जेपी जोशी को बचाने के लिए मीडिया पर दबाव बना रही है उत्तराखंड पुलिस!

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में आजकल जेपी जोशी सेक्स स्कैण्डल की चर्चा जोरों पर है। उत्तराखण्ड के अपर सचिव (गृह) जेपी जोशी की एक सीडी मीडिया के जरिए सामने आई थी। इसमें जेपी जोशी एक लड़की के साथ सेक्स करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित लड़की ने उत्तराखण्ड में जेपी जोशी के खिलाफ रेप की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन बड़े अधिकारी होने के कारण रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पाई।

लड़की का आरोप है कि जेपी जोशी ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर उसके साथ कई बार रेप किया। इस सीडी को लेकर लड़की दिल्ली के मीडिया चैनलों में चली गई और अपनी आपबीती बताकर खबर चलवाई। दिल्ली के चैनलों ने इस बारे में जब जेपी जोशी से संपर्क किया तो उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया। उसके बाद डीजीपी और सीएम बहुगुणा को ई-मेल के जरिए जवाब मांगा गया। प्रशासन ने कोई सहयोग नहीं किया।

कुछ चैनलों ने जब मामले को उठा दिया तो दिल्ली का एक एनजीओ लड़की की मदद को सामने आया। एनजीओ ने दिल्ली में लड़की की एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की- लेकिन शुरुआत में पुलिस ने टालमटोल किया। चूंकि जेपी जोशी उत्तराखण्ड पुलिस के सबसे ताकतवर और सीएम बहुगुणा के काफी करीबी अफसर थे, इसलिए दिल्ली की तत्कालीन कांग्रेस और केन्द्र सरकार के कई अधिकारी मामले में टालमटोल करते रहे।

बाद में एनजीओ के अड़ जाने और मीडिया में मामला आ जाने के बाद दिल्ली के पांडव नगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर से पहले पुलिस ने लड़की का मेडिकल भी करवाया। लड़की की जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद जेपी जोशी ने देहरादून के वसंत विहार थाने में लड़की के खिलाफ काउंटर एफआईआर दर्ज कराई। इसमें लड़की पर धोखा देने, ब्लैकमेलिंग करने सरकारी दस्तावेज चुराने जैसे संगीन आरोप लगाए गए।

उत्तराखण्ड की पुलिस इस एफआईआर को लेकर दिल्ली में लड़की की तलाश के लिए पहुंच गई। गिरफ्तारी की डर से लड़की ने ट्रांजिट बेल ले ली। पीड़ित लड़की ने दिल्ली में मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत अपने बयान दर्ज कराए, जिसमें जेपी जोशी पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर लंबे समय तक रेप करने का आरोप लगाया। ट्रांजिट बेल लेने के बाद लड़की जब देहरादून गई तो वहां उसे रेगुलर बेल नहीं मिली। ट्रांजिट बेल की अवधि खत्म होते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने लड़की पर दबाव डालकर अपने हिसाब से बयान लिखवा लिया।

इस बीच पुलिस ने एफआईआर में शामिल कई लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया। इस बीच दिल्ली में दर्ज जीरो एफआईआर के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने जेपी जोशी को पहले सस्पेंड किया और फिर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उनको आज तक बेल नहीं मिल पाई है। चूंकि नए महिला कानून के मुताबिक जेपी जोशी की गिरफ्तारी तय थी और उन्होंने सीडी में शामिल होने की बात मान ली थी- इसलिए बेल नहीं मिली। लेकिन सूत्रों के मुताबिक जेपी जोशी जेल में भी बेहद आराम के साथ समय काट रहे हैं।

इस बीच उत्तराखण्ड पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं उनके मुताबिक जेपी जोशी के सहयोगी सचिव स्तर के अफसर सुमन बाल्दिया इस सीडी कांड के मास्टरमाइंड थे। उन्होंने एक लोकल चैनल के साथ मिलकर जोशी को ट्रैप करवाया। वे जोशी को प्रमोशन रुकवाना चाहते थे, लेकिन नाकामयाब रहने पर सीडी मीडिया में रिलीज करवा दी।

जेपी जोशी की गिरफ्तारी के बाद उत्तराण्ड के पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूत्रों का दावा है कि कई और अफसरों और नेताओं की सीडियां देहरादून के चैनलों में टहल रही है। इससे डरे अफसरों ने जेपी जोशी के मुद्दे पर मीडिया पर पलटवार करने का फैसला किया। उनको डर है कि अगर उन्होंने अभी मीडिया पर दबाव नहीं बनाया तो आगे कई और अफसरों को निशाना बनाया जा सकता है।

पुलिस ने अपने अभियान के समर्थन में कुछ रीजनल चैनलों को भी शामिल किया। उत्तराखण्ड के कई रीजनल चैनलों में स्थानीय नेताओं का पैसा लगा हुआ है। दिल्ली के चैनलों पर दबाव बनाने के लिए जांच के नाम पर पुलिस टीम भेजी गई। इस खबर को चैनल वन, इंडिया न्यूज, इंडिया टीवी, समाचार प्लस, साधना सहित कई चैनलों ने दिखाया था। उत्तराखण्ड पुलिस जांच के नाम पर इन चैनलों को घेरने में जुटी हुई है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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