संगठन को नासमझ लोगों का अड्डा बनने देंगे या आगे आकर इसकी रोकथाम के लिए कुछ ठोस काम करेंगे। प्रंबधन की मामूली समझ रखने वाला व्यक्ति भी आसानी से बता सकता है कि कुछ अखबारों या चैनलों के खिलाफ आरोप पूरी मीडिया के खिलाफ आरोप नहीं होता। मीडिया एक व्यवस्था है तो चैनल एक ईकाई। जैसे राजनैतिक पार्टियों के खिलाफ आरोप लगाना लोकतंत्र पर हमला नहीं होता ठीक उसी प्रकार कुछ चैनलों पर आरोप मीडिया पर हमला नहीं होगा। इसे समझिए और सुधर जाइए वरना बेभाव की पड़ेगी फिर संभलना मुश्किल होगा।

आईआईएमसी से पत्रकारिता की डिग्री लेने वाले और पी7न्यूज में कार्यरत पत्रकार हिमांशु प्रियदर्शी के फेसबुक वॉल से.

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