जेल से रिहा हुए सैयद मोहम्‍मद काजमी ने री-लांच किया उर्दू अखबार ‘कौमी सलामती’

पिछले दिनों इजराइल के राजदूत के कार में विस्‍फोट के बाद विवादों में आए वरिष्‍ठ पत्रकार सैयद मोहम्‍मद काजमी ने उर्दू अखबार 'कौमी सलमाती' को रीलांच किया है. सैयद मोहम्‍मद काजमी उस समय चर्चा में आए थे जब दिल्‍ली पुलिस ने उन्‍हें इजरायली राजदूत की कार में विस्‍फोट में संलिप्‍त होने के आरोपों में गिरफ्तार किया था. काजमी आठ महीने तक जेल में बिताने के बाद जमानत पर रिहा हुए हैं.

सिराज प्राचा के स्‍वामित्‍व वाले उर्दू अखबार 'कौमी सलामती' का कार्यालय राजधानी दिल्‍ली के निजामुद्दीन इलाके में है. दो रुपये मूल्‍य के इस उर्दू अखबार के रीलांच एडिशन में सैयद काजमी ने नई पुरानी बातों तथा खुद झेले गए दर्द को साझा करते हुए लिखा है कि 'प्‍यार सभी के लिए, नफरत किसी के लिए नहीं'. दो रुपये मूल्‍य का यह उर्दू अखबार 12 पेज के ब्राडसीट पर प्रकाशित हो रहा है. कौमी सलामती ने पहले दिन की अपनी लीड स्‍टोरी इरान-पाकिस्‍तान समेत दिल्‍ली में आए भूकंप को बनाया है. इस अखबार के लांचिंग कार्यक्रम में शिया धर्मगुरु सैयद कल्‍वे जवाद, बिजनेस मैन सिराजुद्दीन कुरैशी समेत तमाम लोग मौजूद रहे.

इसके पहले सैयद मोहम्‍मद काजमी ने तहलका को दिए गए एक इंटरव्‍यू में वर्तमान पत्रकारिता को अगंभीर श्रेणी का बताया था. उन्‍होंने भारत एवं दूसरे देशों की मीडिया को एक जैसा बताते हुए कहा था कि टीवी या प्रिंट दोनों माध्‍यम लोगों को सोचने पर मजबूर करने वाली खबरों की बजाय बिना मतलब की खबरें दिखाते हैं. आज के पत्रकार वैसी खबरें करते हैं जैसा उनका एडिटर उन्‍हें कहता है. काजमी ने कहा कि हालांकि प्रिंट मीडिया में अभी भी खबरों की संभावनाएं हैं परन्‍तु टीवी खबरों से दूर हो चुका है.

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