जी वालों के कैंडल मार्च में कोई संपादक शामिल नहीं हुआ

कल जंतर-मंतर पर सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया के पक्ष में जी वालों ने कैंडल मार्च निकाला. इस कैंडल मार्च में शामिल होने के लिए कल फिल्म सिटी में जगह-जगह पोस्टर चिपकाए गए थे. इन पोस्टरों में निवेदक में नाम सुधीर और समीर की पत्नियों का था. दोनों संपादकों की पत्नियों ने मीडियाकर्मियों से कैंडल मार्च में पहुंच कर सुधीर और समीर के साथ हो रहे अन्याय का प्रतिवाद करने का अनुरोध किया था. पर जंतर-मंतर पर जी समूह से जुड़े लोगों के अलावा दूसरे मीडिया हाउसों के इक्का दुक्का लोगों को छोड़कर कोई और नहीं आया. 

भाड़े पर काफी लोग बुलाए गए थे. ऐसे ही एक शख्स से जब पूछा गया कि वह कैंडल मार्च क्यों निकाल रहा है तो उसने बताया कि उसे कैंडल थमा दिया गया है, उसे नहीं पता कि यह प्रोग्राम क्यों हो रहा है. वह खुद को नांगलोई का निवासी बता रहा था. कैंडल मार्च में जी न्यूज से जुड़े काफी लोग आए थे. कुछ लोगों ने बताया कि वे आन ड्यूटी पर हैं लेकिन उन्हें जंतर-मंतर पर जाने को कहा गया क्योंकि आज के दिन की यही नौकरी है.

जंतर मंतर पर दो तरफ जी न्यूज की ओवी वैन लगी थीं और कैंडल लिए हुए हुजूम को चैनल पर लाइव दिखाया जा रहा था. 'वी वांट जस्टिस' नारे लगाते जी न्यूज से जुड़े लोगों की ऊर्जा जल्द ही खत्म हो गई क्योंकि नारेबाजी छिटपुट ही हुई. नेशनल दुनिया वाले रास बिहारी जैसे कई पत्रकार भी कैंडल मार्च में दिखे. आलोक मेहता समेत कोई भी संपादक इस आयोजन में शरीक नहीं हुआ. कैंडल मार्च में जो पोस्टर लोगों के हाथ में थे उसमें एक तरफा जांच का विरोध करते हुए समीर और सुधीर को रिहा कराने की बात लिखी गई थी. 

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