जोधपुर व भोपाल में पत्रकारों पर हुए हमले ने उठाये कर्इ सवाल

: संविधान का चौथा स्तंभ खतरे में : संविधान का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडियाकर्मी अब असुरक्षा के घेरे में है। जोधुपर व भोपाल में मीडियाकर्मियों के साथ जिस तरह बदसलूकी व मारपीट की घटना घटी है इसके बाद एक बार फिर मीडियाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं। क्या दूसरों के अधिकारों व हक की लडार्इ लड़ने वाले पत्रकारों के खुद के लिए भी कोई हक है? क्या पत्रकार के साथ कोर्इ भी अप्रिय घटना घटने पर सरकार या जिस कंपनी के लिए वो कार्य करता है, वो आगे आती है? नहीं, ऐसा नहीं है।
 
न राज्य सरकार ने कभी इस ओर कोर्इ प्रभावी कदम उठाये ना ही न्यूज चैनल कंपनियों ने कभी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कुछ किया। जब भी इस तरह की घटना घटती है, सब थोड़ा सा अफसोस जारी करके चुप बैठ जाते हैं। लेकिन अब शायद पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जगने का सही समय आ गया है कि हम सब मिलकर हमारे अधिकारों के लिए एक साथ होकर लड़ें और अपने खुद व परिवार के सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठायें ओर सरकार को भी जगायें।  
 
सुशील दिवाकर की टिप्पणी.

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